कानपुर में जर्जर सड़क पर खंती में उतरी स्कूल बस, चालक की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: कानपुर नगर के सरसौल क्षेत्र में जर्जर सड़क एक बार फिर लोगों की चिंता का कारण बन गई। गुरुवार को घाघूखेड़ा गांव के पास सड़क की खराब स्थिति के चलते एक स्कूल बस सड़क से फिसलकर खंती (सड़क किनारे गड्ढे) में उतर गई। बस में तीन स्कूली बच्चे सवार थे। राहत की बात यह रही कि चालक ने समय रहते सूझबूझ और संयम का परिचय दिया, जिससे बस पलटने से बच गई और सभी बच्चे सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए।

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इस मार्ग की मरम्मत की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग द्वारा अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क की जल्द मरम्मत कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है।

जर्जर सड़क बनी दुर्घटना की वजह

जानकारी के अनुसार, सरसौल विकासखंड के घाघूखेड़ा गांव के पास स्थित सड़क काफी समय से क्षतिग्रस्त है। कई स्थानों पर सड़क धंस चुकी है, जबकि किनारों पर गहरे गड्ढे और खंतियां बनी हुई हैं। लगातार बारिश के कारण सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो गई है।

इसी मार्ग से एक स्कूल बस बच्चों को लेकर गुजर रही थी। सड़क के कमजोर हिस्से पर पहुंचते ही बस का संतुलन बिगड़ गया और वह धीरे-धीरे सड़क किनारे बनी खंती में उतर गई। हालांकि चालक ने घबराने के बजाय सावधानी से वाहन को नियंत्रित रखा, जिससे बस पलटने से बच गई।

चालक की सतर्कता से सुरक्षित रहे बच्चे

बस में तीन बच्चे सवार थे। अचानक बस के खंती में उतरने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि चालक ने धैर्य बनाए रखा और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की।

इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को सुरक्षित बस से बाहर निकाला गया। घटना में किसी बच्चे या चालक के घायल होने की सूचना नहीं है। इस प्रकार चालक की सूझबूझ और स्थानीय लोगों के सहयोग से संभावित बड़ा हादसा टल गया।

ग्रामीणों ने उठाए सड़क की स्थिति पर सवाल

घटना के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। उन्होंने कहा कि सड़क की जर्जर स्थिति कोई नई बात नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई महीनों से इस मार्ग पर आवागमन कठिन बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और विभागों से सड़क की मरम्मत की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका मानना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाती, तो इस प्रकार की घटना से बचा जा सकता था।

बारिश ने बढ़ाई परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल के दिनों में हुई बारिश के कारण सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो गई है। जगह-जगह गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को सड़क का सही अनुमान नहीं लग पाता।

विशेष रूप से स्कूल बस, एंबुलेंस और अन्य बड़े वाहनों के लिए इस मार्ग पर चलना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में इस सड़क पर दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।

स्कूल बसों की सुरक्षा पर भी जोर

यह घटना एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बेहतर सड़क अवसंरचना की आवश्यकता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन मार्गों से प्रतिदिन स्कूली वाहन गुजरते हैं, वहां नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत अत्यंत आवश्यक है।

इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन और वाहन चालकों को भी मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • घाघूखेड़ा मार्ग की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
  • सड़क के किनारों को सुरक्षित बनाया जाए।
  • जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए।
  • स्कूल बसों के मार्गों का नियमित निरीक्षण कराया जाए।
  • बरसात से पहले क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन मांगों पर समय रहते कार्रवाई होती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना कम हो सकती है।

सड़क रखरखाव की आवश्यकता

यातायात विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं। इसलिए इनका नियमित रखरखाव आवश्यक है।

समय पर मरम्मत, जल निकासी की व्यवस्था और सड़क किनारों की सुरक्षा से दुर्घटनाओं की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद

घटना के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग सड़क का निरीक्षण कर जल्द आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू करेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग कई गांवों को जोड़ता है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र, किसान और आम नागरिक इसका उपयोग करते हैं।

यदि सड़क की मरम्मत शीघ्र नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आवागमन और अधिक प्रभावित हो सकता है। इसलिए लोगों ने प्रशासन से प्राथमिकता के आधार पर इस समस्या का समाधान करने की अपील की है।

फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित

इस घटना का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि बस में सवार सभी बच्चे सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। चालक की सतर्कता, स्थानीय लोगों के सहयोग और समय पर स्थिति संभाल लेने के कारण संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई।

हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि जर्जर सड़कों की समय पर मरम्मत और नियमित निगरानी कितनी आवश्यक है। स्थानीय नागरिकों को अब उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस घटना से सबक लेते हुए सड़क सुधार के लिए शीघ्र और प्रभावी कदम उठाएगा।

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