पीपीएन कॉलेज में पोस्टर और स्लोगन लेखन प्रतियोगिता, छात्रों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा 

कानपुर। पीपीएन (पीजी) कॉलेज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विद्यार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पोस्टर एवं स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की ग्रीन कैंपस कमेटी की ओर से आयोजित इन रचनात्मक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और मौलिक विचारों के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर, ऊर्जा संरक्षण और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने पोस्टर और स्लोगन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखना केवल किसी एक संस्था या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पोस्टर प्रतियोगिता में दिखी विद्यार्थियों की रचनात्मकता

ग्रीन कैंपस कमेटी द्वारा आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता का विषय ‘अपशिष्ट प्रबंधन एवं प्लास्टिक मुक्त परिसर’ रखा गया था। इस विषय पर विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। विभिन्न पोस्टरों के माध्यम से उचित तरीके से कचरे के निस्तारण, स्वच्छता बनाए रखने, प्लास्टिक के सीमित उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को अपनाने का संदेश दिया गया।

विद्यार्थियों ने अपने पोस्टरों में यह बताने का प्रयास किया कि दैनिक जीवन में छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। इसके अलावा, पोस्टरों में प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने, कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने और स्वच्छ परिसर बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

दरअसल, वर्तमान समय में बढ़ता प्लास्टिक कचरा और अपशिष्ट प्रबंधन एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को समस्या के साथ-साथ उसके समाधान के प्रति भी जागरूक करती हैं।

स्लोगन लेखन में ऊर्जा और जल संरक्षण पर जोर

इसी क्रम में आयोजित स्लोगन लेखन प्रतियोगिता की थीम ‘ऊर्जा एवं जल संरक्षण’ रही। इसमें विद्यार्थियों ने प्रभावशाली और मौलिक स्लोगनों के माध्यम से जल और ऊर्जा के महत्व को रेखांकित किया।

विद्यार्थियों ने अपने स्लोगनों में जल की बर्बादी रोकने, बिजली का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का सीमित और समझदारी से उपयोग भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।

इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि ऊर्जा और जल की बचत केवल आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पर्यावरणीय संतुलन से भी है। इसलिए घर, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।

प्राचार्य ने विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना की

कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार सिंह ने विद्यार्थियों की रचनात्मक सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से जल और ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ ही प्लास्टिक के न्यूनतम प्रयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया। प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थी समाज में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सकारात्मक संदेशों को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है।

उन्होंने प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि रचनात्मक माध्यमों से किसी महत्वपूर्ण सामाजिक विषय को लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास

ग्रीन कैंपस कमेटी की संयोजिका प्रो. निधि श्रीवास्तव ने प्रतियोगिता के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाना है। साथ ही, उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक रूप से प्रेरित करना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करने के लिए केवल कक्षा में जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उन्हें गतिविधियों और अभियानों से जोड़ना भी जरूरी है। पोस्टर और स्लोगन जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी सोच को रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने का अवसर देती हैं।

शिक्षकों ने भी बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह

प्रतियोगिता के दौरान ग्रीन कैंपस कमेटी के सदस्यों ने विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। कमेटी की सदस्य डा. अलका रानी, डा. नीरज वर्मा और डा. मनु चौहान ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की।

उन्होंने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण को केवल प्रतियोगिता या अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। वहीं, डा. एस.पी. श्रीवास्तव, डा. शैलेन्द्र सिंह सहित अन्य शिक्षकों ने भी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता

पोस्टर प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के परिणाम में आयुषी धीमान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं उर्ज फातिमा और अंशिका बाजपेयी संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं।

इसके अलावा महक, सूफिया और आयेशा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता विद्यार्थियों के साथ-साथ प्रतियोगिता में भाग लेने वाले अन्य छात्रों के प्रयासों की भी सराहना की गई।

स्लोगन लेखन प्रतियोगिता के परिणाम

स्लोगन लेखन प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी प्रभावशाली सोच प्रस्तुत की। इसमें आयुषी धीमान ने प्रथम स्थान हासिल किया। आयेशा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि श्रेया गुप्ता और प्राची दिवाकर संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहीं।

दोनों प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषय को रचनात्मक माध्यमों से भी प्रभावी तरीके से समाज तक पहुंचाया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता जरूरी

आज के समय में स्वच्छता, प्लास्टिक नियंत्रण, जल संरक्षण और ऊर्जा बचत जैसे विषयों पर निरंतर जागरूकता की आवश्यकता है। ऐसे में कॉलेज स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को इन मुद्दों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

पीपीएन कॉलेज की ग्रीन कैंपस कमेटी की यह पहल विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा सकती है। इसके माध्यम से छात्रों को न केवल अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला, बल्कि उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के संदेश को भी प्रभावी ढंग से सामने रखा।

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