GSVM मेडिकल कॉलेज में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की शुरुआत, महिला मरीज का सफल ऑपरेशन
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में आधुनिक उपचार तकनीक की शुरुआत की गई है। विभाग में अब एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी जैसी न्यूनतम इनवेसिव तकनीक के माध्यम से मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। इसी क्रम में बीते सोमवार को एक महिला मरीज की एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।
मेडिकल कॉलेज के अनुसार, यह सर्जरी डॉ. रवि गर्ग की देखरेख में की गई। ऑपरेशन में डॉ. रवि गर्ग के साथ डॉ. चंदन कुमार और डॉ. विश्वजीत सिंह का सहयोग रहा। वहीं, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. मीनाक्षी और डॉ. रत्नेश ने सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक बताई गई। खास बात यह रही कि मरीज को ऑपरेशन के दूसरे दिन ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मेडिकल कॉलेज में इस आधुनिक तकनीक की शुरुआत को स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जीएसवीएम में शुरू हुई एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी
स्पाइन से जुड़ी समस्याओं के उपचार के लिए चिकित्सा क्षेत्र में लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इसी क्रम में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी को न्यूनतम इनवेसिव सर्जिकल तकनीकों में शामिल किया जाता है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में इस तकनीक की शुरुआत से अब ऐसे मरीजों के लिए आधुनिक उपचार विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकेगा, जिनके लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद यह तकनीक उपयुक्त मानी जाएगी।
इस तकनीक में ऑपरेशन के लिए पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में अपेक्षाकृत छोटा चीरा लगाया जाता है। इसके जरिए विशेष उपकरण और कैमरा आधारित तकनीक की सहायता से संबंधित हिस्से तक पहुंच बनाई जाती है।
हालांकि, प्रत्येक मरीज के लिए सर्जरी की उपयुक्तता अलग-अलग होती है। इसलिए मरीज की बीमारी, उसकी स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही यह तय किया जाता है कि एंडोस्कोपिक तकनीक उसके लिए उपयुक्त है या नहीं।
महिला मरीज की सफल सर्जरी
मेडिकल कॉलेज में बीते सोमवार को भर्ती एक महिला मरीज की एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की गई। यह ऑपरेशन डॉ. रवि गर्ग की देखरेख में संपन्न हुआ।
सर्जिकल टीम में डॉ. रवि गर्ग, डॉ. चंदन कुमार और डॉ. विश्वजीत सिंह शामिल रहे। वहीं, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. मीनाक्षी और डॉ. रत्नेश ने आवश्यक सहयोग दिया।
सर्जरी पूरी होने के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रही। इसके बाद चिकित्सकों की निगरानी में मरीज की रिकवरी पर नजर रखी गई। मेडिकल कॉलेज के अनुसार, मरीज को सर्जरी के दूसरे दिन ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल से अपेक्षाकृत कम समय में छुट्टी मिलना मरीज और उसके परिवार के लिए महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, सर्जरी के बाद रिकवरी का समय प्रत्येक मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करता है।
क्या है एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी?
आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. रवि गर्ग ने बताया कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी आधुनिक न्यूनतम इनवेसिव सर्जिकल तकनीकों में से एक है। इसमें पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में छोटे चीरे के माध्यम से ऑपरेशन करने का प्रयास किया जाता है।
इस प्रक्रिया में आसपास के ऊतकों को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। इसी वजह से इसे न्यूनतम इनवेसिव तकनीक कहा जाता है।
डॉ. रवि गर्ग के अनुसार, इस तकनीक के संभावित लाभों में ऑपरेशन के बाद कम दर्द, कम रक्तस्राव, जल्दी चलने-फिरने की क्षमता हासिल करना और अस्पताल में कम अवधि तक रहने जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।
इसके अलावा, कुछ उपयुक्त मरीजों में रिकवरी का समय भी पारंपरिक सर्जिकल प्रक्रियाओं की तुलना में कम हो सकता है। हालांकि, इसका परिणाम बीमारी की प्रकृति, मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और सर्जरी की जटिलता जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।
मरीजों के लिए आधुनिक उपचार विकल्प
स्पाइन से जुड़ी समस्याओं में हर मरीज की स्थिति अलग होती है। इसलिए उपचार का विकल्प तय करने से पहले चिकित्सक मरीज की जांच, बीमारी की गंभीरता और अन्य चिकित्सकीय पहलुओं का मूल्यांकन करते हैं।
ऐसे में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की सुविधा शुरू होने से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आधुनिक स्पाइन सर्जिकल तकनीकों के विस्तार का अवसर मिलेगा। मरीजों के लिए कम इनवेसिव उपचार विकल्पों की उपलब्धता बढ़ाना चिकित्सा सेवाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
वहीं, किसी भी सर्जरी की तरह एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में भी मरीज का चयन और विशेषज्ञ चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी होता है। इसलिए मरीजों को अपनी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही उपचार संबंधी निर्णय लेना चाहिए।
सर्जिकल टीम ने किया समन्वित प्रयास
इस पहली सर्जरी को सफल बनाने में ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थीसिया टीम के बीच समन्वय महत्वपूर्ण रहा। ऑपरेशन के दौरान डॉ. रवि गर्ग, डॉ. चंदन कुमार और डॉ. विश्वजीत सिंह ने सर्जिकल प्रक्रिया में भूमिका निभाई।
वहीं, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. मीनाक्षी और डॉ. रत्नेश ने सहयोग प्रदान किया। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रहने से टीम के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना गया।
स्पाइन उपचार में आगे बढ़ने की पहल
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का ऑर्थोपेडिक्स विभाग लगातार आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनी सेवाओं में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की शुरुआत भी इसी प्रयास का हिस्सा है।
इस पहल का उद्देश्य मरीजों को उनकी चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार आधुनिक और कम इनवेसिव उपचार विकल्प उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में इस तकनीक के विस्तार से स्पाइन से जुड़ी चुनौतियों वाले उपयुक्त मरीजों को उपचार के अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी की शुरुआत कानपुर के चिकित्सा क्षेत्र में एक नई सुविधा के रूप में सामने आई है। पहली सर्जरी में महिला मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और उसे दूसरे दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। विभाग के अनुसार, यह पहल आधुनिक स्पाइन सर्जिकल तकनीकों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

