गणेश विसर्जन 2026: अनंत चतुर्दशी पर ऐसे करें बप्पा की विदाई, तुरंत जानें सही विधि

365a2887-8c45-4b18-b2fd-050577b1c40f

Digital UP News

गणेश विसर्जन 2026: गणेश उत्सव के दौरान घरों, मंदिरों और पंडालों में विराजमान भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के बाद अब बप्पा की विदाई का समय आ गया है। गणेश विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026 को है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा और आरती करने के बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ यह धार्मिक उत्सव कई परिवारों में अलग-अलग परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है। कुछ घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन डेढ़ दिन बाद किया जाता है, जबकि कई परिवार तीसरे, पांचवें, सातवें या दसवें दिन बप्पा को विदाई देते हैं। वहीं, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित बड़ी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन आमतौर पर अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है।

अनंत चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में गणेश उत्सव के समापन के लिए अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व बताया जाता है। गणपति स्थापना के बाद श्रद्धालु कई दिनों तक भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि, बुद्धि तथा मंगल की कामना करते हैं। इसके बाद विसर्जन के माध्यम से बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है।

हालांकि, गणेश विसर्जन के लिए केवल अनंत चतुर्दशी ही निर्धारित दिन नहीं है। परिवारों में चली आ रही परंपरा के अनुसार प्रतिमा का विसर्जन तीसरे, पांचवें, सातवें या अन्य निर्धारित दिन भी किया जा सकता है। इसलिए श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विसर्जन करते हैं।

गणेश विसर्जन से पहले ऐसे करें पूजा

गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करने से पहले उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान गणेश के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें फूल, दूर्वा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।

इसके बाद भगवान गणेश को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाया जाता है। गणपति पूजा में मोदक और लड्डू का विशेष महत्व माना जाता है। भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणेश जी की आरती करते हैं।

आरती के बाद भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है। साथ ही, परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए बप्पा को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण दिया जाता है।

ढोल-नगाड़ों के साथ होती है बप्पा की विदाई

पूजा और आरती पूरी होने के बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है। सार्वजनिक पंडालों में यह प्रक्रिया काफी श्रद्धा और उत्साह के साथ पूरी की जाती है। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ गणेश प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक लेकर जाते हैं।

इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया’ और ‘गणेश महाराज की जय’ जैसे जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इसके बाद श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा को जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करते हैं।

कई स्थानों पर गणेश विसर्जन का कार्यक्रम देर रात तक चलता है और अगले दिन सुबह तक श्रद्धालु बप्पा को विदाई देते नजर आते हैं। हालांकि, विसर्जन के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों और सुरक्षित विसर्जन व्यवस्था का पालन करना भी जरूरी है।

घर पर कैसे करें गणपति विसर्जन?

आजकल पर्यावरण और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई परिवार घर पर ही गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। खासकर छोटी और घर में स्थापित की गई प्रतिमाओं के लिए यह तरीका अपनाया जाता है।

इसके लिए सबसे पहले एक साफ और पर्याप्त बड़े बर्तन या टब में स्वच्छ पानी भरें। इसमें श्रद्धा के अनुसार थोड़ा गंगाजल मिलाया जा सकता है। इसके बाद पानी में फूल डालें। पूजा और आरती पूरी करने के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ उस जल में विसर्जित करें।

विसर्जन के बाद प्रतिमा पूरी तरह घुलने पर प्राप्त मिट्टी को पौधों या अन्य उपयुक्त स्थान पर इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते प्रतिमा ऐसी प्राकृतिक सामग्री से बनी हो। वहीं, प्लास्टर ऑफ पेरिस या रासायनिक रंगों वाली प्रतिमाओं के मामले में स्थानीय प्रशासन द्वारा बताए गए विसर्जन नियमों का पालन करना चाहिए।

विसर्जन के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

गणेश विसर्जन श्रद्धा और आस्था का पर्व है। इसलिए विसर्जन के दौरान स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। संभव हो तो प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमा का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य कचरे को जल में डालने से बचना चाहिए।

सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर प्रशासन द्वारा बनाए गए निर्धारित स्थान का ही उपयोग करना चाहिए। साथ ही, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। इस प्रकार धार्मिक परंपरा को निभाते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकता है।

श्रद्धा के साथ कहें- गणपति बप्पा मोरया

गणेश विसर्जन भगवान गणेश को भावपूर्ण विदाई देने का अवसर है। अनंत चतुर्दशी के दिन पूजा, आरती और भोग के बाद श्रद्धालु बप्पा को विदाई देते हैं और अगले वर्ष फिर आने की कामना करते हैं। इसलिए विसर्जन के समय उत्साह के साथ-साथ श्रद्धा, स्वच्छता और पर्यावरण का भी ध्यान रखना चाहिए।

You may have missed