DUSU चुनाव 2026: मतदान संपन्न, मतगणना पर हाई कोर्ट की नजर, नतीजों से पहले कड़ी निगरानी

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU Election 2026 के लिए शुक्रवार, 18 सितंबर को मतदान प्रक्रिया संपन्न हो गई। विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में छात्रों ने चार केंद्रीय पदों के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसके बाद शनिवार, 19 सितंबर को मतगणना शुरू हो गई है। चुनाव परिणामों को लेकर छात्रों और छात्र संगठनों की नजर मतगणना प्रक्रिया पर बनी हुई है। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव के दौरान नियमों के पालन और चुनाव परिणाम के बाद की गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

18 सितंबर को हुआ मतदान

DUSU चुनाव 2026-27 के लिए मतदान 18 सितंबर को दो चरणों में कराया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस चुनाव में 1.51 लाख से अधिक छात्र मतदाता मतदान के लिए पात्र थे। मतदान के लिए करीब 1,000 ईवीएम की व्यवस्था की गई थी, जिनमें से 960 का इस्तेमाल किया गया, जबकि 40 मशीनें रिजर्व में रखी गई थीं।

इस बार मतदान प्रतिशत करीब 40.46 फीसदी रहा। रिपोर्टों के अनुसार, यह पिछले दो वर्षों की तुलना में अधिक मतदान रहा। ऐसे में चुनाव परिणामों को लेकर छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय समुदाय के बीच उत्सुकता स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।

चार प्रमुख पदों के लिए मुकाबला

DUSU के केंद्रीय पैनल में चार प्रमुख पदों के लिए चुनाव कराया गया। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद शामिल हैं। चुनाव मैदान में अलग-अलग छात्र संगठनों और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की।

इस चुनाव में विभिन्न छात्र संगठनों के बीच मुकाबले के साथ-साथ स्वतंत्र उम्मीदवारों की मौजूदगी भी चर्चा में रही। चुनाव प्रचार के दौरान छात्र सुरक्षा, आवास, कैंपस सुविधाएं और विद्यार्थियों से जुड़े अन्य मुद्दे प्रमुख विषयों में शामिल रहे। वहीं, सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी चुनाव प्रचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।

19 सितंबर से शुरू हुई मतगणना

मतदान समाप्त होने के बाद अब सभी की निगाहें मतगणना पर हैं। विश्वविद्यालय में 19 सितंबर की सुबह से वोटों की गिनती शुरू की गई। मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं और पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निगरानी रखी जा रही है।

हालांकि, शुरुआती दौर के आंकड़े बदल सकते हैं क्योंकि मतगणना कई चरणों में आगे बढ़ती है। इसलिए शुरुआती रुझानों को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। अंतिम स्थिति सभी मतों की गिनती पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।

दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त निगरानी

DUSU चुनाव इस बार सिर्फ मतदान और मतगणना के कारण ही चर्चा में नहीं है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान नियमों के पालन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई है। अदालत ने चुनाव प्रचार में Lyngdoh Committee की सिफारिशों और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन से संबंधित मामलों पर संज्ञान लिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, हाई कोर्ट ने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद विजय जुलूस पर रोक लगा दी है। अदालत ने चुनावी नियमों का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों और छात्र संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना भी जताई है। अदालत के सामने चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों के इस्तेमाल और अन्य कथित नियम उल्लंघनों से जुड़े मुद्दे भी आए।

दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि चुनाव से जुड़े मामलों में कई वाहनों पर कार्रवाई की गई और चालान भी किए गए। हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस को चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

परिणाम से पहले बढ़ी सतर्कता

हाई कोर्ट की निगरानी के चलते इस बार मतगणना और परिणाम घोषणा की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अदालत ने पहले ही यह संकेत दिया था कि यदि चुनावी नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो मतगणना या परिणाम की घोषणा को लेकर भी सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।

इसके बाद प्रशासन और पुलिस की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

छात्रों की नजर आधिकारिक परिणाम पर

मतगणना के दौरान अलग-अलग चरणों के रुझान सामने आने की संभावना है, लेकिन अंतिम परिणाम आने तक किसी भी उम्मीदवार की स्थिति को निश्चित नहीं माना जा सकता। छात्रों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चरण आधिकारिक परिणाम की घोषणा है।

DUSU चुनाव दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसलिए परिणाम केवल चार पदों के लिए चुने जाने वाले प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों की आगामी गतिविधियों और छात्र मुद्दों की दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।

फिलहाल मतगणना जारी है और सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटों की गिनती की जा रही है। दिल्ली हाई कोर्ट की निगरानी, चुनावी नियमों का पालन और आधिकारिक परिणाम की घोषणा इस पूरी प्रक्रिया के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं। परिणाम घोषित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चारों केंद्रीय पदों पर छात्रों ने किस उम्मीदवार को अपना प्रतिनिधि चुना है।

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