मेरठ में पालतू कुत्ते टफ्फू की इंसानों जैसी तेरहवीं, पसंदीदा बूंदी के लड्डू भी बांटे, जानिए पूरी कहानी,,,,

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रिपोर्ट- मनीष पाराशर 

मेरठ: इंसान और बेजुबान जानवरों के बीच का रिश्ता कई बार शब्दों से कहीं ज्यादा गहरा होता है। इसका भावुक उदाहरण मेरठ में देखने को मिला, जहां यादव परिवार ने 12 साल तक अपने परिवार के सदस्य की तरह रहे पालतू कुत्ते टफ्फू के निधन के बाद उसकी तेरहवीं पूरे सम्मान और हिंदू रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की। परिवार ने टफ्फू की याद में हवन कराया और रिश्तेदारों व पड़ोसियों के लिए भोजन भी तैयार कराया। खास बात यह रही कि टफ्फू को पसंद आने वाले बूंदी के लड्डू भी तेरहवीं के प्रसाद और भोजन में शामिल किए गए।

परिवार के इस भावुक कदम ने आसपास के लोगों का भी ध्यान खींचा। तेरहवीं के दौरान लोगों ने टफ्फू की तस्वीर के सामने श्रद्धा से नमन किया और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। परिवार का कहना है कि टफ्फू उनके लिए सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं था, बल्कि 12 वर्षों तक घर के हर सुख-दुख में साथ रहने वाला सदस्य था।

12 साल पहले परिवार में आया था टफ्फू

मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले सुनील यादव पिछले करीब 16 वर्षों से मेरठ के डीएन इंटर कॉलेज में माली के रूप में काम कर रहे हैं। उनके परिवार में पत्नी सुनीता यादव, 18 वर्षीय बेटी वर्षा और 17 वर्षीय बेटा शिवम हैं।

करीब 12 साल पहले डीएन इंटर कॉलेज परिसर में एक देशी नस्ल का पिल्ला जन्मा था। सुनील यादव की नजर उस पिल्ले पर पड़ी तो वह उसे अपने घर ले आए। परिवार ने प्यार से उसका नाम टफ्फू रखा। इसके बाद देखते ही देखते टफ्फू परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गया।

सुनील के मुताबिक, टफ्फू ने घर में केवल एक पालतू जानवर की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि वह परिवार के सदस्यों के साथ इस तरह घुल-मिल गया कि उसके बिना घर की कल्पना करना मुश्किल हो गया था। बच्चों के साथ खेलना हो या परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन और त्योहार, टफ्फू हर मौके पर परिवार के बीच मौजूद रहता था।

बेटी वर्षा के लिए भाई जैसा था टफ्फू

टफ्फू और सुनील यादव की बेटी वर्षा के बीच खास लगाव था। वर्षा उसे अपने भाई की तरह मानती थीं। पिछले 12 वर्षों से वह हर रक्षाबंधन पर टफ्फू को राखी बांधती थीं।

इस बार भी रक्षाबंधन के मौके पर वर्षा ने टफ्फू की कलाई पर राखी बांधी थी। परिवार के लिए यह रिश्ता इतना खास था कि टफ्फू की मौजूदगी घर के हर महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बन चुकी थी।

वर्षा के लिए टफ्फू के जाने का दुख किसी करीबी सदस्य के बिछड़ने जैसा है। परिवार के मुताबिक, टफ्फू की मौत के बाद घर में अचानक सन्नाटा छा गया। परिवार के लोग कई दिनों तक सामान्य नहीं हो सके।

अचानक बिगड़ी तबीयत, शुक्रवार को हुआ निधन

बताया गया कि शुक्रवार, 11 सितंबर को टफ्फू की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उसका निधन हो गया।

टफ्फू के जाने से परिवार पर गहरा भावनात्मक असर पड़ा। सुनील यादव के मुताबिक, उसके निधन के बाद लगातार तीन दिनों तक घर में खाना तक नहीं बनाया गया। परिवार के सदस्य उसके साथ बिताए पुराने पलों को याद करते रहे।

