फतेहपुर में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, कोर्ट में मामला विचाराधीन; प्रशासन से न्याय की गुहार
रिपोर्ट – शुभम साहू
फतेहपुर: जहानाबाद कस्बे में पुश्तैनी जमीन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। पीड़ित मोहम्मद इसराइल ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जमीन से सटी ग्राम समाज की भूमि पर भी कब्जे की कोशिश किए जाने का दावा किया है। पीड़ित के मुताबिक, संबंधित भूमि को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अदालत के अंतिम निर्णय से पहले जमीन की स्थिति में किसी तरह का बदलाव किए जाने को लेकर उन्होंने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
पीड़ित ने अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन करने और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण सभी पक्षों को अदालत के निर्णय का इंतजार करना चाहिए।
करीब 35 वर्षों से जमीन पर कब्जे का दावा
मोहम्मद इसराइल के अनुसार, वह करीब 35 वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर काबिज हैं। उनका कहना है कि जमीन उनके परिवार से जुड़ी हुई है और लंबे समय से उसका इस्तेमाल उनके परिवार द्वारा किया जाता रहा है।
पीड़ित का आरोप है कि मोहम्मद अली नाम का व्यक्ति उक्त जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। इसराइल ने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति स्वयं को भाजपा का कार्यकर्ता बताता है और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से संरक्षण प्राप्त होने की बात कहकर दबाव बनाने का प्रयास करता है।
हालांकि, ये सभी आरोप पीड़ित मोहम्मद इसराइल की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और दूसरे पक्ष का विस्तृत बयान सामने आना बाकी है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्राम समाज की जमीन को लेकर भी उठे सवाल
पीड़ित ने अपनी पुश्तैनी जमीन के साथ लगी ग्राम समाज की भूमि को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निजी भूमि के विवाद के साथ-साथ पास में मौजूद ग्राम समाज की जमीन पर भी कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्राम समाज की जमीन सार्वजनिक उपयोग और सरकारी अभिलेखों से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सामने आती है तो राजस्व विभाग द्वारा अभिलेखों और मौके की स्थिति का सत्यापन किया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
इसी को देखते हुए मोहम्मद इसराइल ने प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि के साथ-साथ आसपास की ग्राम समाज की जमीन की भी पैमाइश और अभिलेखीय जांच कराई जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौके पर किस भूमि की वास्तविक सीमा कहां तक है।
न्यायालय में विचाराधीन है जमीन का मामला
मोहम्मद इसराइल का कहना है कि पुश्तैनी जमीन से संबंधित विवाद पहले से न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में वह चाहते हैं कि अदालत के अंतिम निर्णय तक विवादित भूमि की स्थिति में किसी तरह का बदलाव न किया जाए।
पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक न्यायालय से मामले में अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार के नए निर्माण या कब्जे की कोशिश को रोका जाए। उनका कहना है कि इससे विवाद बढ़ने की संभावना कम होगी और दोनों पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, न्यायालय में लंबित मामले में वास्तविक अधिकार और भूमि से संबंधित दावे का निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही होगा।
अधिकारियों से कई बार शिकायत का दावा
पीड़ित मोहम्मद इसराइल का कहना है कि उन्होंने जमीन से जुड़े विवाद को लेकर पहले भी संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। उनका दावा है कि शिकायतों के बावजूद अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
इसी वजह से उन्होंने एक बार फिर प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि राजस्व अभिलेखों, भूमि की पैमाइश और मौके की स्थिति का सत्यापन कराया जाए, ताकि विवाद को तथ्यात्मक आधार पर समझा जा सके।
पीड़ित के मुताबिक, यदि प्रशासनिक स्तर पर जमीन की स्थिति स्पष्ट कर दी जाती है तो विवाद को लेकर बनी स्थिति काफी हद तक साफ हो सकती है।
राजस्व विभाग की जांच से स्पष्ट हो सकती है स्थिति
मामले में अब राजस्व प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भूमि विवाद में संबंधित दस्तावेज, खतौनी, नक्शा, सीमांकन और मौके की स्थिति की जांच के बाद ही जमीन की वास्तविक स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।
यदि ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे की शिकायत भी सामने आई है तो संबंधित सरकारी भूमि का रिकॉर्ड और मौके पर उसकी स्थिति की जांच किया जाना भी जरूरी होगा। इसके बाद प्रशासन यह निर्धारित कर सकता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है।
वहीं, यदि मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है तो प्रशासनिक कार्रवाई भी न्यायिक प्रक्रिया और लागू नियमों के अनुरूप ही की जानी होगी।
दोनों पक्षों का बयान सामने आना जरूरी
किसी भी भूमि विवाद में केवल एक पक्ष की शिकायत के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। इस मामले में भी मोहम्मद इसराइल की ओर से लगाए गए आरोपों के साथ-साथ दूसरे पक्ष का पक्ष जानना जरूरी है।
साथ ही, न्यायालय में चल रहे मामले से संबंधित दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी पीड़ित के आरोपों पर आधारित है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
मोहम्मद इसराइल ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन, भूमि की पैमाइश और मौके की स्थिति की जांच कराने की अपील की है।
पीड़ित का कहना है कि उसे प्रशासन की कार्रवाई पर भरोसा है और उम्मीद है कि अधिकारियों की जांच के बाद वास्तविक तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल जहानाबाद क्षेत्र के इस भूमि विवाद में प्रशासनिक जांच और न्यायालय की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और ग्राम समाज की भूमि को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं, न्यायालय में लंबित मामले के अंतिम निर्णय के बाद संबंधित पक्षों के अधिकार को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

