UPI पर फीस लगाने का खुला रास्ता? राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना, जानिए क्या है पूरा मामला

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Digital UP News

नई दिल्ली: UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर UPI लेन-देन को लेकर नए नियमों के जरिए भविष्य में शुल्क लगाने का रास्ता खोलने का आरोप लगाया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा और दावा किया कि 2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेन-देन पर Merchant Discount Rate यानी MDR लगाने की संभावना पैदा हो गई है।

हालांकि, इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 2,000 से अधिक के हर UPI भुगतान पर अभी कोई शुल्क लागू नहीं किया गया है। 14 सितंबर 2026 की वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में 2,000 तक के UPI लेन-देन और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क लगाने पर रोक स्पष्ट की गई है। वहीं, सरकार के अनुसार भविष्य में सीमित श्रेणी के मर्चेंट लेन-देन पर MDR की व्यवस्था हो सकती है।

राहुल गांधी ने X पर सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। उनके मुताबिक, 2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि ऐसे लेन-देन संख्या के लिहाज से भले ही सीमित हों, लेकिन UPI के कुल लेन-देन मूल्य में उनका हिस्सा काफी बड़ा है। उन्होंने इसी आधार पर सरकार के फैसले को लेकर चिंता जताई। राहुल गांधी के बयान के बाद UPI शुल्क का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आम लोगों के लिए सरल और कम लागत वाला बनाए रखने की जरूरत है।

क्या 2,000 से ऊपर UPI पर लगेगा चार्ज?

इस सवाल को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम बना हुआ है। मौजूदा स्थिति के अनुसार, 2,000 से ऊपर के UPI भुगतान पर कोई सार्वभौमिक या अनिवार्य शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है। सरकार ने 2,000 तक के UPI लेन-देन को शुल्क से स्पष्ट रूप से सुरक्षित किया है।

वहीं, सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो यह सीमित श्रेणी के मर्चेंट लेन-देन पर लागू होगा। इसके अलावा, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहने की बात सरकार ने कही है।

इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को 2,000 से अधिक राशि UPI के जरिए भेजने पर तत्काल शुल्क लगने की बात सही नहीं होगी। विवाद मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले बड़े भुगतान से जुड़ा है।

MDR क्या होता है?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट के लेन-देन से जुड़ी भुगतान व्यवस्था में लगाया जा सकता है। यह शुल्क आम तौर पर भुगतान प्रणाली से जुड़े बैंक या सेवा प्रदाताओं के बीच तय व्यवस्था के तहत होता है।

UPI की शुरुआत से ही इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का एक महत्वपूर्ण कारण यह रहा है कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान आसान और कम लागत वाला बना रहा। ऐसे में MDR को लेकर किसी भी संभावित बदलाव पर कारोबारियों और डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ताओं की नजर बनी हुई है।

सरकार का कहना है कि भविष्य में यदि MDR लगाया जाता है तो यह सीमित लेन-देन पर और नाममात्र की दर पर होगा। साथ ही, सरकार ने यह भी कहा है कि अधिकांश UPI लेन-देन मर्चेंट के लिए भी शुल्क-मुक्त बने रहेंगे।

कांग्रेस ने अमेरिकी कंपनियों को लेकर भी उठाए सवाल

कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल शुल्क तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी की ओर से सवाल उठाया गया है कि क्या इस व्यवस्था के पीछे अमेरिकी कंपनियों को लाभ पहुंचाने या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने जैसी कोई नीति है।

राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं की ओर से सरकार पर अमेरिकी दबाव के सामने झुकने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और सरकार ने UPI व्यवस्था में बदलाव को डिजिटल भुगतान के दीर्घकालिक विकास, तकनीकी जरूरतों और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं के संदर्भ में बताया है।

इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोपों और सरकारी स्पष्टीकरण को अलग-अलग समझना जरूरी है।

सरकार का क्या कहना है?

केंद्र सरकार ने अगस्त में स्पष्ट किया था कि UPI इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं से कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, व्यक्ति-से-व्यक्ति लेन-देन मुफ्त जारी रहने की बात भी कही गई थी।

सरकार के अनुसार, यदि MDR लागू किया जाता है तो यह सीमित श्रेणी के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। इसका उद्देश्य UPI के लंबे समय तक टिकाऊ संचालन, तकनीकी विकास और उभरते साइबर जोखिमों से निपटने के लिए भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है।

वहीं, 14 सितंबर की अधिसूचना ने 2,000 तक के UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड भुगतान को शुल्क से स्पष्ट सुरक्षा दी है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल छोटे UPI भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क का सवाल नहीं उठता।

आगे क्या होगा?

UPI शुल्क को लेकर बहस के बीच अब नजर इस बात पर है कि 2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट लेन-देन के लिए MDR को लेकर आगे क्या व्यवस्था बनती है। रिपोर्टों के अनुसार, NPCI स्तर पर इस संबंध में चर्चा की प्रक्रिया भी सामने आई है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 2,000 तक के UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता और P2P UPI भुगतान मुफ्त रहने की बात सरकार ने कही है। दूसरी ओर, 2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट लेन-देन पर भविष्य में MDR की संभावना ने राजनीतिक बहस को जरूर तेज कर दिया है।

इस मुद्दे पर राहुल गांधी के आरोपों के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी बढ़ने की संभावना है। वहीं, आम UPI उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि वर्तमान में 2,000 से अधिक के हर भुगतान पर कोई नया अनिवार्य शुल्क लागू नहीं हुआ है। आगे यदि कोई MDR व्यवस्था लागू होती है तो उसकी दर, दायरा और वास्तविक प्रभाव आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

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