बदायूं में स्कूल बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग सख्त, 19 सितंबर तक चलेगा मिशन सेफ फ्यूचर 3.0

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Digital UP News Desk

बदायूं: स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा को लेकर उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शासन के निर्देश पर प्रदेशभर में 14 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक छह दिवसीय विशेष अभियान ‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बदायूं में भी स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच को लेकर परिवहन विभाग सक्रिय हो गया है। अभियान के दौरान स्कूल बस, वैन और बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाले अन्य वाहनों की सघन जांच की जाएगी।

इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों की भी पड़ताल की जाएगी। परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें स्कूल वाहनों के दस्तावेज, फिटनेस, चालक की योग्यता और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच करेंगी। वहीं, विद्यालय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति बनाना जरूरी

‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ के तहत विद्यालयों में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति के गठन और उसकी नियमित बैठकों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इस समिति का उद्देश्य स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की परिवहन व्यवस्था की नियमित निगरानी करना और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर समय रहते आवश्यक कदम उठाना है।

समिति की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा की जाएगी। इसके अलावा संबंधित तहसील के नायब तहसीलदार, थानाध्यक्ष, सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी और उपखंड निरीक्षक को समिति में पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

नियमों के अनुसार समिति की बैठक वर्ष में चार बार आयोजित की जानी है। ये बैठकें जुलाई, अक्टूबर, जनवरी और अप्रैल में आयोजित करना अनिवार्य है। इन बैठकों के माध्यम से स्कूल वाहनों की स्थिति, चालकों की जानकारी, सुरक्षा मानकों और बच्चों के सुरक्षित आवागमन से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा सकेगी।

स्कूल वाहनों में अटेंडेंट की मौजूदगी अनिवार्य

अभियान के दौरान स्कूल प्रबंधन को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। स्कूल वाहन में चालक के अलावा एक परिचर यानी अटेंडेंट की मौजूदगी अनिवार्य होगी। अटेंडेंट की जिम्मेदारी बच्चों के वाहन में चढ़ने और उतरने के दौरान उनकी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी।

बच्चों की संख्या अधिक होने की स्थिति में वाहन के अंदर अनुशासन और निगरानी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। इसलिए स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन में तैनात कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारियों की जानकारी हो और वे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

छात्राओं के लिए महिला परिचर की व्यवस्था

यदि किसी स्कूल वाहन में छात्राएं सफर करती हैं, तो उनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिला परिचर की तैनाती अनिवार्य की गई है। इसका उद्देश्य छात्राओं की यात्रा के दौरान बेहतर निगरानी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा अभियान के तहत बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए वाहन में एक शिक्षक की मौजूदगी भी जरूरी की गई है। शिक्षक की उपस्थिति से बच्चों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के साथ-साथ किसी भी आवश्यकता की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

चालकों का शत-प्रतिशत पुलिस सत्यापन जरूरी

स्कूल वाहनों की सुरक्षा में चालक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रबंधन को अपने स्वामित्व या अनुबंध पर संचालित सभी स्कूल वाहनों के चालकों का शत-प्रतिशत पुलिस चरित्र सत्यापन कराना होगा।

बिना पुलिस सत्यापन वाले चालक को स्कूल वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी कि वाहन चालकों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन रिकॉर्ड उपलब्ध रखें। इसके अलावा वाहन चालक को बच्चों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार और यातायात नियमों का पालन करना होगा।

वाहनों की फिटनेस और दस्तावेजों की होगी जांच

विशेष अभियान के दौरान परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें स्कूल वाहनों की तकनीकी और कानूनी स्थिति की भी जांच करेंगी। इसमें वाहन की फिटनेस, आवश्यक दस्तावेज और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन प्रमुख रूप से शामिल रहेगा।

दरअसल, बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की नियमित फिटनेस जांच बेहद महत्वपूर्ण है। वाहन की तकनीकी स्थिति ठीक नहीं होने पर बच्चों की यात्रा प्रभावित हो सकती है। इसलिए विभाग की ओर से ऐसे वाहनों पर विशेष नजर रखी जाएगी, जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं।

इसके साथ ही नियमों के विपरीत संचालित होने वाले या आवश्यक दस्तावेजों के बिना चल रहे वाहनों की भी जांच की जाएगी। परिवहन विभाग की टीमें विभिन्न मार्गों और विद्यालयों के आसपास अभियान चलाकर वाहनों की स्थिति का जायजा लेंगी।

नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

14 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान 19 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमें विभिन्न क्षेत्रों में स्कूल वाहनों की सघन चेकिंग करेंगी। जांच के दौरान यदि कोई वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बिना फिटनेस संचालित होने वाले वाहनों, नियमों के विपरीत चलने वाले वाहनों या अवैध रूप से संचालित स्कूल वाहनों के खिलाफ चालान, वाहन सीज करने और मोटर वाहन अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई की जा सकती है।

इसलिए स्कूल प्रबंधन के लिए जरूरी है कि अभियान के दौरान अपने सभी वाहनों के दस्तावेज और सुरक्षा व्यवस्थाएं दुरुस्त रखें। साथ ही चालकों और परिचरों की नियुक्ति तथा उनके आवश्यक सत्यापन से संबंधित रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखें।

स्कूल प्रबंधन की भी होगी जिम्मेदारी

‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ केवल स्कूल वाहनों की जांच तक सीमित नहीं है। अभियान के तहत विद्यालय प्रबंधन की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए की गई व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को घर से स्कूल और स्कूल से घर तक सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो।

विद्यालयों को अपने स्तर पर भी सुरक्षा मानकों की समीक्षा करनी होगी। परिवहन सुरक्षा समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने, वाहनों की स्थिति पर नजर रखने और चालकों के सत्यापन जैसे उपायों को प्राथमिकता देनी होगी।

इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार हो। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

स्कूली बच्चों को रोजाना स्कूल पहुंचने और वापस घर लौटने के लिए परिवहन व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से शासन की ओर से विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

बदायूं में भी अभियान के दौरान परिवहन विभाग की टीमें स्कूल वाहनों की जांच पर विशेष ध्यान देंगी। वहीं, स्कूल प्रबंधन से सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, ‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ के तहत स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता दी जा रही है। परिवहन विभाग की कार्रवाई से जहां नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में मदद मिलेगी, वहीं स्कूल प्रबंधन को भी अपनी परिवहन व्यवस्था की कमियों को दूर करने का अवसर मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन केवल अभियान के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे शैक्षणिक सत्र में नियमित रूप से किया जाना चाहिए।

बच्चों की सुरक्षित यात्रा स्कूल, परिवहन विभाग, अभिभावकों और वाहन संचालकों की साझा जिम्मेदारी है। ऐसे में सभी पक्षों के सहयोग से ही एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्कूल परिवहन व्यवस्था तैयार की जा सकती है।

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