भारत-अफगानिस्तान टी20 सीरीज: दिल्ली में अफगानिस्तान होगी होम टीम, भारतीय टीम विजिटिंग टीम के रूप में मैदान पर उतरेगी

WhatsApp Image 2026-09-13 at 1.36.37 PM

Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज आज से शुरू होने जा रही है। सीरीज के तीनों मुकाबले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जाएंगे। हालांकि, इस सीरीज की सबसे खास बात यह है कि मुकाबले भारत में होने के बावजूद भारतीय टीम को घरेलू टीम का दर्जा नहीं मिलेगा। इसके बजाय अफगानिस्तान क्रिकेट टीम को होम टीम का दर्जा दिया गया है, जबकि भारतीय टीम विजिटिंग टीम के रूप में मैदान पर उतरेगी।

दरअसल, इस सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड कर रहा है। अफगानिस्तान में सुरक्षा परिस्थितियों के कारण वहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आयोजन करना आसान नहीं है। ऐसे में अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड अपने घरेलू मुकाबलों के लिए भारत या संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को वैकल्पिक स्थल के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। इस बार उसने भारत को अपने घरेलू मैचों के लिए चुना है।

यह स्थिति भारतीय क्रिकेट के लिए भी काफी अनोखी है। भारतीय क्रिकेट के करीब 94 साल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारतीय टीम अपने ही देश में कोई अंतरराष्ट्रीय सीरीज खेलेगी, लेकिन उसे होम टीम का दर्जा हासिल नहीं होगा। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों के बीच यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर होम टीम और विजिटिंग टीम के बीच होने वाले इस अंतर का मैच के दौरान क्या असर पड़ेगा।

आइए, छह अहम सवालों के जरिए समझते हैं कि दिल्ली में होने वाली इस सीरीज में व्यवस्था किस तरह काम करेगी।

1. पिच का मिजाज कौन तय करेगा?

क्रिकेट में घरेलू टीम को अपने मैदान की परिस्थितियों का लाभ मिलता है। आम तौर पर होम टीम का मैनेजमेंट पिच की जरूरतों और टीम की रणनीति को ध्यान में रखते हुए क्यूरेटर्स के सामने अपनी मांग रख सकता है।

इस सीरीज में अरुण जेटली स्टेडियम की पिच तैयार करने की जिम्मेदारी स्थानीय क्यूरेटर्स की ही होगी। हालांकि, चूंकि अफगानिस्तान को होम टीम का दर्जा प्राप्त है, इसलिए वह पिच के मिजाज को लेकर अपनी रणनीतिक जरूरतों के अनुसार सुझाव या मांग रख सकता है।

अफगानिस्तान की टीम भारतीय परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित है। इससे पहले भी अफगानिस्तान अपने कुछ घरेलू अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भारत के अलग-अलग स्टेडियमों में खेल चुका है। उन मुकाबलों के दौरान अफगान टीम की ओर से स्पिन गेंदबाजी के अनुकूल पिचों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा रही है। हालांकि, जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी के लिए अनुकूल पिचों का विकल्प भी अपनाया गया है।

इसलिए इस सीरीज में पिच को लेकर अफगानिस्तान की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।

2. टॉस के समय सिक्का कौन उछालेगा?

टॉस क्रिकेट मैच का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। नियम के मुताबिक होम टीम का कप्तान सिक्का उछालता है, जबकि विजिटिंग टीम का कप्तान हेड या टेल चुनता है।

इसलिए दिल्ली में होने वाले इन मुकाबलों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अफगानिस्तान के कप्तान इब्राहिम जादरान टॉस के लिए सिक्का उछालेंगे, जबकि भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर हेड या टेल का विकल्प चुनेंगे।

यानी मैदान भारत का होगा, दर्शक बड़ी संख्या में भारतीय टीम को समर्थन देते नजर आ सकते हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर टॉस में घरेलू टीम का अधिकार अफगानिस्तान के पास रहेगा।

3. ड्रेसिंग रूम का बंटवारा कैसे होगा?

अरुण जेटली स्टेडियम में दोनों टीमों के लिए अलग-अलग ड्रेसिंग रूम मौजूद हैं। चूंकि इस सीरीज में अफगानिस्तान को होम टीम का दर्जा मिला है, इसलिए उसे होम ड्रेसिंग रूम दिया जाएगा, जबकि भारतीय टीम विजिटर्स ड्रेसिंग रूम का इस्तेमाल करेगी।

स्टेडियम में होम ड्रेसिंग रूम पूर्व भारतीय क्रिकेटर रमन लांबा के नाम पर है। वहीं, विजिटर्स ड्रेसिंग रूम का नाम पूर्व भारतीय खिलाड़ी प्रकाश भंडारी के नाम पर रखा गया है।

इस तरह भारतीय टीम अपने देश में खेलने के बावजूद उस ड्रेसिंग रूम में बैठेगी, जिसका इस्तेमाल सामान्य परिस्थितियों में मेहमान टीमें करती हैं।

4. खिलाड़ियों के होटल, खाने और यात्रा का खर्च कौन उठाएगा?

