मायावती ने UPI शुल्क और स्मार्ट स्कूलों पर उठाए सवाल, बोलीं- पहले बुनियादी सुविधाएं जरूरी
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने UPI की नई शुल्क व्यवस्था और प्रदेश में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए दोनों मुद्दों पर अपनी बात रखी। मायावती ने UPI से जुड़े नए प्रावधान को आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला बताया। वहीं, उत्तर प्रदेश में 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा को उन्होंने अच्छी पहल बताया, लेकिन इसके साथ स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
UPI की नई व्यवस्था पर मायावती ने जताई आपत्ति
मायावती ने अपने बयान में कहा कि UPI डिजिटल भुगतान को लंबे समय से बढ़ावा दिया गया है। ऐसे में अब बड़े व्यापारी लेनदेन पर शुल्क से जुड़ी नई व्यवस्था को लेकर आम लोगों में असंतोष और चिंता होना स्वाभाविक है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था का असर अंततः आम जनता के खर्च पर पड़ सकता है।
हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने का प्रावधान है। वहीं, ₹2,000 तक के UPI व्यापारी भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है। उपभोक्ता से सीधे UPI शुल्क लेने की व्यवस्था अलग से नहीं की गई है।
यानी, मायावती की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि व्यापारियों पर लगने वाला शुल्क किसी न किसी रूप में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर असर डाल सकता है। उन्होंने सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की अपील की, जिनमें आम जनता पर आर्थिक दबाव कम हो।
महंगाई और रोजगार का भी उठाया मुद्दा
अपने बयान में मायावती ने महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब बड़ी आबादी पहले से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब सरकार की नीतियों में जनकल्याण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद शुल्क व्यवस्था में बदलाव से लोगों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, नई UPI व्यवस्था में छोटे मूल्य के भुगतान को शुल्क से बाहर रखने का प्रावधान है। इसलिए इस बदलाव को सभी UPI लेनदेन पर शुल्क लागू होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
14,429 सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की योजना
इसके साथ ही मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की स्मार्ट स्कूल योजना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। राज्य सरकार ने 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT लैब जैसी सुविधाएं विकसित करने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत प्रत्येक विद्यालय के लिए करीब 2.07 लाख रुपये का प्रावधान बताया गया है।
सरकार के मुताबिक, इन स्कूलों में तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्मार्ट क्लास और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना और शिक्षण व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करना है।
मायावती ने पूछा- दो लाख रुपये में क्या-क्या संभव होगा?
स्मार्ट स्कूल योजना पर मायावती ने पूरी तरह विरोध का रुख नहीं अपनाया। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताते हुए सवाल किया कि प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये की राशि में कितनी सुविधाएं प्रभावी रूप से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
उन्होंने स्कूलों में स्मार्ट पढ़ाई से पहले बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, विद्यार्थियों के लिए बेहतर स्कूल भवन, बेंच, कुर्सियां, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं भी जरूरी हैं। इसलिए उनका कहना है कि सरकार को यह देखना चाहिए कि डिजिटल सुविधाओं के साथ स्कूलों की मूलभूत आवश्यकताएं भी पूरी हों।
स्मार्ट शिक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं पर जोर
दरअसल, स्मार्ट स्कूल योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना है। इसके तहत ICT लैब और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था के साथ जोड़ा जाना है। सरकार की योजना में अधिक नामांकन वाले विद्यालयों को प्राथमिकता दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
वहीं, मायावती का जोर इस बात पर है कि तकनीकी सुविधाओं के साथ स्कूलों की मूलभूत व्यवस्था भी मजबूत हो। ऐसे में स्मार्ट स्कूल योजना को लेकर बहस केवल डिजिटल उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों की समग्र सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से भी जुड़ती है।
UPI और स्मार्ट स्कूल पर अलग-अलग मुद्दों को उठाया
मायावती की ताजा पोस्ट में एक ओर UPI की नई शुल्क व्यवस्था को लेकर आर्थिक प्रभाव का मुद्दा उठाया गया, तो दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल किया गया। दोनों विषय आम लोगों और विद्यार्थियों से जुड़े होने के कारण चर्चा में हैं।
फिलहाल UPI के नए प्रावधान में ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन को शुल्क से बाहर रखा गया है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार की स्मार्ट स्कूल योजना के तहत 14,429 स्कूलों में डिजिटल सुविधाएं विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
इस प्रकार, मायावती ने सरकार से दोनों मामलों में जनता की आर्थिक स्थिति और विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखने की बात कही है। UPI शुल्क व्यवस्था को लेकर उनकी आपत्ति राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आई है, जबकि स्मार्ट स्कूल योजना पर उन्होंने डिजिटल शिक्षा के साथ बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने की मांग की है।

