HBTU के अष्टम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का आह्वान: नवाचार और तकनीक से विकसित भारत-2047 का निर्माण करें युवा
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर: हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (HBTU), कानपुर का अष्टम दीक्षांत समारोह शुक्रवार को गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में विद्यार्थियों को 1,071 उपाधियां और 47 स्वर्ण एवं अन्य पदक प्रदान किए गए।
इसके साथ ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिनमें 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरण, 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण, उत्कृष्ट शिक्षकों, विद्यार्थियों और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का सम्मान तथा विश्वविद्यालय के नए भवनों का लोकार्पण प्रमुख रहे।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं से केवल रोजगार तलाशने तक सीमित न रहने, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले, नवाचार आधारित समाधान विकसित करने वाले और विकसित भारत-2047 के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने का आह्वान किया।
1,071 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 47 प्रतिभाओं को मिला सम्मान
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय ने विभिन्न संकायों के कुल 1,071 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं। वहीं 47 मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए पदकों से सम्मानित किया गया।
इनमें 28 छात्र और 19 छात्राएं शामिल रहीं।
इसके अतिरिक्त सभी उपाधियां और अंकपत्र डिजिलॉकर पर भी उपलब्ध कराए गए, जिससे विद्यार्थियों को डिजिटल दस्तावेज सुरक्षित रूप से उपलब्ध हो सकें।
डिजिलॉकर के कम उपयोग पर राज्यपाल ने जताई चिंता
समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डिजिलॉकर के सीमित उपयोग पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिया कि यह पता लगाया जाए कि विद्यार्थी इस सुविधा का अपेक्षाकृत कम उपयोग क्यों कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान डिजिलॉकर पर अपलोड किए गए प्रमाणपत्रों की संख्या में आई कमी का भी विस्तृत विश्लेषण किया जाए।
साथ ही विद्यार्थियों से डिजिटल सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने की अपील की।
विकसित भारत-2047 के लिए नवाचार और अनुसंधान पर दिया जोर
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, डेटा साइंस, हरित ऊर्जा और डिजिटल नवाचार का युग है।
ऐसे में तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं की भूमिका केवल नौकरी प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं को समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने, अनुसंधान को बढ़ावा देने और नई तकनीकों के विकास में योगदान देना चाहिए।
यही प्रयास भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को गति देंगे।
उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान देना नहीं, बल्कि समाज के जीवन स्तर में सुधार लाना भी है।
डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियों का उल्लेख
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान ने पिछले वर्षों में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाया है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि तथा अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन और मेक इन इंडिया जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम युवाओं में नवाचार और उद्यमिता की नई ऊर्जा भर रहे हैं।
तकनीक का उपभोक्ता नहीं, सृजनकर्ता बन रहा है भारत
राज्यपाल ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि नई तकनीकों का विकास करने वाला राष्ट्र बन रहा है।
उन्होंने INS दूनागिरी, INS संशोधक, INS अग्रय, मेड इन इंडिया C-295 विमान और DRDO द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और अनुसंधान का प्रमाण हैं।
विश्वविद्यालय परिसर की कमियां दूर करने के दिए निर्देश
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण करने के बाद अधोसंरचना से जुड़ी कुछ कमियों को एक से दो माह के भीतर दूर करने के निर्देश दिए।
उन्होंने निर्माणाधीन छात्रावासों में—
- वॉशिंग एरिया,
- रसोईघर,
- स्टोर,
- किचन प्लेटफॉर्म,
- आरओ सिस्टम,
- वॉशिंग मशीन,
- कपड़े सुखाने की व्यवस्था
जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त उन्होंने बालिका छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, आरओ की स्थापना तथा अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की व्यवस्था विकसित करने पर भी विशेष बल दिया।
भवनों का डिजाइन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बने
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि तकनीकी संस्थानों में भवनों का निर्माण केवल वर्तमान आवश्यकताओं को देखकर नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय, पुस्तकालय, छात्रावास, आंगनबाड़ी केंद्र और विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों का डिजाइन उपयोगकर्ताओं की आयु, सुविधा और आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड की ऊंचाई, पुस्तकालय की स्थिति तथा आधारभूत सुविधाओं की योजना उपयोगकर्ता-केंद्रित होनी चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण और दूरदर्शी निर्माण पर दिया विशेष बल
राज्यपाल ने अभियंताओं को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क निर्माण के बाद बार-बार विभिन्न विभागों द्वारा खुदाई करना सार्वजनिक धन की अनावश्यक बर्बादी है।
उन्होंने अभियंताओं को सलाह दी कि निर्माण कार्यों में दीर्घकालिक योजना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को प्राथमिकता दें।
साथ ही उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के नगर नियोजन दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ निर्माण कार्य किए जाने चाहिए।
आंगनबाड़ी, एचपीवी टीकाकरण और सामाजिक सरोकारों पर भी विशेष फोकस
दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा।
इस अवसर पर—
- उन्नाव के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गईं।
- 600 बालिकाओं का एचपीवी टीकाकरण कराया गया।
- उत्कृष्ट शिक्षकों, विद्यार्थियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और एचपीवी अभियान से जुड़े अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
- विश्वविद्यालय के नवीन भवनों का लोकार्पण और विद्यार्थियों के लिए नई वाहन सेवा का शुभारंभ भी किया गया।
इन पहलों ने विश्वविद्यालय की सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि और कुलपति ने दी शुभकामनाएं
समारोह में मुख्य अतिथि एवं एफडीडीआई के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया।
वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर समशेर ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान और नवाचार संबंधी उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय का अष्टम दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तकनीकी शिक्षा, नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, सामाजिक उत्तरदायित्व और विकसित भारत-2047 के संकल्प को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संबोधन के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय का भारत केवल रोजगार पाने वाले युवाओं से नहीं, बल्कि नई तकनीक विकसित करने वाले, रोजगार सृजित करने वाले और समाज की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने वाले अभियंताओं से बनेगा।
साथ ही विश्वविद्यालय परिसर की अधोसंरचना, छात्र सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर दिए गए निर्देश तकनीकी शिक्षा को और अधिक उपयोगी तथा भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