टफ्फू की मौत के बाद सुनील यादव ने उसे सम्मानपूर्वक उसी डीएन इंटर कॉलेज के मैदान में दफनाया, जहां से करीब 12 वर्ष पहले उसके साथ परिवार का रिश्ता शुरू हुआ था। इस तरह टफ्फू की जिंदगी की शुरुआत जिस जगह से हुई थी, उसी स्थान पर उसे अंतिम विदाई भी दी गई।

पूरे रीति-रिवाज से आयोजित की गई तेरहवीं

टफ्फू के निधन के बाद सुनील यादव ने उसकी तेरहवीं आयोजित करने का फैसला किया। रविवार को परिवार की ओर से कार्यक्रम रखा गया। इसमें हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हवन कराया गया।

हवन के दौरान परिवार के सदस्यों के साथ रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने भी हिस्सा लिया। टफ्फू की तस्वीर कार्यक्रम स्थल पर रखी गई और लोगों ने उसके सामने श्रद्धा से नमन किया। इसके बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

परिवार ने तेरहवीं में शामिल होने वाले लोगों के लिए भोजन भी तैयार कराया। इसके लिए बाकायदा हलवाई लगाया गया। भोजन में आलू-सीताफल की सब्जी, रायता और कचौरी समेत कई व्यंजन बनाए गए।

हालांकि, इस भोजन में सबसे भावुक करने वाली चीज थी बूंदी के लड्डू। परिवार के अनुसार टफ्फू को बूंदी के लड्डू बेहद पसंद थे। इसलिए उसकी पसंदीदा मिठाई को भी तेरहवीं के आयोजन में शामिल किया गया और रिश्तेदारों व पड़ोसियों के बीच लड्डू बांटे गए।

सुनील यादव बोले- टफ्फू मेरे छोटे बेटे जैसा था

सुनील यादव ने टफ्फू को याद करते हुए कहा कि वह उनके लिए किसी जानवर की तरह नहीं, बल्कि छोटे बेटे की तरह था। 12 वर्षों तक वह परिवार की हर खुशी और दुख में उनके साथ रहा।सुनील के अनुसार, जिस तरह किसी परिवार में किसी प्रिय सदस्य के निधन के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए धार्मिक रस्में निभाई जाती हैं, उसी भावना के साथ उन्होंने टफ्फू के लिए भी तेरहवीं आयोजित करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि टफ्फू ने परिवार को 12 साल तक अपना प्यार दिया। इसलिए परिवार की भी जिम्मेदारी थी कि उसे अंतिम विदाई उसी सम्मान और अपनापन के साथ दिया जाए, जिसका वह हकदार था।

सुनीता यादव ने कहा- घर अब सूना लगता है

सुनील यादव की पत्नी सुनीता यादव ने भी टफ्फू से जुड़ी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि उसके जाने के बाद घर बिल्कुल सूना लग रहा है। परिवार के सदस्य उसकी कमी को लगातार महसूस कर रहे हैं।

सुनीता ने बताया कि टफ्फू को बूंदी के लड्डू बहुत पसंद थे। इसलिए परिवार ने तेरहवीं के भोजन में उसकी पसंदीदा मिठाई को खास तौर पर शामिल किया। इसके साथ ही टफ्फू की तस्वीर रखकर उसे श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

उनके मुताबिक, टफ्फू केवल घर की रखवाली करने वाला कुत्ता नहीं था। वह परिवार की दिनचर्या का हिस्सा था और उसके साथ परिवार के सभी सदस्यों की भावनाएं जुड़ी हुई थीं।

रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने भी जताई संवेदना

रविवार को आयोजित तेरहवीं में परिवार के अलावा दर्जनों रिश्तेदार और पड़ोसी शामिल हुए। लोगों ने टफ्फू की तस्वीर के सामने आहुति दी और उसकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

इस आयोजन ने यह भी दिखाया कि पालतू जानवर परिवार के जीवन में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लंबे समय तक साथ रहने के कारण उनके साथ भावनात्मक रिश्ता बन जाता है। ऐसे में उनका बिछड़ना परिवार के लिए बेहद कठिन अनुभव हो सकता है।

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