होम टीम होने के कारण अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को अपनी टीम से जुड़े कई व्यवस्थागत खर्च उठाने होंगे। इसमें खिलाड़ियों के होटल में ठहरने, होटल से स्टेडियम आने-जाने और अन्य लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च शामिल हैं।

हालांकि, खिलाड़ियों के खाने को लेकर व्यवस्था थोड़ी अलग हो सकती है। होटल में टीम क्या खाएगी, इसका पूरा निर्णय केवल मेजबान बोर्ड नहीं करता। भारतीय टीम अपने खिलाड़ियों की जरूरत और डाइट के मुताबिक होटल को अपना डाइट चार्ट उपलब्ध कराती है। इसके बाद होटल के चुनिंदा शेफ उसी के अनुरूप भोजन तैयार करते हैं।

अफगानिस्तान की टीम के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जा सकती है। यानी मेजबानी का मतलब यह नहीं है कि अफगान बोर्ड भारतीय खिलाड़ियों के भोजन या डाइट का फैसला करेगा।

इसके अलावा स्टेडियम का किराया, ग्राउंड स्टाफ की फीस, बिजली, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च भी आम तौर पर होम बोर्ड की जिम्मेदारी में आते हैं।

दिल्ली जिला क्रिकेट संघ यानी DDCA ने इस सीरीज के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड से स्टेडियम का किराया नहीं लिया है। DDCA ने अफगान क्रिकेट बोर्ड की मेजबानी में सहयोग करते हुए इसे ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना से जोड़कर देखा है।

5. क्या भारतीय टीम को घरेलू परिस्थितियों का फायदा नहीं मिलेगा?

मैच भारत में होने के कारण भारतीय टीम को परिस्थितियों की जानकारी निश्चित तौर पर रहेगी। भारतीय खिलाड़ी अरुण जेटली स्टेडियम की पिच और वातावरण से परिचित हैं। साथ ही, भारतीय प्रशंसकों का समर्थन भी टीम इंडिया के पक्ष में रहने की संभावना है।

फिर भी आधिकारिक तौर पर यह अफगानिस्तान की होम सीरीज है। इसलिए होम टीम से जुड़े अधिकार और जिम्मेदारियां अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पास रहेंगी।

यही इस सीरीज को सामान्य भारत में होने वाली घरेलू सीरीज से अलग बनाता है। एक तरफ भारत को अपने मैदान और दर्शकों का भावनात्मक समर्थन मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ अफगानिस्तान को आधिकारिक होम टीम के फायदे हासिल होंगे।

6. सीरीज से होने वाली कमाई किसे मिलेगी?

सीरीज की मेजबानी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड कर रहा है, इसलिए इससे होने वाली प्रमुख व्यावसायिक आय भी उसी के खाते में जाएगी।

इसमें ब्रॉडकास्ट राइट्स, स्टेडियम में विज्ञापन और टिकटों की बिक्री से होने वाली कमाई शामिल है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तीन मैचों की इस सीरीज से अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को करीब 20 करोड़ रुपये तक की कमाई होने का अनुमान है।

इस लिहाज से भारत में मैच आयोजित होने के बावजूद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए यह सीरीज आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। भारत जैसा बड़ा क्रिकेट बाजार, बड़ी दर्शक संख्या और मजबूत ब्रॉडकास्ट वैल्यू अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए घरेलू मैचों को विदेश में आयोजित करने के बावजूद व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराती है।

भारत के लिए क्यों खास है यह सीरीज?

भारत और अफगानिस्तान के बीच क्रिकेट संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों टीमों के बीच मुकाबलों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और अफगानिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी स्थिति मजबूत की है।

इस सीरीज में भारतीय टीम को अपने देश में खेलते हुए भी विजिटिंग टीम की भूमिका निभानी होगी। वहीं, अफगानिस्तान की टीम को आधिकारिक तौर पर घरेलू टीम का दर्जा मिलेगा। यही अनोखा समीकरण इस सीरीज को क्रिकेट प्रशंसकों के लिए खास बना रहा है।

इसके अलावा दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम की परिस्थितियां भी दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण होंगी। टॉस, पिच का व्यवहार और स्पिन गेंदबाजों की भूमिका मैच का रुख तय कर सकती है। इसलिए तीनों मुकाबलों में रणनीति के स्तर पर भी दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, भारत-अफगानिस्तान टी20 सीरीज सिर्फ मैदान पर दो टीमों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि यह क्रिकेट की उस व्यवस्था का भी अनोखा उदाहरण है, जिसमें किसी देश की घरेलू सीरीज दूसरे देश की जमीन पर आयोजित की जाती है। भारत में होने के बावजूद अफगानिस्तान का होम टीम होना और टीम इंडिया का विजिटिंग टीम के रूप में उतरना इस सीरीज को भारतीय क्रिकेट इतिहास की एक अलग और यादगार घटना बना रहा है।

You may have missed