यूपी बीजेपी में टिकट के लिए चार स्तर पर होगा सर्वे, 15 पैरामीटर्स पर होगी विधायकों की रेटिंग
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की ओर से मौजूदा विधायकों के कामकाज, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और संगठन में उनकी सक्रियता का आकलन करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर फीडबैक जुटाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, टिकट चयन की प्रक्रिया में चार अलग-अलग सर्वे समानांतर तरीके से कराए जाने की योजना है।
इन सर्वे का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को अलग-अलग स्रोतों से समझना और संभावित उम्मीदवारों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना बताया जा रहा है। खास बात यह है कि केवल मौजूदा विधायक का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र में जनता की संतुष्टि, विकास कार्य, संगठन के साथ तालमेल और सामाजिक समीकरणों जैसे पहलुओं को भी आकलन में शामिल किया जाएगा।
15 पैरामीटर्स पर तैयार होगा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन की ओर से कराए जाने वाले सर्वे में मौजूदा विधायकों को करीब 15 अलग-अलग मानकों पर परखा जाएगा। इनमें विधानसभा में विधायक की उपस्थिति, सदन में पूछे गए सवाल, विधायक निधि के उपयोग, अपने विधानसभा क्षेत्र में उपलब्धता और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी छवि जैसे बिंदु शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी और संगठन के साथ समन्वय को भी रिपोर्ट कार्ड का हिस्सा बनाया जा सकता है। इस तरह पार्टी यह जानने की कोशिश करेगी कि विधायक अपने क्षेत्र और संगठन दोनों के साथ किस तरह जुड़े हुए हैं।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्वे में विधायक के कामकाज को केवल पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर से नहीं, बल्कि व्यापक फीडबैक के आधार पर देखने की कोशिश की जा रही है।
जनता की संतुष्टि और विकास कार्यों का भी होगा आकलन
दूसरे स्तर पर शासन से जुड़े फीडबैक के जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि संबंधित विधायक अपने क्षेत्र की जनता के लिए कितने आसानी से उपलब्ध हैं। साथ ही, क्षेत्र में हुए विकास कार्यों को लेकर लोगों की संतुष्टि का स्तर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विकास योजनाओं का प्रभाव, स्थानीय समस्याओं के समाधान में विधायक की भूमिका और जनता के साथ उनका संपर्क जैसे मुद्दे भी इस आकलन में शामिल हो सकते हैं। इससे पार्टी को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक को लेकर स्थानीय स्तर पर क्या धारणा है।
दरअसल, विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार का चयन केवल संगठनात्मक समीकरणों पर निर्भर नहीं होता। जनता के बीच स्वीकार्यता और क्षेत्रीय मुद्दों पर पकड़ भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इन पहलुओं को लेकर फीडबैक जुटाने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय स्तर से भी तैयार होगी अलग रिपोर्ट
तीसरे स्तर पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से स्वतंत्र आकलन किए जाने की बात सामने आई है। इस तरह के सर्वे में विधानसभा क्षेत्र की चुनावी स्थिति, संभावित उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और जीत की संभावनाओं से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रत्येक सीट पर संभावित विकल्पों और सामाजिक समीकरणों का भी आकलन किया जाएगा। यानी पार्टी केवल मौजूदा विधायक की स्थिति नहीं देखेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक चेहरों की संभावनाओं पर भी विचार कर सकती है।
इसका एक उद्देश्य यह भी बताया जा रहा है कि उम्मीदवार चयन के दौरान स्थानीय संगठन, शासन स्तर और केंद्रीय नेतृत्व से मिले फीडबैक को एक साथ देखा जा सके।
आरएसएस की जमीनी रिपोर्ट भी होगी अहम
चौथे स्तर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े जमीनी फीडबैक को शामिल किए जाने की बात कही जा रही है। इसमें स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक स्थिति, कार्यकर्ताओं की राय और विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक माहौल की जानकारी जुटाने की कोशिश हो सकती है।
इस तरह चारों रिपोर्टों को एक साथ रखकर विधानसभा सीट की स्थिति का व्यापक आकलन तैयार करने की योजना बताई जा रही है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चारों रिपोर्टों को केंद्रीय स्तर पर एकत्र करके उम्मीदवारों के चयन से पहले व्यापक तस्वीर तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
दो सर्वे में खराब रिपोर्ट तो बदल सकता है समीकरण
मौजूदा विधायकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू अलग-अलग सर्वे से मिलने वाला फीडबैक होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, यदि किसी विधायक को कई स्वतंत्र आकलनों में कमजोर प्रदर्शन या कम स्वीकार्यता का फीडबैक मिलता है, तो पार्टी उसके स्थान पर दूसरे संभावित उम्मीदवारों पर विचार कर सकती है।
हालांकि, किसी विधायक का टिकट अंतिम रूप से कटना या किसी नए उम्मीदवार का चयन होना पार्टी के आधिकारिक निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल सर्वे और फीडबैक को उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
2027 चुनाव से पहले उम्मीदवार चयन पर फोकस
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ा रहे हैं। भाजपा की ओर से भी सीटवार फीडबैक और संभावित उम्मीदवारों के आकलन की प्रक्रिया तेज किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि चुनाव से काफी पहले संगठन उम्मीदवारों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी जुटाना चाहता है।
हालांकि, सर्वे के आधार पर कितने मौजूदा विधायकों के टिकट में बदलाव होगा, इसका अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में फिलहाल चार स्तरों से मिलने वाले फीडबैक और रिपोर्टों के आधार पर संभावित बदलावों को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
कुल मिलाकर, यूपी बीजेपी में टिकट के लिए चार स्तर पर सर्वे की कवायद उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। 15 पैरामीटर्स पर विधायकों की रेटिंग, जनता की संतुष्टि, विकास कार्य, संगठनात्मक सक्रियता, सामाजिक समीकरण और जमीनी फीडबैक जैसे पहलुओं को एक साथ देखकर पार्टी संभावित उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन करेगी। अंतिम फैसला आने वाले समय में पार्टी के अधिकृत नेतृत्व और चुनावी प्रक्रिया के अनुसार होगा।

