कानपुर में शुरू हुआ ‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’,बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त, , जांचे जाएंगे सभी स्कूल वाहन

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रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा 

कानपुर। स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कानपुर में परिवहन विभाग ने छह दिवसीय विशेष चेकिंग अभियान ‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ शुरू किया है। यह अभियान 14 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करना और विद्यालयों में संचालित वाहनों को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करना है।

यह विशेष अभियान माननीय उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा जनहित याचिका में दिए गए निर्देशों के तहत संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जनपद के समस्त विद्यालयों में संचालित स्कूल वाहनों का शत-प्रतिशत भौतिक निरीक्षण किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। परिवहन विभाग की टीमें वाहनों की फिटनेस, वैध दस्तावेजों और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की जांच कर रही हैं।

छह दिन तक चलेगा विशेष जांच अभियान

परिवहन विभाग के अनुसार, मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 के दौरान स्कूल बस, वैन और बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाले अन्य विद्यालयी वाहनों की बारीकी से जांच की जाएगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस घर पहुंचाने वाले वाहन तकनीकी रूप से फिट होने के साथ-साथ निर्धारित सुरक्षा मानकों का भी पालन करें।

एआरटीओ प्रशासन कहकशां खातून ने बताया कि अभियान के दौरान ऐसे वाहनों के संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी, जिनका पंजीयन निलंबित है या जो तकनीकी रूप से अनफिट पाए गए हैं। इसके अलावा जिन वाहनों की एनओसी जारी हो चुकी है, उनके संचालन को भी प्रतिबंधित किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चेकिंग के दौरान प्रतिबंधित अथवा अनफिट वाहन बच्चों को ले जाते हुए पाए गए, तो संबंधित वाहन संचालक के विरुद्ध प्रवर्तन की कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

स्कूल वाहनों में ये सुरक्षा उपकरण जरूरी

परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों के लिए कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मानक निर्धारित किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक विद्यालयी वाहन में स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी कैमरा और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (जीपीएस) होना आवश्यक है।

इसके अलावा वाहनों में पारदर्शी फर्स्ट-एड बॉक्स की व्यवस्था भी अनिवार्य है, ताकि किसी आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा सके। प्रत्येक वाहन में दो अग्निशामक यंत्र होना भी जरूरी है।

वहीं, बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहनों की खिड़कियों में क्षैतिज स्टील की छड़ें लगी होनी चाहिए। इन छड़ों के बीच अधिकतम पांच सेंटीमीटर की दूरी निर्धारित की गई है। इससे बच्चों की सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और वाहन के भीतर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।

इसलिए परिवहन विभाग की टीम वाहन की फिटनेस के साथ-साथ इन सभी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी स्थिति का भी निरीक्षण करेगी।

अभिभावकों से भी सतर्क रहने की अपील

परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों को लेकर अभिभावकों से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय यह जरूर सुनिश्चित करें कि जिस वाहन से बच्चा यात्रा कर रहा है, वह वैध और फिट हो तथा उसमें निर्धारित सुरक्षा उपकरण मौजूद हों।

दरअसल, बच्चों की स्कूल यात्रा में अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था नहीं है या वाहन की फिटनेस संदिग्ध है, तो इसकी जानकारी विद्यालय प्रशासन अथवा संबंधित परिवहन विभाग को दी जा सकती है।

इसके साथ ही स्कूल प्रशासन और वाहन संचालकों को भी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों की अनदेखी पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।

चालकों का शत-प्रतिशत चरित्र सत्यापन अनिवार्य

स्कूल वाहनों के चालकों को लेकर भी परिवहन विभाग ने सख्त व्यवस्था लागू की है। एआरटीओ प्रशासन कहकशां खातून के अनुसार स्कूली बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी स्कूल वाहनों के चालकों का स्थानीय पुलिस के माध्यम से शत-प्रतिशत चरित्र सत्यापन कराया जाना अनिवार्य है।

बिना पुलिस सत्यापन वाले चालक को स्कूल वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयी वाहनों के संचालन से जुड़े कर्मचारियों की आवश्यक जांच सुनिश्चित करना है।

अधिकारियों के मुताबिक स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वाहन संचालन की जिम्मेदारी ऐसे चालक को ही दी जाए, जिसका निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस सत्यापन पूरा हो चुका हो।

छात्राओं की सुरक्षा के लिए महिला परिचर अनिवार्य

स्कूल वाहनों में छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला परिचर की मौजूदगी को भी अनिवार्य किया गया है। परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार विद्यालयी वाहनों में महिला परिचर की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

यह व्यवस्था विशेष रूप से छात्राओं की यात्रा के दौरान अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा विद्यालय प्रशासन को वाहन संचालन से जुड़े सभी सुरक्षा प्रावधानों का नियमित रूप से पालन करना होगा।

विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति का गठन जरूरी

स्कूल वाहनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक विद्यालय स्तर पर ‘विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति’ का गठन भी अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली के नियम 222-जी के तहत की जानी है।

समिति में स्थानीय थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य विद्यालयी वाहनों से संबंधित सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करना और जरूरत पड़ने पर आवश्यक सुधार करना है।

इसके अलावा विद्यालय स्तर पर समिति की नियमित बैठकें आयोजित करना भी अनिवार्य है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार ये बैठकें जुलाई, अक्टूबर, जनवरी और अप्रैल में प्रत्येक दशा में आयोजित की जानी हैं।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई

परिवहन विभाग के विशेष अभियान से यह स्पष्ट है कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वाहन की फिटनेस, आवश्यक उपकरण, चालक का पुलिस सत्यापन और विद्यालय स्तर पर सुरक्षा समिति जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

वहीं, मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 के दौरान परिवहन विभाग द्वारा किए जा रहे निरीक्षण से स्कूल प्रशासन और वाहन संचालकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाला प्रत्येक वाहन निर्धारित मानकों को पूरा करता हो।

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