कानपुर आरटीओ हेल्प डेस्क की खुली पोल, न कर्मचारी मिला न रजिस्टर, आवेदकों की बढ़ी परेशानी
रिपोर्ट- सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर। आरटीओ कार्यालय में आवेदकों को दलालों से बचाने और विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़ी सही जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया हेल्प डेस्क महज कुछ दिनों में ही अव्यवस्था का शिकार होता नजर आ रहा है। बुधवार को आरटीओ कार्यालय में हेल्प डेस्क की स्थिति देखकर व्यवस्था की निगरानी और संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। निर्धारित स्थान पर न तो शिकायत दर्ज करने के लिए रजिस्टर मौजूद था, न कर्मचारी के बैठने के लिए कुर्सी और न ही आवेदकों की सहायता के लिए कोई कर्मचारी दिखाई दिया। स्थिति यह रही कि जिस स्थान पर आवेदकों की मदद के लिए हेल्प डेस्क बनाया गया था, वहां केवल एक कुत्ता बैठा नजर आया।
जन्माष्टमी से पहले शुरू हुआ था हेल्प डेस्क
आरटीओ कार्यालय में आवेदकों की सुविधा के लिए जन्माष्टमी से ठीक पहले बीते गुरुवार को दोबारा हेल्प डेस्क की शुरुआत की गई थी। विभाग की ओर से इसका उद्देश्य स्पष्ट था कि कार्यालय आने वाले लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन संबंधी कार्य, आवेदन प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, शुल्क और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सके।
इसके अलावा हेल्प डेस्क के माध्यम से आवेदकों की शिकायतों और समस्याओं को रजिस्टर में दर्ज करने तथा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाकर उनके समाधान की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई थी। विभागीय स्तर पर इसे महत्वपूर्ण पहल माना गया था, क्योंकि आरटीओ कार्यालयों में अक्सर आवेदकों को प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण इधर-उधर भटकना पड़ता है।
वहीं, दलालों की भूमिका कम करने के लिए भी हेल्प डेस्क को उपयोगी व्यवस्था माना गया था। यदि आवेदकों को विभागीय प्रक्रिया, शुल्क और दस्तावेजों की सही जानकारी सीधे कार्यालय से मिल जाए, तो उन्हें अनधिकृत लोगों की मदद लेने की जरूरत कम हो सकती है।
शुरुआत में दिखी थी व्यवस्था, फिर बदल गया नजारा
हेल्प डेस्क की शुरुआत के बाद शनिवार और सोमवार को स्थिति सामान्य नजर आई थी। इन दिनों हेल्प डेस्क पर कर्मचारी मौजूद मिले थे और शिकायत दर्ज करने के लिए रजिस्टर भी रखा गया था। कार्यालय पहुंचने वाले कुछ आवेदकों की समस्याएं सुनी गईं और संबंधित मामलों में उन्हें जानकारी उपलब्ध कराई गई।
अधिकारियों की ओर से भी हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया गया था। इससे यह उम्मीद जगी थी कि इस बार व्यवस्था को नियमित रूप से संचालित किया जाएगा और आवेदकों को कार्यालय में सहायता के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
हालांकि, बुधवार को स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दी। हेल्प डेस्क के निर्धारित स्थान पर न कर्मचारी मौजूद था और न ही शिकायत दर्ज करने के लिए रजिस्टर दिखाई दिया। इसके साथ ही बैठने की बुनियादी व्यवस्था भी नहीं थी। ऐसे में हेल्प डेस्क की उपयोगिता पर ही सवाल उठने लगे हैं।
डीएल की जानकारी लेने पहुंचे आवेदक को नहीं मिली मदद
गोविंद नगर निवासी शिव सिंह ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित जानकारी लेने के लिए आरटीओ कार्यालय पहुंचे थे। उनका कहना है कि उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद लाइसेंस उनके घर नहीं पहुंचा।
इसी समस्या के संबंध में वह आरटीओ कार्यालय पहुंचे और हेल्प डेस्क से जानकारी लेने का प्रयास किया। उन्हें उम्मीद थी कि यहां मौजूद कर्मचारी उनके आवेदन की स्थिति और लाइसेंस से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध करा देंगे। लेकिन हेल्प डेस्क पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला।
ऐसे में शिव सिंह को अपनी समस्या के समाधान के लिए दूसरे स्थानों पर जानकारी तलाशनी पड़ी। उनके लिए हेल्प डेस्क उस समय किसी काम का साबित नहीं हुआ, जबकि इसी उद्देश्य से यह सुविधा शुरू की गई थी।
सुनीता तिवारी को भी नहीं मिला समाधान
इसी तरह आरटीओ कार्यालय पहुंचीं सुनीता तिवारी को भी हेल्प डेस्क पर कर्मचारी नहीं मिला। वह विभागीय प्रक्रिया और अपनी समस्या के समाधान के लिए कार्यालय आई थीं। लेकिन हेल्प डेस्क खाली होने के कारण उन्हें भी सही जानकारी हासिल करने के लिए इधर-उधर जाना पड़ा।
आवेदकों का कहना है कि यदि हेल्प डेस्क पर कर्मचारी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहेगा, तो कार्यालय में इस सुविधा को शुरू करने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। खासकर उन लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती है, जो पहली बार आरटीओ कार्यालय पहुंचते हैं और उन्हें आवेदन या दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती।
रजिस्टर नहीं तो शिकायत दर्ज कैसे होगी?
