बिजनौर में पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस; दूसरे गुलदार की सूचना से अभी भी है दहशत
रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा
बिजनौर: जिले के शेरकोट थाना क्षेत्र में पिछले कई दिनों से गांव के आसपास दिखाई दे रहे गुलदार को वन विभाग की टीम ने आखिरकार पिंजरे में कैद कर लिया। गुलदार के पकड़े जाने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, ग्रामीणों ने क्षेत्र में एक और गुलदार दिखाई देने की बात कही है, जिसके बाद वन विभाग की टीम के सामने निगरानी बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है।
यह पूरा मामला थाना शेरकोट क्षेत्र के गांव परमावाला गन्ना सेंटर के पास का बताया जा रहा है। यहां पिछले कई दिनों से ग्रामीणों को गांव और उसके आसपास गुलदार की मौजूदगी दिखाई दे रही थी। लगातार गुलदार नजर आने के कारण ग्रामीणों में चिंता का माहौल बना हुआ था। ऐसे में वन विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में निगरानी शुरू की और गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया।
कई दिनों से गांव के आसपास दिखाई दे रहा था गुलदार
ग्रामीणों के मुताबिक, गुलदार पिछले कुछ दिनों से गांव के आसपास नजर आ रहा था। खेतों और गांव के नजदीक उसकी मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद लोगों में सतर्कता बढ़ गई थी। खासतौर पर ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के काम के दौरान सावधानी बरतनी पड़ रही थी।
हालांकि, गुलदार की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र पर नजर बनाए हुए थी। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए पिंजरे की व्यवस्था की गई। वन विभाग की निगरानी और प्रयासों के बाद गुलदार पिंजरे में कैद हो गया।
वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू
गुलदार के पिंजरे में कैद होने की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए गुलदार का रेस्क्यू किया। वन विभाग की ओर से की गई कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने राहत महसूस की।
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी सामने आने पर सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की होती है। ऐसे मामलों में वन विभाग की टीम निगरानी, पिंजरा लगाने और रेस्क्यू जैसी कार्रवाई करती है।
इस मामले में भी वन विभाग ने ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए कार्रवाई की और गुलदार को सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद किया। इससे गांव के आसपास रहने वाले लोगों को तत्काल राहत मिली है।
ग्रामीणों ने बताई एक और गुलदार की मौजूदगी
गुलदार के पकड़े जाने के बाद जहां ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, वहीं कुछ लोगों ने क्षेत्र में एक और गुलदार देखे जाने की बात कही है। ग्रामीणों के इस दावे के बाद इलाके में वन विभाग की निगरानी और महत्वपूर्ण हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में क्षेत्र में दूसरा गुलदार मौजूद है, तो उसकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जानी चाहिए। इसके लिए वन विभाग की टीम से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की अपेक्षा की जा रही है।
वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खासकर सुबह और शाम के समय खेतों या सुनसान स्थानों की ओर अकेले जाने से बचना और किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देना उपयोगी कदम हो सकता है।
गांव में बढ़ाई जा सकती है निगरानी
गुलदार के रेस्क्यू के बाद अब वन विभाग की प्राथमिकता क्षेत्र में उसकी मौजूदगी से जुड़े अन्य इनपुट की जांच करना हो सकती है। ग्रामीणों द्वारा बताए गए दूसरे गुलदार की जानकारी को ध्यान में रखते हुए आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा सकती है।
इसके अलावा ग्रामीणों को वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने और बिना जानकारी के उनके करीब जाने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी स्थान पर गुलदार या अन्य वन्यजीव दिखाई देता है, तो भीड़ जुटाने के बजाय वन विभाग को सूचना देना अधिक सुरक्षित तरीका है।
ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
कई दिनों से गुलदार दिखाई देने के कारण ग्रामीणों में चिंता बनी हुई थी। ऐसे में वन विभाग की टीम द्वारा गुलदार को पिंजरे में कैद किए जाने के बाद लोगों ने राहत महसूस की। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी लगातार बनी रहेगी और यदि दूसरा गुलदार भी मौजूद है तो उसकी गतिविधियों का पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, शेरकोट थाना क्षेत्र के परमावाला गन्ना सेंटर के पास गुलदार के रेस्क्यू के बाद स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग की कार्रवाई से एक ओर जहां ग्रामीणों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर दूसरे गुलदार की सूचना ने निगरानी की जरूरत को बढ़ा दिया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में वन विभाग की टीम की सक्रियता महत्वपूर्ण रहेगी। ग्रामीणों से भी अपील की जा सकती है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और वन्यजीव से संबंधित किसी भी सूचना की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग को जानकारी दें। इससे लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों का सुरक्षित संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

