कानपुर में राष्ट्रीय महिला आयोग का ‘शक्ति और सुरक्षा’ कार्यक्रम हुआ सम्पन्न, पुलिस अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा न्याय तक उनकी प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘शक्ति और सुरक्षा’ विषयक दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का समापन 10 जुलाई 2026 को कानपुर पुलिस कमिश्नरेट स्थित रागेंद्र स्वरूप सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स ऑडिटोरियम में हुआ।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों में लैंगिक संवेदनशीलता, तकनीकी दक्षता और महिला संबंधी अपराधों की प्रभावी विवेचना की क्षमता को और सुदृढ़ करना था।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, उत्तर प्रदेश पुलिस तथा पुलिस कमिश्नरेट कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में कानपुर नगर, आगरा पुलिस कमिश्नरेट, आगरा जोन तथा कानपुर जोन के विभिन्न जनपदों से आए लगभग 200 पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण में महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुआ मंथन

कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन की शुरुआत प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुई।

इसके बाद विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, सोशल मीडिया अपराध, डिजिटल फॉरेंसिक और कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की।

इन सत्रों का उद्देश्य केवल कानूनी जानकारी देना ही नहीं था, बल्कि पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच के दौरान अपनाई जाने वाली व्यावहारिक और पीड़ित-केंद्रित कार्यप्रणाली से भी परिचित कराना था।

साइबर अपराधों की जांच पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

पहले तकनीकी सत्र में एस.डी. मिश्रा, मुख्य सुरक्षा आयुक्त, एनसीआरटीसी, दिल्ली एवं दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त संयुक्त पुलिस आयुक्त ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों की जांच पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त जानकारी के सुरक्षित संकलन, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण तथा तकनीकी साक्ष्यों के न्यायिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

साथ ही उन्होंने बताया कि बदलती तकनीक के साथ पुलिस अधिकारियों के लिए डिजिटल जांच कौशल को लगातार विकसित करना आवश्यक है।

सोशल मीडिया पर होने वाले अपराधों की पहचान पर दिया गया प्रशिक्षण

दूसरे तकनीकी सत्र में अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध एवं ऑपरेशन) श्रीमती अंजलि विश्वकर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की पहचान और जांच प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर स्टॉकिंग, फर्जी प्रोफाइल, डिजिटल उत्पीड़न और तकनीकी साक्ष्यों के सुरक्षित संकलन जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि समयबद्ध कार्रवाई और साक्ष्यों का सही संरक्षण किसी भी साइबर अपराध की जांच में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर कानूनी जानकारी

कार्यक्रम के अंतिम तकनीकी सत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की अधिवक्ता अंचल गुप्ता ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े कानूनी प्रावधानों और पुलिस की भूमिका पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) की जिम्मेदारियों, संबंधित कानूनों तथा ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा संवेदनशील, निष्पक्ष और विधिसम्मत कार्रवाई की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

दो दिनों तक चला व्यापक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को महिला सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

इनमें जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग, एफआईआर और जीरो एफआईआर की प्रक्रिया, पीड़ित प्रतिकर योजना, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, साइबर अपराधों की विवेचना, सोशल मीडिया आधारित अपराधों की जांच, डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक और महिलाओं से संबंधित विभिन्न विधिक प्रावधान शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने वास्तविक मामलों के उदाहरणों के माध्यम से जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय भी साझा किए।

राष्ट्रीय महिला आयोग की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग के संयोजक डॉ. सर्वेश पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति रही।

समापन सत्र में उन्होंने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों की क्षमता और संवेदनशीलता में वृद्धि से महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन सकती है।

उन्होंने महिला सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

प्रतिभागियों ने साझा किए अपने अनुभव

समापन सत्र में विभिन्न जनपदों से आए पुलिस अधिकारियों ने प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव साझा किए।

प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को व्यावहारिक, उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि इससे महिला संबंधी अपराधों की जांच में नई तकनीकों और संवेदनशील दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिला।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि डिजिटल अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं।

तकनीक और संवेदनशीलता का समन्वय है आवश्यक

वक्ताओं ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिलाओं से जुड़े अपराधों की जांच केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

इसके साथ-साथ पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण, समयबद्ध कार्रवाई और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग भी उतना ही आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार तकनीक-सक्षम और संवेदनशील पुलिसिंग से जांच की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होता है।

महिला सुरक्षा को लेकर निरंतर प्रशिक्षण की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के कारण पुलिस अधिकारियों को समय-समय पर नवीनतम तकनीकों और कानूनी प्रावधानों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

इस प्रकार के क्षमता संवर्धन कार्यक्रम न केवल जांच की गुणवत्ता बढ़ाते हैं, बल्कि पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास को भी मजबूत करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

कानपुर में आयोजित राष्ट्रीय महिला आयोग के ‘शक्ति और सुरक्षा’ क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का समापन महिला सुरक्षा, साइबर अपराध जांच और जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में हुआ।

दो दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारियों को महिला संबंधी अपराधों की प्रभावी जांच, डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग, सोशल मीडिया अपराधों की पहचान तथा कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों की पेशेवर दक्षता, तकनीकी क्षमता और संवेदनशील कार्यशैली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिला सुरक्षा और न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।

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