मध्य प्रदेश में तीन बड़े सियासी कार्यक्रम, राहुल गांधी से लेकर मोहन भागवत तक युवाओं पर फोकस
Digital UP News Desk
भोपाल: मध्य प्रदेश में इस सप्ताह राजनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं। प्रदेश में लगातार तीन दिनों तक राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े बड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहीं, इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के मध्य प्रदेश दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। इस तरह एक ही सप्ताह में होने वाले इन कार्यक्रमों ने प्रदेश की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
खास बात यह है कि तीनों आयोजनों के केंद्र में युवा वर्ग रहेगा। हालांकि, इनके मुद्दे और उद्देश्य अलग-अलग होंगे। कांग्रेस जहां युवाओं के बीच बेरोजगारी, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रही है, वहीं भाजपा और संघ की ओर से युवाओं को विकसित भारत, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक विषयों से जोड़ने पर जोर दिए जाने की संभावना है।
19 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी का कार्यक्रम
कांग्रेस की ओर से 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर पार्टी कार्यकर्ता प्रदेशभर में युवाओं से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें इंदौर पहुंचने की अपील कर रहे हैं। कांग्रेस इस आयोजन को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में जुटी है।
इंदौर का चयन राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों के साथ लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में कांग्रेस के लिए भाजपा के मजबूत क्षेत्र में युवाओं के बीच अपनी बात रखना राजनीतिक रूप से अहम है।
कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह बताई जा रही है कि इसमें 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस इस आयोजन को विशेष रूप से युवाओं और छात्रों से जोड़कर देख रही है।
कांग्रेस की कोशिश है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से युवा इस कार्यक्रम में पहुंचें। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को युवाओं से संवाद बढ़ाने तथा कार्यक्रम के बारे में जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
राहुल गांधी उठा सकते हैं युवा और जनहित के मुद्दे
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में बेरोजगारी, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस लगातार इन मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाती रही है।
इसके अलावा प्रदेश में हाल के कुछ घटनाक्रमों का मुद्दा भी कार्यक्रम में उठ सकता है। इनमें भागीरथपुरा में पानी से हुई मौतों का मामला, बालाघाट में बच्चों की मौत और सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों जैसे मामले शामिल हैं। इन घटनाओं को लेकर कांग्रेस सरकार की व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर सकती है।
हालांकि, कार्यक्रम में किन मुद्दों को किस रूप में उठाया जाएगा, इसका अंतिम स्वरूप आयोजन के दौरान ही स्पष्ट होगा।
17 सितंबर को नितिन नबीन के आने की चर्चा
राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मध्य प्रदेश दौरे की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को है। इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए भाजपा संगठन की ओर से सेवा और जनसरोकार से जुड़े कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार नितिन नबीन उज्जैन में आयोजित सेवा संकल्प अभियान में हिस्सा ले सकते हैं। इसके साथ ही उनके गांधी सागर सेंचुरी जाने और वहां चीतों से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने की भी चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका आधिकारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन का यह मध्य प्रदेश का पहला दौरा होगा। इसलिए भाजपा संगठन के लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उज्जैन में युवा धर्म संसद पर भी नजर
उज्जैन में 18 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से युवा धर्म संसद आयोजित की जा रही है। इस आयोजन की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं। कार्यक्रम में युवाओं से संवाद और विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के भी इस आयोजन में शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में युवाओं के अलावा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों के शामिल होने की बात सामने आई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के कई आयोजन पहले भी हो चुके हैं।
ऐसे में उज्जैन का कार्यक्रम भी युवाओं के बीच संवाद और विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
तीनों कार्यक्रमों का केंद्र युवा वर्ग
मध्य प्रदेश में होने वाले इन तीनों बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में सबसे महत्वपूर्ण समानता युवा वर्ग है। हालांकि, तीनों आयोजनों का एजेंडा अलग है।
कांग्रेस ‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से युवाओं की समस्याओं, शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर, भाजपा सेवा और विकसित भारत के संदेश के जरिए युवाओं को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
वहीं, संघ के युवा धर्म संसद कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विषयों पर युवाओं के साथ संवाद पर जोर रहने की संभावना है।
इस प्रकार एक ही सप्ताह में होने वाले ये कार्यक्रम मध्य प्रदेश में युवाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक नैरेटिव सामने रखेंगे।
इंदौर को चुनना कांग्रेस के लिए क्यों अहम?
राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए इंदौर का चयन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इंदौर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। यहां उच्च शिक्षा के कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) इंदौर जैसे संस्थान देशभर के विद्यार्थियों को आकर्षित करते हैं।
इसके अलावा शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई निजी विश्वविद्यालय तथा उच्च शिक्षण संस्थान भी हैं। इसलिए युवाओं और छात्रों से जुड़े किसी बड़े कार्यक्रम के लिए इंदौर कांग्रेस को व्यापक पहुंच का अवसर देता है।
साथ ही, भाजपा के मजबूत राजनीतिक आधार वाले क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करके कांग्रेस अपने संगठन और युवा संपर्क अभियान को भी मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।
राहुल गांधी के दौरे से पहले भाजपा की सक्रियता
राजनीतिक तौर पर देखें तो राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले भाजपा का सक्रिय होना भी चर्चा का विषय है। कांग्रेस ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लगातार विस्तार देने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा भी अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों और सेवा गतिविधियों के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की तैयारी में है।
शुरुआत में कांग्रेस के इस अभियान को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत सीमित दिखाई दी थी। लेकिन अब कार्यक्रम के बड़े स्तर पर आयोजित होने की तैयारी के बीच भाजपा संगठन भी अपनी गतिविधियों को तेज करता नजर आ रहा है।
हालांकि, इसे सीधे तौर पर किसी कार्यक्रम की काट कहना राजनीतिक विश्लेषण का विषय है। आधिकारिक तौर पर भाजपा की ओर से अपने आयोजनों को सेवा, संगठन और विकसित भारत जैसे विषयों से जोड़ा जा रहा है।
मध्य प्रदेश में बढ़ेगी राजनीतिक हलचल
कुल मिलाकर 17 से 19 सितंबर के बीच मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से जुड़े कार्यक्रमों के कारण राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। एक तरफ कांग्रेस युवाओं और छात्रों से जुड़े सवालों को लेकर इंदौर में अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रही है। दूसरी तरफ भाजपा संगठन सेवा कार्यक्रमों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करेगा। वहीं उज्जैन में होने वाला युवा धर्म संसद कार्यक्रम अलग वैचारिक और सामाजिक विमर्श का मंच बनेगा।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजनीतिक दल और संगठन युवाओं को अपने-अपने तरीके से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में युवा मुद्दे और युवा भागीदारी चर्चा के केंद्र में रह सकती है।

