आगरा में 6 किमी दौड़ से पहले युवकों ने लगाया घोड़े वाला इंजेक्शन, तबीयत बिगड़ी
Digital UP News Desk
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के खेरागढ़ क्षेत्र से दौड़ प्रतियोगिता से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 6 किलोमीटर की दौड़ में बेहतर प्रदर्शन करने और थकान कम महसूस करने के इरादे से दो युवकों ने कथित तौर पर घोड़ों को दिए जाने वाले स्टेरॉयड इंजेक्शन का इस्तेमाल कर लिया। प्रतियोगिता पूरी होने के बाद दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खेरागढ़ ले जाया गया। करीब दो घंटे के उपचार के बाद दोनों की हालत में सुधार बताया गया।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि दोनों युवक सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं और नियमित रूप से दौड़ एवं शारीरिक अभ्यास करते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों के अनुसार, खेल प्रदर्शन बढ़ाने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह किसी दवा या इंजेक्शन का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
क्या है पूरा मामला?
मामला खेरागढ़ क्षेत्र के अऐला गांव का बताया जा रहा है। गुरुवार सुबह करीब सात बजे गांव में मैराथन कमिटी की ओर से 6 किलोमीटर की दौड़ प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में स्थानीय युवाओं ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार भी रखे गए थे।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 2100 रुपये, दूसरे स्थान पर आने वाले को 1100 रुपये और तीसरे स्थान के लिए 551 रुपये का पुरस्कार निर्धारित किया गया था। इसके अलावा शीर्ष दस प्रतिभागियों को मेडल देने की व्यवस्था की गई थी।
इसी प्रतियोगिता में 16 वर्षीय श्यामवीर सिकरवार और 22 वर्षीय गौरव ने भी हिस्सा लिया। दोनों नियमित रूप से दौड़ और शारीरिक अभ्यास करते हैं तथा सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं।
बेहतर प्रदर्शन के लिए लिया इंजेक्शन
जानकारी के मुताबिक, दौड़ से पहले दोनों युवकों ने बेहतर प्रदर्शन करने और थकान कम महसूस करने के उद्देश्य से घोड़ों को दिए जाने वाले स्टेरॉयड इंजेक्शन का इस्तेमाल किया। दोनों ने कथित तौर पर करीब 3 एमएल इंजेक्शन लेने की बात स्वीकार की।
हालांकि, दौड़ पूरी करने के बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें घबराहट और असहजता महसूस हुई, जिसके बाद प्रतियोगिता स्थल पर मौजूद साथियों ने उन्हें सीएचसी खेरागढ़ पहुंचाया।
अस्पताल में दोनों का करीब दो घंटे तक उपचार किया गया। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ। घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर युवा खिलाड़ी या प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागी बिना चिकित्सकीय सलाह ऐसी दवाओं का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं।
प्रतियोगिता में दूसरे और चौथे स्थान पर रहे युवक
बताया गया है कि इंजेक्शन लेने के बावजूद दोनों युवकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। प्रतियोगिता में 16 वर्षीय श्यामवीर सिकरवार दूसरे स्थान पर रहे, जबकि 22 वर्षीय गौरव ने चौथा स्थान हासिल किया।
श्यामवीर 11वीं कक्षा में पढ़ाई करते हैं। उनके पिता किसान हैं। वहीं गौरव स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं और वह भी किसान परिवार से आते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों युवा नियमित तौर पर दौड़ और व्यायाम करते हैं तथा सेना में भर्ती होने के लिए शारीरिक तैयारी कर रहे हैं।
इस घटना ने युवाओं के बीच खेल प्रदर्शन बढ़ाने के लिए अपनाए जाने वाले गलत तरीकों को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है।
आयोजन समिति ने क्या कहा?
दौड़ प्रतियोगिता आयोजित कराने वाली समिति के एक सदस्य के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से समय-समय पर ऐसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
समिति के सदस्य के मुताबिक, गुरुवार को भी 6 किलोमीटर की मैराथन आयोजित की गई थी। दौड़ समाप्त होने के बाद दो प्रतिभागियों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्हें तत्काल सीएचसी खेरागढ़ ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया।
आयोजन समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि प्रतियोगिता में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित या चिकित्सकीय निगरानी के बिना इस्तेमाल की जाने वाली दवा लेने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया गया था।
स्टेरॉयड का इस्तेमाल क्यों हो सकता है खतरनाक?
