एटा में फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का खुलासा, अपहरण की साजिश भी निकली झूठी
नन्द कुमार
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में पुलिस ने फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी संचालित कर छात्रों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान फर्जी मार्कशीट, आई कार्ड, फीस रसीद, चेक, मुहर, प्रश्नपत्र, परीक्षा पुस्तिकाएं, लैपटॉप और प्रचार सामग्री समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के कथित मास्टरमाइंड ने ठगी की रकम लौटाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपने ही अपहरण की झूठी कहानी तैयार की थी। हालांकि, पुलिस ने जांच के बाद अपहरण की सूचना को फर्जी पाया और पूरे मामले की परतें खुलती चली गईं।
16 सितंबर को दी गई थी अपहरण की सूचना
पुलिस के मुताबिक, 16 सितंबर को सतेंद्र कुमार के भाई रामसेवक ने डायल 112 पर सूचना दी थी कि सतेंद्र का तीन लोगों ने अर्टिगा कार से कथित अपहरण कर लिया है और 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और सतेंद्र की तलाश शुरू की।
इसके बाद पुलिस ने सतेंद्र को आगरा से सकुशल बरामद कर लिया। प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान पुलिस को मामले में कुछ ऐसे तथ्य मिले, जिनसे अपहरण की कहानी संदिग्ध हो गई। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन के निर्देशन में जांच को आगे बढ़ाया गया।
जांच में पुलिस के अनुसार, अपहरण की कहानी वास्तविक नहीं थी। आरोप है कि सतेंद्र ने स्वयं ही इस पूरी साजिश को तैयार किया था। पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य उन लोगों को गुमराह करना था, जिनसे फर्जी मेडिकल शिक्षा संस्थान के नाम पर पैसे लिए गए थे।
2022 से फर्जी मेडिकल संस्थान चलाने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, सतेंद्र कुमार पुत्र दर्शनपाल सिंह, निवासी महमूदपुर नगरिया, थाना मारहरा, वर्ष 2022 से कथित तौर पर बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम से संस्थान संचालित कर रहा था। यहां मेडिकल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाने और शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों से पैसे लिए जाने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, जिन पाठ्यक्रमों के नाम पर छात्रों को प्रवेश दिलाने का दावा किया जाता था, उनमें डी फार्मा, बी फार्मा, बीएससी नर्सिंग, डीएमएलटी, बीएमएलटी, जीएनएम और एएनएम शामिल थे। आरोप है कि छात्रों को प्रवेश और शैक्षणिक दस्तावेजों के नाम पर रकम लेने के बाद फर्जी मार्कशीट और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते थे।
पुलिस का दावा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े से बड़ी संख्या में छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए और ठगी की रकम दो करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। हालांकि, ठगी की कुल रकम और प्रभावित छात्रों की संख्या की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
चाय बेचने वाले के नाम पर दर्ज था संस्थान
जांच में सामने आया कि कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी को भगवान दास के नाम पर संचालित किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, भगवान दास मारहरा क्षेत्र में चाय बेचने का काम करता है और उसकी उम्र करीब 59 वर्ष है।
पुलिस ने सतेंद्र कुमार को कथित फर्जी प्रधानाचार्य और इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड के तौर पर गिरफ्तार किया है। इसके अलावा गौरव अग्रवाल, भगवान दास, नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को भी गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, गौरव अग्रवाल से जुड़े पारिवारिक विवरण में उसके पिता के सेवानिवृत्त सीएमओ होने की बात सामने आई है। वहीं, नरेंद्र उर्फ पप्पू और मोहम्मद शरीफ कुरैशी पर कथित तौर पर फर्जी शिक्षकों के रूप में काम करने का आरोप है।
बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जीवाड़े से संबंधित कई सामग्री बरामद की है। इनमें एक लैपटॉप, चार फर्जी चेक, 16 छात्रों के फर्जी आई कार्ड, एप्लीकेशन फॉर्म, अटेंडेंस शीट, फीस रसीदें, परीक्षा पुस्तिकाएं, प्रश्नपत्र, फर्जी मुहर, प्रचार सामग्री, फर्जी मुहर लगे लेटर पैड और मार्कशीट शामिल हैं।
इन दस्तावेजों की बरामदगी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी संस्थान के जरिए कितने छात्रों को प्रवेश दिया गया और कितने लोगों को फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
अपहरण की कहानी से खुला बड़ा फर्जीवाड़ा
दिलचस्प बात यह है कि जिस अपहरण की सूचना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, उसी जांच ने कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी के नेटवर्क का खुलासा कर दिया। पुलिस के अनुसार, सतेंद्र ने कथित तौर पर छात्रों और उनके परिजनों से ली गई रकम वापस न करनी पड़े तथा उन्हें किसी अन्य मामले में उलझाया जा सके, इसके लिए अपने अपहरण की कहानी तैयार की थी।
जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने कथित अपहरण की कहानी को फर्जी पाया और इसके बाद फर्जी संस्थान से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है।
अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पांडे ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने फर्जी अपहरण की साजिश और फर्जी मेडिकल कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले का खुलासा किया है। पांचों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों और छात्रों से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। साथ ही, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी संस्थान ने कितने समय तक काम किया और इसके जरिए कितने लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ।

