कानपुर परमट विद्यालय प्रकरण पर आर्य नगर विधायक अमिताभ बाजपेई का सवाल, F.I.R. को बताया विरोधाभासी

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: कानपुर के परमट विद्यालय प्रकरण को लेकर आर्य नगर विधायक अमिताभ बाजपेई ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस वितरित करने के मामले में दर्ज एफआईआर सरकार की घोषित नीतियों और स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई के बीच विरोधाभास को दर्शाती है।

विधायक ने अपने बयान में दावा किया कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी आदेशों के अनुसार समाज, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए उपयोगी सामग्री वितरित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। ऐसे में सेवा कार्यों को लेकर एफआईआर दर्ज होना कई प्रश्न खड़े करता है।

शासनादेश का किया उल्लेख

अमिताभ बाजपेई ने कहा कि मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश द्वारा 23 दिसंबर 2022 को जारी पत्र तथा 19 दिसंबर 2022 के शासनादेश के तहत “तिथि भोजन” कार्यक्रम के माध्यम से समाज, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की सहभागिता बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।

उनके अनुसार इस योजना के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को ड्रेस, जूते-मोजे, बैग, स्टेशनरी और अन्य छात्रोपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए समाज को आगे आने के लिए प्रेरित किया गया।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विद्यालयों और समाज के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई थी।

बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देशों का भी किया जिक्र

विधायक ने अपने बयान में यह भी कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कानपुर नगर ने 12 जून 2026 को संबंधित व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निर्देश जारी किए थे।

इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि 9 जुलाई 2026 को जारी एक अन्य पत्र में भी अधिक से अधिक विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने पर बल दिया गया।

उनका कहना था कि यदि विभाग स्वयं ऐसे कार्यक्रमों को प्रोत्साहित कर रहा है, तो इसी प्रकार की गतिविधि पर एफआईआर दर्ज होना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।

सरकार पर लगाया विरोधाभास का आरोप

अमिताभ बाजपेई ने आरोप लगाया कि सरकार की घोषित नीति और स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है।

उनके अनुसार यदि समाजसेवा और छात्र हित में किए गए कार्यों को राजनीतिक दृष्टि से देखा जाएगा या ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।

हालांकि इस संबंध में प्रशासन या सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जनसेवा को राजनीति से अलग रखने की अपील

विधायक ने कहा कि गरीब बच्चों की सहायता और शिक्षा से जुड़े कार्यों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है और इस प्रकार के प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका जनसेवा अभियान पहले भी जारी था और आगे भी जारी रहेगा।

सामाजिक सहभागिता पर दिया जोर

अपने बयान में अमिताभ बाजपेई ने समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सामुदायिक सहयोग से विद्यालयों को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि समाज विद्यालयों के साथ जुड़कर विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहयोग करता है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था को सकारात्मक लाभ मिल सकता है।

शिक्षा में जनभागीदारी का महत्व

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी विद्यालयों में समाज की सहभागिता से विद्यार्थियों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

हालांकि ऐसे सभी कार्यक्रमों का आयोजन संबंधित नियमों, प्रशासनिक स्वीकृतियों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप होना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

इसी कारण विद्यालयों में किसी भी प्रकार के कार्यक्रम के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

प्रशासनिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी मामले में एफआईआर दर्ज की जाती है, तो उसके पीछे संबंधित तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया की भी जांच आवश्यक होती है।

ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आता है। इसलिए किसी भी घटना पर सभी पक्षों का दृष्टिकोण सामने आना लोकतांत्रिक और निष्पक्ष पत्रकारिता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।

आगे क्या?

परमट विद्यालय प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी।

यदि संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे मामले की स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

वहीं शिक्षा और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर भी भविष्य में स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आने की संभावना है।

आर्य नगर विधायक अमिताभ बाजपेई ने परमट विद्यालय प्रकरण में दर्ज एफआईआर को लेकर राज्य सरकार की नीतियों और स्थानीय कार्रवाई के बीच विरोधाभास होने का आरोप लगाया है।

उन्होंने अपने बयान में वर्ष 2022 के शासनादेश और वर्ष 2026 में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजसेवा और विद्यार्थियों की सहायता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

हालांकि मामले में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया जारी है तथा इस विषय पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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