खेल प्रदर्शन बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड या अन्य प्रदर्शन-वर्धक दवाओं का बिना विशेषज्ञ सलाह इस्तेमाल करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। किसी व्यक्ति के शरीर पर दवा का असर उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, मात्रा और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
खास तौर पर किशोरों के लिए बिना डॉक्टर की सलाह किसी प्रकार की हार्मोनल या प्रदर्शन-वर्धक दवा लेना अधिक चिंताजनक हो सकता है। इसलिए युवाओं को सोशल मीडिया, साथियों या अनधिकृत सलाह के आधार पर किसी इंजेक्शन या दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
दौड़ या अन्य खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए सबसे सुरक्षित तरीका नियमित प्रशिक्षण, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और विशेषज्ञ की देखरेख में फिटनेस तैयारी है।
क्या मामले में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए?
इस घटना के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या युवकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए या मामले को स्वास्थ्य और जागरूकता के नजरिए से देखा जाना चाहिए।
सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि इंजेक्शन वास्तव में कौन-सा था, उसमें कौन-सा पदार्थ मौजूद था और वह किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए संबंधित स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा तथ्यात्मक जांच की जा सकती है।
यदि जांच में सामने आता है कि प्रतिबंधित दवा की अवैध बिक्री, आपूर्ति या किसी व्यक्ति को जानबूझकर गलत तरीके से दवा उपलब्ध कराने का मामला है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है। वहीं, यदि युवकों ने स्वयं किसी स्रोत से दवा लेकर उसका इस्तेमाल किया है, तो उनकी उम्र और पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई का स्वरूप तय किया जाना चाहिए।
खासकर श्यामवीर की उम्र 16 वर्ष बताई गई है। इसलिए नाबालिग से जुड़े किसी भी मामले में कानून के अनुरूप उसकी स्थिति को अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।
आयोजकों की भी होनी चाहिए जिम्मेदारी
खेल प्रतियोगिताओं के आयोजकों की जिम्मेदारी केवल पुरस्कार और दौड़ की व्यवस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए। प्रतिभागियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। बड़ी प्रतियोगिताओं में प्राथमिक चिकित्सा, आपातकालीन सहायता और प्रतिभागियों को प्रतिबंधित प्रदर्शन-वर्धक पदार्थों के इस्तेमाल से बचने के लिए जागरूक करना उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा, प्रतियोगिता शुरू होने से पहले प्रतिभागियों को यह स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि बिना चिकित्सकीय सलाह किसी दवा, इंजेक्शन या सप्लीमेंट का सेवन न करें।
युवाओं के लिए क्या है जरूरी संदेश?
सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच शारीरिक फिटनेस को लेकर काफी मेहनत की जाती है। लंबी दौड़, स्प्रिंट, पुश-अप, सिट-अप और अन्य अभ्यास भर्ती की तैयारी का हिस्सा होते हैं। इस दौरान कुछ युवा जल्दी परिणाम पाने की कोशिश में गलत रास्ता अपना सकते हैं।
हालांकि, किसी भी प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने से ज्यादा महत्वपूर्ण प्रतिभागी का स्वास्थ्य है। कुछ मिनट या कुछ अंकों के बेहतर प्रदर्शन के लिए ऐसा जोखिम लेना उचित नहीं है, जिसका शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञ की सलाह से तैयार किया गया प्रशिक्षण कार्यक्रम, पर्याप्त आराम, पौष्टिक भोजन और सही तकनीक लंबे समय में ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं।
मामले की जांच से सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल इस घटना में सबसे जरूरी बात यह है कि इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन की सही पहचान हो और यह पता लगाया जाए कि वह युवकों तक कैसे पहुंचा। इसके साथ ही यह भी जांच की जानी चाहिए कि क्या अन्य प्रतिभागियों ने भी किसी प्रकार के प्रदर्शन-वर्धक पदार्थ का इस्तेमाल किया था।
यह मामला केवल दो युवकों की तबीयत बिगड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवा खिलाड़ियों और सेना भर्ती की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर जागरूकता की जरूरत भी सामने लाता है।
इसलिए कानूनी कार्रवाई का फैसला जांच के तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। यदि अवैध बिक्री या आपूर्ति सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। वहीं युवाओं को केवल दंडित करने के बजाय उन्हें सुरक्षित प्रशिक्षण और दवा के सही इस्तेमाल के बारे में जागरूक करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

