यूपी मंडी परिषद के नए नियमों के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन, जियो टैगिंग और गेट पास व्यवस्था पर उठे सवाल
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा लागू की गई जियो वाहन टैगिंग, गेट पास की समय-सीमा, प्रोपराइटरशिप फर्म को पार्टनरशिप में बदलने की प्रक्रिया तथा नए लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर के कृषि उत्पाद व्यापारियों और उद्यमियों ने लखनऊ स्थित मंडी परिषद कार्यालय में प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने इन नियमों को व्यावहारिक कठिनाइयों से जुड़ा बताते हुए इनमें सरलीकरण की मांग की और चार सूत्रीय ज्ञापन मंडी परिषद के निदेशक इंद्रविक्रम सिंह को सौंपा।
यह प्रदर्शन भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेश की विभिन्न मंडियों से आए गल्ला, दलहन, तिलहन, किराना, सब्जी, गुड़, लकड़ी और अन्य कृषि उत्पादों के व्यापारियों ने भाग लिया।
जियो टैगिंग व्यवस्था पर व्यापारियों ने जताई चिंता
व्यापारियों का कहना है कि मंडी परिषद ने 1 जुलाई 2026 से जियो ऐप के माध्यम से वाहन टैगिंग की नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू की है। उनके अनुसार पहले से ही 6-आर, 9-आर, गेट पास और प्री-अराइवल स्लिप जैसी ऑनलाइन व्यवस्थाएं लागू हैं, जिनके माध्यम से कृषि उपज की आवाजाही और मंडी शुल्क की निगरानी की जाती है।
ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि वर्तमान ऑनलाइन प्रणाली के चलते मंडी शुल्क चोरी की संभावना पहले ही काफी कम हो चुकी है। ऐसे में समानांतर रूप से एक और डिजिटल प्रक्रिया लागू करने से व्यापारियों की प्रशासनिक और तकनीकी जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापारियों के सामने तकनीकी चुनौती
प्रदर्शन के दौरान व्यापार प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अधिकांश गल्ला मंडियां ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तकनीकी संसाधनों और डिजिटल सुविधाओं का समान स्तर पर उपयोग अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
उनका कहना था कि यदि जियो टैगिंग जैसी व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जाता है, तो छोटे और ग्रामीण व्यापारी इसके संचालन में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। इससे कृषि उपज की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई।
गेट पास की समय-सीमा पर भी उठाए सवाल
व्यापारियों ने मंडी से एक जिले से दूसरे जिले तक कृषि उत्पाद ले जाने के लिए जारी होने वाले गेट पास की निर्धारित समय-सीमा पर भी आपत्ति जताई।
प्रतिनिधियों का कहना है कि कई बार परिवहन संबंधी परिस्थितियों या अन्य कारणों से निर्धारित समय में वाहन गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे मामलों में समय-सीमा समाप्त होने पर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना बनी रहती है, जबकि मंडी शुल्क चोरी का कोई मामला नहीं होता।
उन्होंने इस व्यवस्था को व्यवहारिक बनाने और समय-सीमा में आवश्यक संशोधन करने की मांग की।
छोटे वाहनों के संचालन को लेकर भी रखी बात
व्यापार प्रतिनिधियों ने बताया कि मंडियों से कम मात्रा में कृषि उत्पाद लेकर छोटे वाहन ट्रांसपोर्ट नगर तक पहुंचते हैं, जहां माल अन्य बड़े वाहनों में स्थानांतरित किया जाता है।
ऐसी स्थिति में प्रत्येक बार वाहन बदलने पर नई टैगिंग की प्रक्रिया अपनाना व्यावहारिक रूप से कठिन बताया गया। व्यापारियों ने इस प्रक्रिया में भी आवश्यक सरलीकरण की मांग रखी।
प्रोपराइटरशिप से पार्टनरशिप प्रक्रिया पर आपत्ति
व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने मंडी परिषद द्वारा लागू किए गए उस प्रावधान पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत प्रोपराइटरशिप फर्म को पार्टनरशिप में बदलने के लिए निर्धारित वित्तीय और प्रशासनिक शर्तों का पालन करना आवश्यक है।
व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा नियमों के अनुसार नए साझेदार को मूल आवंटी की श्रेणी की दुकान की अधिकतम बोली राशि का 51 प्रतिशत जमा करना पड़ता है, जिसे उन्होंने व्यवहारिक रूप से कठिन बताया।
