बाराबंकी में सरयू नदी का बदला रास्ता, 25 घर बहे, महंत गुरु नारायण मंदिर तक पहुंचा कटान
Digital UP News Desk
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हेतमापुर गांव में सरयू नदी ने करीब 18 साल बाद एक बार फिर अपना रास्ता बदल दिया है। अचानक बदली नदी की धारा और तेज कटान के कारण गांव में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। करीब एक महीने पहले तक जहां ग्रामीण सामान्य तरीके से अपने घरों में रह रहे थे, वहीं अब कई परिवारों के सामने आशियाना और सुरक्षित भविष्य दोनों की चिंता खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सरयू नदी के कटान ने देखते ही देखते गांव के बड़े हिस्से को प्रभावित कर दिया। इस दौरान करीब 25 पक्के मकान नदी की धारा में समा गए। घरों के नदी में चले जाने के बाद प्रभावित परिवारों को अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कई परिवार फिलहाल दूसरे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
18 साल बाद बदली सरयू की धारा
हेतमापुर गांव के लोगों का कहना है कि सरयू नदी ने करीब 18 साल बाद अपना रास्ता बदला है। नदी की नई धारा गांव की ओर बढ़ने के साथ ही कटान भी तेज हो गया। पहले जहां नदी गांव से कुछ दूरी पर बहती थी, वहीं अब उसका पानी आबादी के नजदीक पहुंच गया है।
दरअसल, नदी के रास्ते में बदलाव के कारण उसके किनारे बसे घर और दूसरी संरचनाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में गांव के अन्य हिस्से भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
25 पक्के मकान नदी में समाए
सरयू नदी के कटान से अब तक करीब 25 पक्के मकानों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के लिए यह नुकसान इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इन घरों को बनाने में परिवारों की वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी लगी थी।
मकान नदी में समाने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती परिवार को सुरक्षित रखना और बची हुई गृहस्थी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखे जाने और प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने की प्रक्रिया जारी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही प्रभावित परिवारों के लिए राहत और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था करेगा।
नदी की जद में पहुंचा महंत गुरु नारायण मंदिर
कटान का असर अब गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी संरचनाओं तक भी पहुंचने लगा है। ग्रामीणों के अनुसार, सरयू नदी कटान करते हुए प्रसिद्ध महंत गुरु नारायण मंदिर के करीब पहुंच गई है।
मंदिर के नजदीक नदी के पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है। ग्रामीणों के लिए यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी स्थानीय आस्था और सामाजिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नदी में लटकी मस्जिद, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
कटान के कारण गांव में स्थित एक मस्जिद का हिस्सा भी नदी की ओर झुक गया है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी के लगातार कटान से मस्जिद के आसपास की जमीन प्रभावित हुई है और भवन नदी के किनारे असुरक्षित स्थिति में पहुंच गया है।
ऐसे में ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि प्रभावित धार्मिक स्थलों और आबादी वाले क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही नदी के कटान को रोकने के लिए स्थायी समाधान तलाशने की मांग भी उठ रही है।
एक महीने में बदल गई गांव की तस्वीर
हेतमापुर गांव के लोगों के लिए मौजूदा स्थिति इसलिए भी परेशान करने वाली है क्योंकि करीब एक महीने पहले तक गांव में सब कुछ सामान्य था। इसके बाद सरयू नदी की धारा में बदलाव और कटान की गति बढ़ने लगी।
धीरे-धीरे नदी आबादी की तरफ बढ़ती गई और कई मकान इसकी जद में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने वर्षों से बनाए घरों को नदी के कटान से प्रभावित होते देखा है। अब कई परिवारों को भविष्य की चिंता सता रही है।
इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन से राहत और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कटान को नियंत्रित करने के उपाय किए गए तो गांव के बाकी हिस्से और महत्वपूर्ण स्थलों को बचाया जा सकता है।
ग्रामीण बोले- उम्मीद टूटती जा रही
बाढ़ और कटान से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि लगातार नुकसान के कारण उनकी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। जिन परिवारों के घर नदी में चले गए हैं, उनके लिए दोबारा घर बनाना आसान नहीं होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित स्थान, राहत सहायता और भविष्य के लिए स्थायी व्यवस्था है। साथ ही वे चाहते हैं कि नदी के बदलते रास्ते का तकनीकी अध्ययन कर कटान प्रभावित क्षेत्र के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
प्रशासन से राहत और स्थायी समाधान की मांग
सरयू नदी के बढ़ते कटान के बीच ग्रामीण प्रशासन से राहत कार्य तेज करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा प्रभावित परिवारों का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, नदी के किनारे होने वाले कटान को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर तकनीकी उपाय जरूरी होते हैं। इसलिए ग्रामीणों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ लंबे समय के लिए कटान नियंत्रण की योजना तैयार करना भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल हेतमापुर गांव में सरयू नदी की बदली धारा ने ग्रामीणों की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। 25 मकानों के नदी में समाने के बाद अब ग्रामीणों की निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। वहीं, महंत गुरु नारायण मंदिर और मस्जिद के आसपास कटान पहुंचने से स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाकर गांव के बाकी हिस्से और महत्वपूर्ण स्थलों को सुरक्षित किया जा सकेगा।