हेल्प डेस्क की व्यवस्था में शिकायत रजिस्टर का महत्वपूर्ण स्थान माना गया था। किसी आवेदक की समस्या का तत्काल समाधान न हो पाने की स्थिति में शिकायत को रजिस्टर में दर्ज करके संबंधित अधिकारी या कर्मचारी तक पहुंचाया जा सकता है। इससे शिकायतों का रिकॉर्ड भी तैयार होता है और उनके निस्तारण की निगरानी संभव होती है।
लेकिन बुधवार को हेल्प डेस्क पर रजिस्टर भी मौजूद नहीं मिला। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उस दिन अपनी समस्या लेकर आने वाले आवेदक शिकायत कहां दर्ज कराते? यदि शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था ही उपलब्ध नहीं होगी, तो समस्याओं के निस्तारण की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।
दलालों से बचाने की योजना पर भी सवाल
आरटीओ कार्यालय में हेल्प डेस्क शुरू करने का एक प्रमुख उद्देश्य आवेदकों को विभागीय प्रक्रियाओं की सही जानकारी देकर उन्हें अनधिकृत मदद पर निर्भर होने से बचाना था। सामान्य तौर पर यदि किसी व्यक्ति को यह जानकारी नहीं होती कि किसी काम के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए, कितना शुल्क जमा करना है या आवेदन की प्रक्रिया क्या है, तो वह किसी दूसरे व्यक्ति की सहायता ले सकता है।
ऐसे में हेल्प डेस्क एक पारदर्शी और आधिकारिक सूचना केंद्र की भूमिका निभा सकता है। लेकिन यदि निर्धारित स्थान पर कर्मचारी ही मौजूद न हो, तो आवेदक को फिर से जानकारी के लिए दूसरे लोगों का सहारा लेना पड़ सकता है।
इसलिए हेल्प डेस्क को केवल शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि इसे नियमित रूप से संचालित करना और उसकी निगरानी सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
हेल्प डेस्क शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद सामने आई अव्यवस्था ने इसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत में अधिकारियों ने इसका निरीक्षण किया और व्यवस्था को सक्रिय रखने की कोशिश की थी। इसके बावजूद बुधवार को हेल्प डेस्क पर कर्मचारी और रजिस्टर दोनों का न मिलना यह बताता है कि नियमित निगरानी की जरूरत है।
सवाल यह है कि हेल्प डेस्क पर कर्मचारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या कर्मचारियों की ड्यूटी का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या शिकायत रजिस्टर की प्रतिदिन जांच होती है? और क्या हेल्प डेस्क पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण की कोई मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई गई है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब मिलने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि हेल्प डेस्क को प्रभावी बनाने के लिए विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
व्यवस्था नियमित हुई तो आवेदकों को मिलेगा लाभ
आरटीओ कार्यालय में हेल्प डेस्क की व्यवस्था सही तरीके से संचालित की जाए तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल सकता है। आवेदकों को आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेज, शुल्क और अन्य विभागीय कार्यों की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकती है। साथ ही शिकायतों को दर्ज कर उनके समाधान की निगरानी भी की जा सकती है।
इसके लिए जरूरी है कि हेल्प डेस्क पर निर्धारित कर्मचारी की नियमित मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। वहां बैठने की पर्याप्त व्यवस्था हो, शिकायत रजिस्टर उपलब्ध रहे और आने वाली शिकायतों का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाए।

