GSVM मेडिकल कॉलेज में SBI की नई पहल: जननी सुरक्षा योजना लाभार्थियों के लिए बेडसाइड बैंक खाता सुविधा शुरू
रिपोर्ट- सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में जननी सुरक्षा योजना (JSY) की लाभार्थी महिलाओं के लिए बेडसाइड बैंक खाता खोलने की सुविधा शुरू की है।
इस अभिनव व्यवस्था के माध्यम से अब पात्र महिलाओं के बैंक खाते अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही उनके बेड के पास खोले जाएंगे।
इससे उन्हें बैंक शाखाओं के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और सरकारी सहायता राशि सीधे उनके खातों में समयबद्ध एवं सुरक्षित रूप से प्राप्त हो सकेगी।
यह पहल न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी गति प्रदान करेगी।
अस्पताल में ही खुलेगा बैंक खाता, प्रक्रिया होगी आसान
नई व्यवस्था के तहत जननी सुरक्षा योजना की पात्र महिलाओं को अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही बैंक खाता उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके परिणामस्वरूप योजना के अंतर्गत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और अन्य सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंच सकेगी।
अब तक कई लाभार्थियों को बैंक खाता खुलवाने के लिए अलग से बैंक शाखा जाना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों दोनों की आवश्यकता होती थी।
हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया अस्पताल परिसर में ही पूरी हो सकेगी।
प्राचार्य ने बताया वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा कदम
कार्यक्रम के दौरान जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने भारतीय स्टेट बैंक की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अस्पताल में ही बैंक खाता खोलने की सुविधा गरीब एवं जरूरतमंद महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और वित्तीय समावेशन जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से पात्र लाभार्थियों तक पहुंचेगा और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने की पहल की सराहना
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), कानपुर नगर ने कहा कि अस्पताल में बैंक खाता खुलने से लाभार्थियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
साथ ही सरकारी सहायता राशि समय पर सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि इस मॉडल का सफल संचालन होता है तो इसे अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी लागू किया जा सकता है।
विभागाध्यक्ष और सीएमएस ने जताया आभार
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी तथा सीएमएस डॉ. अनिता गौतम ने भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मॉडल भविष्य में अन्य अस्पतालों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा तथा महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक सरलता और पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराया जा सकेगा।
वित्तीय साक्षरता एवं साइबर सुरक्षा पर विशेष संगोष्ठी
इस अवसर पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा भारतीय स्टेट बैंक के संयुक्त तत्वावधान में “वित्तीय साक्षरता एवं वित्तीय समावेशन” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी महिलाओं, उनके परिजनों तथा स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षित बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी योजनाओं और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना था।
विशेषज्ञों ने बताया कि आज डिजिटल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में वित्तीय जानकारी और साइबर सुरक्षा दोनों का ज्ञान प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक हो गया है।
सर्वेक्षण में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य
संगोष्ठी के दौरान प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के लगभग 400 कर्मचारियों के बीच किए गए वित्तीय साक्षरता सर्वेक्षण के परिणाम भी साझा किए गए।
सर्वेक्षण के अनुसार—
- लगभग 10 प्रतिशत कर्मचारियों ने बताया कि वे किसी न किसी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।
- करीब 95 प्रतिशत कर्मचारियों को बैंकों के माध्यम से संचालित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
- लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं थी कि साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए और शिकायत किस प्रकार दर्ज करनी चाहिए।
इन निष्कर्षों से स्पष्ट हुआ कि वित्तीय एवं डिजिटल जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता केवल आम नागरिकों में ही नहीं बल्कि संस्थागत स्तर पर भी मौजूद है।
डिजिटल बैंकिंग और सुरक्षित लेन-देन पर दी गई जानकारी
संगोष्ठी में एसबीआई के हिमांशु सिंह ने प्रतिभागियों को बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया, जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत मिलने वाली DBT राशि, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम, आधार आधारित बैंकिंग सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, बीमा और पेंशन योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।
इसके अलावा उन्होंने साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को सलाह दी कि—
- ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।
- बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखें।
- संदिग्ध लिंक और कॉल से सावधान रहें।
- केवल आधिकारिक बैंकिंग ऐप और वेबसाइट का उपयोग करें।
- साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत संबंधित बैंक और हेल्पलाइन से संपर्क करें।
आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए वित्तीय साक्षरता जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वित्तीय साक्षरता केवल बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम भी है।
जब लोगों को बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी होती है, तब वे न केवल योजनाओं का पूरा लाभ उठा पाते हैं बल्कि वित्तीय जोखिमों से भी सुरक्षित रहते हैं।
विशेष रूप से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में इस प्रकार की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बड़ी संख्या में शामिल हुए चिकित्सक एवं बैंक अधिकारी
कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख संजय चौधरी, शाखा प्रबंधक सिम्मी साहू, सीएसआरएम हिमांशु सिंह, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के जोनल हेड जितेंद्र शुक्ल, एसबीआई वेल्थ की सर्विस मैनेजर विनीता रावत, एसबीआई कार्ड्स के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर अमरेंद्र सिंह तथा एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के सहायक प्रबंधक प्रशांत सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
वहीं, कार्यक्रम में डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. रश्मि गुप्ता, डॉ. रश्मि यादव, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, पैरामेडिकल स्टाफ और जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी महिलाओं ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. फरहीन, डॉ. मीनाक्षी और डॉ. उमंग ने किया, जबकि मेट्रन मीरा, सिस्टर प्रीता और विशाल ने आयोजन में सहयोग दिया।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और भारतीय स्टेट बैंक की यह संयुक्त पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक सकारात्मक और व्यावहारिक कदम है।
अस्पताल में ही बैंक खाता खोलने की सुविधा से जननी सुरक्षा योजना की लाभार्थी महिलाओं को सरकारी सहायता समय पर और सीधे उनके खातों में प्राप्त होगी।
साथ ही वित्तीय साक्षरता और साइबर सुरक्षा पर आयोजित संगोष्ठी ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल युग में आर्थिक जागरूकता और सुरक्षित बैंकिंग व्यवहार को बढ़ावा देना उतना ही आवश्यक है जितना कि बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना।

