वृंदावन में ब्रजभाषा में श्री सत्य नारायण कथा काव्य का विमोचन, संतों ने बताया ब्रज साहित्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान
रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज
वृंदावन। हिंदी साहित्य विचार मंच, मथुरा एवं श्रीमद् भागवत पीठ, वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में श्री सत्य नारायण कथा के ब्रजभाषा काव्य रूपांतरण के विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। धार्मिक एवं साहित्यिक वातावरण में आयोजित इस समारोह में “श्री सत्य नारायण कथा रचना – ब्रज भाषा काव्य” ग्रंथ का संतों एवं विद्वानों के कर-कमलों से विमोचन किया गया। कार्यक्रम में ब्रजभाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति से जुड़े अनेक साहित्यकार, संत एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस काव्य कृति के रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष, संस्थापक, हिंदी साहित्य विचार मंच, मथुरा हैं। उन्होंने श्री सत्य नारायण की पावन कथा को ब्रजभाषा की मधुरता और काव्यात्मक शैली में प्रस्तुत किया है। आयोजन में वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक कथाओं को स्थानीय भाषा और साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
संतों की उपस्थिति में हुआ ग्रंथ विमोचन
समारोह की अध्यक्षता आचार्य पीठ पीठाधीश्वर, भागवत प्रभाकर पूज्य श्री मारुतिनंदनाचार्य श्रद्धेय श्री वागीश जी महाराज, कोटवन ने की। कार्यक्रम में पूज्य संत मोनी बाबा, अंतरराष्ट्रीय भागवत आचार्य श्री कृष्ण चन्द्र ठाकुर जी, राम कथा रस आचार्य ज्ञानेश गौड़ जी, गोवर्धन से पूर्ण प्रकाश कौशिक जी महाराज, पं. अमित भारद्वाज, बिहारी लाल वशिष्ठ जी, स्वामी गिर्राज वशिष्ठ, बालयोगी जी सहित अनेक संत एवं विद्वान उपस्थित रहे।
ग्रंथ के विमोचन के अवसर पर संतों ने रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ब्रजभाषा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की महत्वपूर्ण पहचान है। ऐसे में धार्मिक साहित्य को ब्रजभाषा के काव्य रूप में प्रस्तुत करने से साहित्य और संस्कृति के बीच संबंध और मजबूत होगा।
नई पीढ़ी को ब्रज संस्कृति से जोड़ने पर जोर
अपने आशीर्वचन में पूज्य श्री वागीश जी महाराज ने ब्रजभाषा में श्री सत्य नारायण कथा के काव्य रूपांतरण को सराहनीय प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की साहित्यिक कृतियां नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और ब्रज की वाणी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में स्थानीय भाषाओं और बोलियों के साहित्य को संरक्षित करने की आवश्यकता है। इसके लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विषयों को सरल एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करना उपयोगी हो सकता है। श्री सत्य नारायण कथा का ब्रजभाषा में काव्य रूपांतरण इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा गया।
साहित्यकारों और ब्रज के कवियों ने की सराहना
समारोह में शहर के अनेक गणमान्य साहित्यकार, ब्रज के कवि और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अखिल भारतीय गौड़ मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. पंकज शर्मा, वामन भगवान शोभा यात्रा के संरक्षक संजय पिपरोनिया, ब्रह्मभारती पत्रिका के संपादक महेंद्र दत्त आचार्य जी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मनोज मिश्र, संरक्षक पं. रमेश गौड़, आशीष, मधुकर गौड़ सहित अन्य संतजन एवं साहित्यप्रेमियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों और संतों ने ग्रंथ की विषयवस्तु और ब्रजभाषा में उसकी प्रस्तुति की सराहना की। वक्ताओं ने इसे ब्रज साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि ब्रज की पारंपरिक भाषा में धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर नई रचनाओं का सृजन साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक है।
ब्रजभाषा साहित्य को मिलेगा नया आयाम
ब्रजभाषा का भारतीय साहित्य में विशेष स्थान रहा है। श्रीकृष्ण भक्ति परंपरा से लेकर लोक साहित्य और काव्य तक ब्रजभाषा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐसे में श्री सत्य नारायण कथा को ब्रजभाषा के काव्य रूप में प्रस्तुत किया जाना धार्मिक साहित्य के साथ-साथ स्थानीय भाषाई विरासत के संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जब किसी धार्मिक कथा को क्षेत्रीय भाषा और काव्य शैली में प्रस्तुत किया जाता है तो उसके भाव और सांस्कृतिक संदर्भ पाठकों तक सहज रूप में पहुंच सकते हैं। इसी क्रम में यह कृति ब्रजभाषा के पाठकों और साहित्य प्रेमियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
रचनाकार ने जताया आभार
समारोह के अंत में रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष ने उपस्थित संतों, साहित्यकारों, अतिथियों और साहित्य प्रेमियों को सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कृति के माध्यम से श्री सत्य नारायण कथा को ब्रजभाषा के काव्य रूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य ब्रज की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपरा को साहित्य के माध्यम से आगे बढ़ाना है।
उन्होंने आयोजन में सहयोग देने वाले हिंदी साहित्य विचार मंच, मथुरा एवं श्रीमद् भागवत पीठ, वृंदावन से जुड़े सभी लोगों का भी धन्यवाद किया।
इस प्रकार, संतों, साहित्यकारों और ब्रजभाषा प्रेमियों की उपस्थिति में संपन्न यह विमोचन समारोह धार्मिक आस्था और साहित्यिक परंपरा के संगम का अवसर बना। वहीं, “श्री सत्य नारायण कथा रचना – ब्रज भाषा काव्य” के माध्यम से ब्रजभाषा साहित्य को नई रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का प्रयास भी सामने आया।

