निठारी कांड के सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत, बरी होने के बाद चला रहा था चाय की दुकान

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Digital UP News Desk

नोएडा: करीब दो दशक पहले देशभर में सुर्खियों में आए निठारी कांड से जुड़ा एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले के प्रमुख आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई। वह हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चला रहा था। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, मौत के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच जारी है।

सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी कांड के सामने आने के बाद देशभर में चर्चा में आया था। 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे स्थित नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद सनसनी फैल गई थी। जांच आगे बढ़ने पर कई बच्चों और युवतियों के लापता होने के मामलों को इस प्रकरण से जोड़ा गया। मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस ने की और बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया।

निठारी कांड से देशभर में मचा था हड़कंप

निठारी मामले में मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को आरोपी बनाया गया था। शुरुआती जांच और मुकदमों के दौरान कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया और उसे मृत्युदंड तक सुनाया गया। हालांकि, समय के साथ अदालतों में मामले की जांच, साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए।

सीबीआई ने वर्ष 2007 में पहला आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत में मुकदमों की सुनवाई हुई। वर्ष 2009 में एक मामले में कोली और पंधेर को मौत की सजा सुनाई गई। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी।

साल 2014 में कोली की दया याचिका तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी थी। इसके बाद मेरठ जेल में उसकी फांसी की तैयारी भी की गई थी, लेकिन अंतिम समय में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फांसी टल गई। इसके बाद भी निठारी से जुड़े अलग-अलग मामलों में कानूनी लड़ाई वर्षों तक चलती रही।

2025 में आखिरी मामले में भी मिली थी राहत

निठारी कांड से जुड़े कई मामलों में सुरेंद्र कोली को पहले ही बरी किया जा चुका था। आखिरकार 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उससे जुड़े अंतिम लंबित मामले में भी उसकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया। कोर्ट ने क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसे बरी करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समान साक्ष्य के आधार पर जुड़े अन्य मामलों में बरी किए जाने के बाद एक मामले में दोषसिद्धि बनाए रखना उचित नहीं था।

इस फैसले के बाद कोली की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद उसने हरिद्वार का रुख किया और सामान्य जीवन शुरू करने की कोशिश की। हाल के दिनों में वह हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहा था।

हरिद्वार में चाय की दुकान पर मिला शव

शुक्रवार को सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार स्थित उसकी चाय की दुकान पर मिला। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में पुलिस ने आत्महत्या की आशंका जताई है। हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौत की परिस्थितियों और संभावित कारणों की जांच की जा रही है। अभी तक किसी निश्चित कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, कोली हरिद्वार में कुछ समय से रह रहा था। पुलिस अब उसके हरिद्वार आने, यहां रहने और चाय की दुकान शुरू करने से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी जुटा रही है।

कौन था सुरेंद्र कोली?

सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा क्षेत्र का रहने वाला था। उसका बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। शुरुआती दौर में वह गांव में बकरियों की देखभाल का काम करता था। बाद में रोजगार की तलाश में वह दिल्ली आया।

वर्ष 2000 के आसपास उसकी मुलाकात एक ब्रिगेडियर से हुई, जिसके साथ वह दिल्ली आया था। कुछ समय बाद वह नोएडा पहुंचा और वर्ष 2003 के बाद मोनिंदर सिंह पंधेर के संपर्क में आया। इसके बाद उसने नोएडा सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में घरेलू सहायक के तौर पर काम करना शुरू किया।

उस समय उसका परिवार भी उसके साथ नोएडा आया था। हालांकि, बाद में परिस्थितियां बदलने पर उसकी पत्नी गांव लौट गई। इसके बाद कोली का जीवन लंबे समय तक कानूनी मामलों और जेल की चारदीवारी के बीच बीता।

करीब दो दशक तक चली कानूनी कहानी

निठारी कांड की जांच और मुकदमों की प्रक्रिया लगभग दो दशक तक चली। 2006 में मामला सामने आने के बाद पुलिस और सीबीआई जांच, आरोपपत्र, निचली अदालतों के फैसले, हाई कोर्ट की सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के कई दौर हुए।

समय के साथ कई मामलों में अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर अदालतों में सवाल उठे। आखिरकार नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कोली के खिलाफ लंबित अंतिम आपराधिक मामला भी समाप्त हो गया।

अब सितंबर 2026 में हरिद्वार में उसकी मौत की खबर ने एक बार फिर निठारी कांड को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल पुलिस मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है और आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।