बिहार के 14 जिलों में बाढ़, यूपी के 26 जिले प्रभावित-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में मानसून का असर अलग-अलग रूप में देखने को मिल रहा है। बिहार में गंगा, कोसी और गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण 14 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, कई इलाकों में अब पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन बड़ी आबादी अभी भी प्रभावित है। वहीं उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और 26 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में फिलहाल तेज बारिश का दौर थम गया है। राजस्थान में भी बुधवार को अधिकांश इलाकों में मौसम साफ रहा, लेकिन मौसम विभाग ने 11 सितंबर से फिर बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान जताया है। उत्तराखंड के कई जिलों में गुरुवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
बिहार के 14 जिलों में बाढ़, 41 लाख से अधिक लोग प्रभावित
बिहार में बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी पानी जमा हुआ है। राज्य के 14 जिलों की 517 पंचायतों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 41.45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
राज्य की प्रमुख नदियों में शामिल गंगा, कोसी और गंडक का जलस्तर कई स्थानों पर चिंता का कारण बना हुआ है। हालांकि, पटना से मुंगेर तक गंगा के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद भागलपुर के कहलगांव में गंगा का पानी 4 सेंटीमीटर बढ़ा है। इस कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है।
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। राज्य में 5 हजार से अधिक स्कूलों को बंद किया गया है, क्योंकि कई विद्यालय बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
श्मशान घाटों तक पहुंचने में भी परेशानी
बिहार में बाढ़ का असर आम जनजीवन के साथ-साथ दैनिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। नदियों के किनारे स्थित 500 से अधिक श्मशान घाटों में पानी भरने की जानकारी सामने आई है। इसके कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, भागलपुर स्थित तिलकामांझी विश्वविद्यालय परिसर में भी गंगा का पानी पहुंच गया है। यहां शिक्षक और छात्र नाव के माध्यम से आवागमन करने को मजबूर हैं। इससे शैक्षणिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में बाढ़ का असर
उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ा है। प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं और करीब 4 लाख लोग इसके असर में हैं। बाराबंकी में सरयू नदी के बढ़े जलस्तर से कई मकान प्रभावित हुए हैं। करीब 12 मकानों के पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है।
बरेली में भी रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे स्थित एक प्राचीन मंदिर प्रभावित हुआ और उसके नदी में समा जाने की सूचना है। ऐसे हालात में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश के 36 जिलों में गुरुवार को बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें 22 जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। बीते 24 घंटे में प्रदेश के 32 जिलों में औसतन 2.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
प्रदेश में 1 जून से अब तक करीब 651.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा मानसून की निर्धारित बारिश के कोटे के आसपास या उससे अधिक है। हालांकि, अलग-अलग जिलों में बारिश की स्थिति में काफी अंतर देखने को मिल रहा है।
उत्तराखंड में कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड में मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
वहीं हरिद्वार, पौड़ी और उत्तरकाशी में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बौछारें पड़ने की संभावना है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।
मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में गरज के साथ आकाशीय बिजली और तेज बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय मौसम और प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है।
मध्य प्रदेश में थमा तेज बारिश का दौर
मध्य प्रदेश में फिलहाल कोई सक्रिय मौसम प्रणाली नहीं बनी हुई है। इसके चलते प्रदेश में तेज बारिश का दौर रुक गया है। बुधवार को ज्यादातर हिस्सों में दिनभर तेज धूप देखने को मिली। गुरुवार को भी मौसम लगभग इसी तरह रहने का अनुमान है।
हालांकि, कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन फिलहाल तेज बारिश को लेकर कोई बड़ा अलर्ट जारी नहीं किया गया है। मौसम में इस बदलाव के कारण लोगों को बारिश से कुछ राहत मिलने की संभावना है।
राजस्थान में 11 सितंबर से फिर बदलेगा मौसम
राजस्थान में भी बुधवार को अधिकांश शहरों में सुबह से शाम तक धूप रही। प्रदेश के 10 शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान में 11 सितंबर से बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। शुक्रवार को पांच जिलों में तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग के कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है।
इस तरह देखा जाए तो देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज फिलहाल अलग-अलग बना हुआ है। बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति के बीच प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी को राहत पहुंचाने की चुनौती है। वहीं उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी के कारण सतर्कता बढ़ाई गई है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में बारिश से फिलहाल राहत है, जबकि राजस्थान में अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए लोगों के लिए जरूरी है कि वे स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें और नदी, नाले या जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में होने वाले बदलाव के आधार पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

