टिकरा-सुरार सड़क निर्माण का आदेश, छह दिवसीय सत्याग्रह के बाद PWD ने शुरू की कार्रवाई

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Digital UP News Desk

कानपुर: टिकरा-सुरार मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर लंबे समय से परेशान ग्रामीणों के लिए राहत की खबर सामने आई है। सड़क की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर चल रहे छह दिवसीय शांतिपूर्ण जनआंदोलन के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सड़क को आवागमन के योग्य बनाने के लिए लिखित आदेश जारी किया है। विभाग की ओर से संबंधित ठेकेदार को तत्काल पैचिंग और मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस आदेश के बाद टिकरा-सुरार क्षेत्र के ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने इसे लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व करने वाले राजवर्धन फाउंडेशन के संस्थापक साकेत सेंगर ने इसे किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि क्षेत्र के नागरिकों की सामूहिक जीत बताया।

वर्षों से खराब थी टिकरा-सुरार मार्ग की स्थिति

टिकरा-सुरार मार्ग की स्थिति पिछले कई वर्षों से खराब बताई जा रही थी। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क की खराब स्थिति के चलते उन्हें रोजमर्रा के काम, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए आने-जाने में दिक्कत होती थी।

समस्या को लेकर ग्रामीणों की ओर से संबंधित विभाग और प्रशासन के समक्ष कई बार अपनी मांग रखे जाने की बात कही गई। हालांकि, अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद क्षेत्र में जनआंदोलन शुरू किया गया।

छह दिन चला शांतिपूर्ण सत्याग्रह

सड़क की समस्या को लेकर राजवर्धन फाउंडेशन के आह्वान पर ग्रामीण बीएसएस कॉलेज चौराहे पर एकत्र हुए। यहां छह दिनों तक शांतिपूर्ण तरीके से धरना और सत्याग्रह किया गया। आंदोलन की खास बात इसका गांधीवादी स्वरूप रहा।

ग्रामीणों ने सड़क किनारे ‘चूल्हा-चौका सत्याग्रह’ के जरिए अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई। महिलाओं और युवाओं ने मौके पर भोजन तैयार कर अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही, भजन और संकीर्तन के माध्यम से शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा गया।

इस दौरान ग्रामीणों ने सड़क की मरम्मत और निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि सड़क का बेहतर होना केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और दैनिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

PWD ने जारी किया लिखित आदेश

आंदोलन के दौरान लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-1 की अधिशासी अभियंता इं. नीलम देवी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। इसके बाद ग्रामीणों और विभागीय अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।

बातचीत के बाद 16 सितंबर 2026 को विभाग की ओर से आधिकारिक पत्र जारी किया गया। पत्र में संबंधित ठेकेदार को सड़क की तत्काल पैचिंग और मरम्मत शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने सड़क को जल्द से जल्द मोटरेबल यानी आवागमन के योग्य बनाने की हिदायत दी है।

इसके साथ ही विभाग ने कार्य में किसी तरह की लापरवाही होने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। आदेश में कहा गया है कि यदि मरम्मत कार्य शुरू करने में अनावश्यक देरी की जाती है या काम में ढिलाई बरती जाती है, तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

आंदोलन के बाद सत्याग्रह को दिया गया विराम

PWD का लिखित आदेश मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने सत्याग्रह को विराम दिया। इस मौके पर राजवर्धन फाउंडेशन के संस्थापक साकेत सेंगर ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या अधिकारी को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि क्षेत्र की सड़क की समस्या को प्रशासन के सामने प्रभावी तरीके से रखना था।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने संयम और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखी और प्रशासन ने उनकी समस्या को समझते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। उनके अनुसार, सड़क निर्माण का आदेश पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सेंगर ने कानपुर प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और पुलिस प्रशासन के प्रति आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल लोगों ने धैर्य बनाए रखा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी।

ग्रामीण बोले- पूरी सड़क बनने तक जारी रहेगी निगरानी

आदेश जारी होने के बाद आंदोलन स्थल पर ग्रामीणों ने खुशी जताई। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर प्रसन्नता व्यक्त की और सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केवल आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं है। अब उनकी नजर सड़क पर शुरू होने वाले निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी रहेगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार नहीं हो जाती, तब तक वे काम की प्रगति पर नजर रखेंगे।

दरअसल, लंबे समय से खराब सड़क के कारण परेशान स्थानीय लोगों के लिए अब विभागीय आदेश उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। यदि निर्धारित निर्देशों के अनुसार समय पर काम शुरू होता है और गुणवत्ता के साथ सड़क का निर्माण पूरा किया जाता है, तो इससे टिकरा-सुरार क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को सीधे राहत मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल, छह दिवसीय सत्याग्रह के बाद PWD द्वारा जारी किया गया लिखित आदेश इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर हैं कि सड़क का काम जमीन पर कितनी तेजी से शुरू होता है और निर्धारित गुणवत्ता के साथ कब पूरा होता है।

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