पेंशन सखियां ग्रामीण भारत में पहुंचाएंगी सेवानिवृत्ति सुरक्षा, NRLM और PFRDA ने मिलाया हाथ
Digital UP News Desk
नई दिल्ली। ग्रामीण भारत के परिवारों को पेंशन और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। ग्रामीण विकास विभाग और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेंशन जागरूकता और कवरेज बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत महिला नेतृत्व वाले सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तक पेंशन संबंधी जानकारी पहुंचाई जाएगी।
इस पहल में ‘पेंशन सखियां’ अहम भूमिका निभाएंगी। ये सामुदायिक स्तर पर ग्रामीण परिवारों को पेंशन योजनाओं, सेवानिवृत्ति नियोजन और वित्तीय सुरक्षा के बारे में जानकारी देंगी। साथ ही, पात्र लोगों को पेंशन योजनाओं में नामांकन कराने और नामांकन के बाद उपलब्ध सेवाओं को समझने में भी सहायता करेंगी।
ग्रामीण महिलाओं के नेटवर्क का होगा उपयोग
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के व्यापक सामुदायिक नेटवर्क का उपयोग करना है। देशभर में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी लाखों महिलाएं ग्रामीण स्तर पर वित्तीय और आजीविका संबंधी गतिविधियों में सक्रिय हैं। ऐसे में इस स्थापित नेटवर्क के माध्यम से पेंशन जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
इस नेटवर्क में बैंकिंग संवाददाता सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति भी शामिल हैं। इन कार्यकर्ताओं की स्थानीय स्तर पर मजबूत पहुंच है और वे ग्रामीण परिवारों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं। इसलिए, पेंशन योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समझौता ज्ञापन पर ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव अमित शुक्ल और PFRDA की कार्यकारी निदेशक सुमीत कौर कपूर ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
पेंशन सखियां कैसे करेंगी मदद?
इस पहल के तहत पेंशन सखियां ग्रामीण परिवारों को केवल योजनाओं की सामान्य जानकारी ही नहीं देंगी, बल्कि उन्हें पेंशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने में भी मदद करेंगी। इसके अंतर्गत पेंशन योजना का महत्व, नामांकन की प्रक्रिया, आवश्यक जानकारी और नामांकन के बाद मिलने वाली सेवाओं के बारे में मार्गदर्शन दिया जाएगा।
विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण नागरिकों तक पहुंच बनाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण परिवारों को अपनी आर्थिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सेवानिवृत्ति की योजना बनाने के लिए समय पर जानकारी मिल सके।
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार कृषि, अनौपचारिक रोजगार और छोटे कारोबार पर निर्भर हैं। इन क्षेत्रों में आय हमेशा नियमित नहीं होती। ऐसे में भविष्य के लिए व्यवस्थित बचत और सामाजिक सुरक्षा की योजना बनाना कई परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
वित्तीय साक्षरता पर रहेगा जोर
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों की बचत की आदतें, आजीविका चक्र और जोखिम की स्थिति अलग-अलग होती है। इसलिए सामाजिक सुरक्षा को ग्रामीण परिवारों की सतत आर्थिक समृद्धि के व्यापक लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक असुरक्षा से बचाव करना नहीं है। बल्कि यह परिवारों को भविष्य की परिस्थितियों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती भी प्रदान करती है।
इसके साथ ही उन्होंने पेंशन जागरूकता और वित्तीय साक्षरता में पारदर्शिता तथा विश्वास को महत्वपूर्ण बताया। ग्रामीण नागरिकों को पेंशन योजनाओं से संबंधित स्पष्ट और सही जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे अपनी दीर्घकालिक वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निर्णय ले सकें।
बढ़ती जीवन प्रत्याशा के बीच सेवानिवृत्ति योजना जरूरी
इस साझेदारी के दौरान ममता शंकर ने भी सेवानिवृत्ति नियोजन के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बदलते जनसांख्यिकीय परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य की वित्तीय सुरक्षा के लिए समय रहते योजना बनाना आवश्यक है।
उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से उन ग्रामीण परिवारों के बीच पेंशन उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जो अभी तक औपचारिक सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा तंत्र से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) सहित विभिन्न पेंशन उत्पादों के बारे में ग्रामीण नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।
डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी
पेंशन सखियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर पहुंच बनाने के साथ-साथ डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल डैशबोर्ड तथा मोबाइल और वेब आधारित समाधानों की मदद से पेंशन जागरूकता और नामांकन की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।
ग्रामीण विकास विभाग की लोकस (LokOS) प्रणाली को भी इस प्रक्रिया में उपयोग किए जाने की बात कही गई है। डिजिटल निगरानी से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में पेंशन संबंधी गतिविधियां कितनी आगे बढ़ी हैं और किन क्षेत्रों में अभी अधिक प्रयास की आवश्यकता है।
इस व्यवस्था के जरिए संबंधित संस्थान प्रगति का आकलन करने के साथ-साथ कवरेज में मौजूद कमियों की पहचान कर सकेंगे। परिणामस्वरूप, जरूरत के अनुसार सामुदायिक स्तर पर जागरूकता गतिविधियों को और मजबूत किया जा सकता है।
ग्रामीण वित्तीय समावेशन को मिलेगा नया आयाम
ग्रामीण भारत में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की पहुंच पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। हालांकि, बैंक खाता होना और सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त वित्तीय योजना बनाना दो अलग-अलग पहलू हैं। ऐसे में नई साझेदारी वित्तीय समावेशन को केवल बैंकिंग सेवाओं तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास करती है।
कृषि और अनौपचारिक क्षेत्र से जुड़े परिवारों की आय में उतार-चढ़ाव हो सकता है। अचानक आने वाली आर्थिक परिस्थितियां भी परिवारों की बचत को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए समय रहते पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के विकल्पों की जानकारी मिलना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
पेंशन सखियां इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध महिला सामुदायिक नेटवर्क के जरिए लोगों तक जानकारी पहुंचने से ग्रामीण परिवारों के लिए पेंशन योजनाओं को समझना और उनमें भागीदारी करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
महिला नेतृत्व वाले नेटवर्क की बढ़ेगी भूमिका
इस साझेदारी की एक खास बात यह है कि इसमें ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के मौजूदा नेटवर्क को केंद्र में रखा गया है। इससे महिलाओं की भूमिका केवल स्वयं सहायता समूहों और आजीविका गतिविधियों तक सीमित न रहकर ग्रामीण परिवारों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा में भी बढ़ सकती है।
वहीं, PFRDA की पेंशन नियमन और सेवानिवृत्ति सुरक्षा से जुड़ी विशेषज्ञता तथा DAY-NRLM के जमीनी सामुदायिक नेटवर्क को एक साथ लाने से इस अभियान को व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है।

