आजमगढ़ में अनुष्ठान के दौरान विवाद, तीन की मौत-तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हुआ आरोपी

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Digital UP News Desk

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में पांच दिवसीय अनुष्ठान के दौरान हुआ विवाद गंभीर घटना में बदल गया। बुधवार शाम को अनुष्ठान में शामिल लोगों और अरविंद सिंह के बीच आधार कार्ड मांगने को लेकर कहासुनी हुई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और हुई गोलीबारी में अरविंद की पत्नी बबिता सिंह समेत तीन लोगों की मौत हो गई।

घटना के बाद आरोपी अपने तीन छोटे बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने करीब सात घंटे तक चले अभियान के बाद बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। इस दौरान आरोपी और एक बच्चा घायल हुए, जबकि दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाद में आरोपी की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।

आधार कार्ड मांगने को लेकर शुरू हुआ विवाद

चश्मदीद हिमांशु मिश्रा के अनुसार, शंभूपुर गांव के एक घर में बाधा निवारण से संबंधित पांच दिवसीय अनुष्ठान कराया जा रहा था। उनके 55 वर्षीय पिता अखिलेश मिश्रा समेत कुछ लोग अनुष्ठान में शामिल थे। घटना के दिन अनुष्ठान का चौथा दिन था।

हिमांशु के मुताबिक, शाम करीब पांच बजे अरविंद सिंह बाजार से अपने घर लौटा। उसने अनुष्ठान करा रहे लोगों से आधार कार्ड मांगना शुरू किया। इसी बात को लेकर उसकी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। चश्मदीद का दावा है कि इस दौरान अरविंद ने लाठी उठा ली। वहां मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की।

हालांकि, इसके बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि अरविंद ने असलहा निकाल लिया। इसके बाद हुई गोलीबारी में कई लोग घायल हुए।

पत्नी समेत तीन लोगों की मौत

हिमांशु मिश्रा के अनुसार, स्थिति बिगड़ने के दौरान अरविंद की पत्नी बबिता सिंह बीच में आ गईं। वह अनुष्ठान में शामिल लोगों को बचाने का प्रयास कर रही थीं। इसी दौरान वह गोली लगने से घायल हो गईं।

इसके बाद पठखौली निवासी 42 वर्षीय महेंद्र पाठक भी गोली लगने से घायल हुए। चश्मदीद के अनुसार, वह मौके पर गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। इसके बाद हिमांशु मिश्रा के 55 वर्षीय पिता अखिलेश मिश्रा को भी गोली लगी। उन्हें बचने के लिए भागने की कोशिश करते देखा गया, लेकिन वह भी गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई।

इस घटना में बबिता सिंह, महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा की जान चली गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे और कुछ ही समय में घर के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।

तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हुआ आरोपी

घटना के बाद स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई, जब अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। कमरे में पांच वर्षीय परी, छह वर्षीय लक्खा और महज सात महीने की बच्ची मौजूद थी।

पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती थी। एक तरफ घटना की जांच और आरोपी को नियंत्रित करना था, वहीं दूसरी ओर तीन मासूम बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। इसलिए पुलिस ने जल्दबाजी के बजाय बातचीत और समझाने का रास्ता अपनाया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, डीआईजी आजमगढ़ सुनील कुमार सिंह और एडीजी जोन वाराणसी नवीन अरोड़ा समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।

पुलिस ने करीब सात घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

पुलिस अधिकारियों और टीमों ने आरोपी से लगातार बातचीत कर उसे समझाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। करीब सात घंटे तक चले इस अभियान के दौरान पुलिस ने घर को चारों ओर से घेर रखा था।

एडीजी जोन वाराणसी नवीन अरोड़ा के अनुसार, आरोपी की मन:स्थिति और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने काफी सावधानी बरती। देर रात अचानक घर के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए दरवाजा खोला।

पुलिस के अनुसार, अंदर एक बच्चा घायल अवस्था में मिला। इसी दौरान आरोपी की ओर से पुलिस टीम पर भी फायरिंग की गई। जवाबी कार्रवाई में आरोपी घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें उनके रिश्तेदारों के सुपुर्द कर दिया।

वहीं घायल बच्चे और आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की उपचार के दौरान मौत हो गई। घायल बच्चे का इलाज कराया गया।

मानसिक स्थिति और अनुष्ठान को लेकर भी जांच

एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों से आरोपी के व्यवहार को लेकर कुछ जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, परिजनों ने उसके व्यवहार में पिछले कुछ समय से बदलाव की बात कही है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, परिवार के कुछ लोग अरविंद पर भूत-प्रेत की बाधा होने की बात मानते थे। इसी कारण घर में बाधा निवारण से संबंधित अनुष्ठान कराया जा रहा था। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि घटना की वास्तविक वजह को लेकर अभी जांच जारी है और सामने आए बयानों तथा घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। फॉरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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