उनका दावा है कि जटिल प्रक्रिया के कारण अब तक इस व्यवस्था का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है।
नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया सरल बनाने की मांग
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने नए मंडी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने की मांग की।
उनका कहना था कि वर्तमान प्रक्रिया में कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, जिससे समय अधिक लगता है। व्यापारियों ने सुझाव दिया कि जीएसटी प्रणाली की तर्ज पर गारंटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए और आवश्यक दस्तावेजों की संख्या कम की जाए।
उनका तर्क था कि इससे व्यापारिक गतिविधियां आसान होंगी और मंडी शुल्क के रूप में राजस्व संग्रह भी बेहतर हो सकेगा।
चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया
प्रदर्शन के बाद व्यापार प्रतिनिधियों ने मंडी परिषद के निदेशक इंद्रविक्रम सिंह को चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल थीं—
- जियो वाहन टैगिंग व्यवस्था में सरलीकरण या पुनर्विचार।
- गेट पास की समय-सीमा में संशोधन।
- प्रोपराइटरशिप से पार्टनरशिप प्रक्रिया को आसान बनाना।
- नए मंडी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया सरल करना।
मंडी परिषद ने दिया सरलीकरण का आश्वासन
व्यापार प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान मंडी परिषद के निदेशक इंद्रविक्रम सिंह ने उनकी समस्याओं को सुना।
बताया गया कि उन्होंने व्यापारियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार करने तथा आवश्यक स्तर पर सरलीकरण के प्रयास करने का आश्वासन दिया। हालांकि, इस संबंध में किसी औपचारिक संशोधन की घोषणा नहीं की गई।
व्यापारियों ने रखा संतुलित समाधान का सुझाव
व्यापार प्रतिनिधियों का कहना है कि वे डिजिटल व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहते हैं जो व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाए और तकनीकी कठिनाइयों को कम करे।
उनके अनुसार, यदि नई व्यवस्थाओं को व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर लागू किया जाए, तो डिजिटल निगरानी और व्यापारिक सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
बड़ी संख्या में व्यापारी रहे मौजूद
प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के अलावा कानपुर, लखनऊ सहित अन्य जनपदों के व्यापारी भी उपस्थित रहे।
प्रदर्शन में यह व्यापारी रहे मौजूद
प्रदर्शन व ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से प्रदेश संगठन महामंत्री बनवारीलाल गुप्ता, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय वाजपेयी, प्रदेश कोषाध्यक्ष व लखनऊ महानगर अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ताजपुरिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ताजपुरिया व प्रदेश युवा कोषाध्यक्ष श्याम सिंघल, प्रदेश संयुक्त महामंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता रामू, प्रदेश संगठन मंत्री संजय भदौरिया, कानपुर जिलाध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे व वरिष्ठ महामंत्री मनीष गुप्ता सलोने,
कानपुर दक्षिण चेयरमैन नितिन अग्निहोत्री, कानपुर जिला कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता कुक्कू, जिला संयुक्त महामंत्री के के गुप्ता, रमाकांत शर्मा,अनुराग जायसवाल, आशीष मिश्र, गोपाल शुक्ला, मयंकदीप सिंह , कुलदीप तिवारी,अर्जित गुप्ता अज्जू, अब्दुल वहीद, रतन सिंह राजू, अतुल ओमर, प्रवीण दीक्षित, जितेंद्र सिंह, अरविंद गुप्ता, अतहरुद्दीन, आनंद मिश्रा ,राजेंद्र मिश्रा, संदीप तिवारी, अनीश शुक्ल, गिरीश पाण्डेय , नीरज शर्मा आदि थे |
उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा लागू नई डिजिटल व्यवस्थाओं को लेकर व्यापारियों ने अपनी व्यावहारिक चिंताओं को प्रशासन के सामने रखा है। जियो वाहन टैगिंग, गेट पास की समय-सीमा, पार्टनरशिप नियम और लाइसेंस प्रक्रिया में सरलीकरण की मांग करते हुए व्यापारियों ने कहा कि डिजिटल सुधारों के साथ व्यापारिक सुविधा का संतुलन भी आवश्यक है। वहीं मंडी परिषद ने व्यापारियों की बात सुनते हुए आवश्यक सरलीकरण पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

