मथुरा में लगी मिट्टी के गणपति कार्यशाला, 50 से अधिक नागरिकों ने बनाई 30 से अधिक प्रतिमाएं

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

मथुरा: गणेश चतुर्थी के अवसर पर मथुरा-वृंदावन नगर निगम और प्रोजेक्ट मथुरा ने पर्यावरण संरक्षण के साथ आस्था को जोड़ते हुए एक सराहनीय पहल की। नगर निगम भूतेश्वर मुख्यालय में लगातार तीसरे वर्ष पर्यावरण-अनुकूल ‘मिट्टी के गणपति’ कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान बच्चों, युवाओं और परिवारों समेत 50 से अधिक नागरिकों ने प्राकृतिक मिट्टी से 30 से अधिक गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिमाओं की सामूहिक महाआरती की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं के स्थान पर प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को बढ़ावा देना रहा। आयोजकों के अनुसार, मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि विसर्जन के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करने में मदद करती है।

पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन का दिया संदेश

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को बताया गया कि मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा का विसर्जन घर पर भी सरल और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जा सकता है। इसके लिए प्रतिमा को पानी से भरे किसी पात्र में विसर्जित किया जा सकता है। प्रतिमा के घुलने के बाद प्राप्त मिट्टी और पानी का इस्तेमाल पौधों में किया जा सकता है। इस तरह धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

प्रोजेक्ट मथुरा के सीए विपुल अग्रवाल ने कहा कि यमुना घाटों पर स्वच्छता अभियान के दौरान विसर्जन के बाद छोड़ी गई प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं। ऐसे में ‘मिट्टी के गणपति’ जैसी पहल लोगों को पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के गणपति को सकारात्मक जन-आंदोलन और नई परंपरा के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है, जिससे भगवान गणेश की भक्ति के साथ मां यमुना और प्रकृति की रक्षा भी हो सके।

बच्चों और परिवारों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

कार्यशाला की खास बात यह रही कि इसमें बच्चों और परिवारों की भागीदारी भी देखने को मिली। नगर निगम के स्वच्छता विशेषज्ञ ऋषभ दुबे ने कहा कि बच्चों को इस तरह के आयोजनों से जोड़ने से उनमें छोटी उम्र से ही स्वच्छता, पर्यावरण और जिम्मेदार विसर्जन के प्रति जागरूकता विकसित होती है। उन्होंने अपनी बेटी के साथ स्वयं भी मिट्टी के गणपति तैयार किए।

वहीं, आईटी विशेषज्ञ विनीत द्विवेदी ने बताया कि प्रोजेक्ट मथुरा के साथ लगातार तीसरी बार इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उनके अनुसार, यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नागरिक सहभागिता और जन-जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में दिल्ली से आए प्रसिद्ध कलाकार आदित्य चौधरी ‘जामुनापारवाला’ की जीवंत चित्रकारी भी आकर्षण का केंद्र रही। कार्यशाला के दौरान तैयार की गई उनकी कलाकृति नगर आयुक्त श्री ओजस्वी राज को भेंट की जाएगी। इससे कार्यक्रम में कला और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर समन्वय भी देखने को मिला।

प्लास्टर ऑफ पेरिस के विकल्प पर जोर

कार्यक्रम में नेचर ग्रीन के अभिलाष सांगवान ने नगर निगम की सूचना, शिक्षा एवं संचार टीमों को प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं के चलन को कम करने और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से मां यमुना की स्वच्छता और संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।

इसी क्रम में मथुरा राउंड टेबल के राघव अग्रवाल ने भी परिवार के साथ कार्यशाला में हिस्सा लिया। उन्होंने ब्रजवासियों से अपील की कि पर्यावरण संरक्षण के लिए नागरिकों को स्वयं आगे आना चाहिए। उनका कहना था कि जब धार्मिक आयोजनों में पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाया जाएगा, तभी इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा।

‘प्लास्टिक बैंक’ अभियान का फिर हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्ट मथुरा के ‘प्लास्टिक बैंक’ अभियान को भी दोबारा शुरू किया गया। इसके तहत नागरिकों को चिप्स, कुरकुरे और अन्य सूखे प्लास्टिक पाउच को घर पर अलग एकत्र करने और फिर उन्हें पुनर्चक्रण के लिए जमा करने के लिए प्रेरित किया गया।

बाल प्रतिभागी काव्यान, पुत्र दिव्यांक, ने भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक बैंक में पाउच जमा करने से प्लास्टिक न तो गोवंश के भोजन का हिस्सा बनेगा, न ही यमुना तक पहुंचेगा और न ही कचरा भराव स्थल पर जाएगा। इस संदेश ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक किया।

इसके अलावा सुहानी और उनकी बेटी आन्या ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और युवाओं से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया।

नागरिक सहभागिता से मजबूत हुआ संदेश

कार्यशाला में अर्पिता और भानवी ने प्रतिभागियों को मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाना सिखाया। वहीं, मनीष, दीप, जय, दीपक, अभिषेक, कृष्णा श्री, रचित और साक्षी समेत प्रोजेक्ट मथुरा की टीम तथा नगर निगम की सहयोगी संस्थाओं नेचर ग्रीन और प्लान फाउंडेशन ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

दरअसल, इस पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यदि गणेश उत्सव जैसे धार्मिक आयोजनों में प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल बढ़ाया जाए और प्लास्टिक कचरे को अलग करके पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाए, तो नागरिक स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल सकती है।

इस प्रकार मथुरा-वृंदावन नगर निगम और प्रोजेक्ट मथुरा की ‘मिट्टी के गणपति’ पहल ने श्रद्धा, कला, स्वच्छता, पुनर्चक्रण और नागरिक सहभागिता को एक मंच पर जोड़ने का काम किया। आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि ऐसी पहल आगे चलकर ब्रज क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक आयोजनों की एक मजबूत परंपरा विकसित करने में मददगार साबित हो सकती है।

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