यूपी चुनाव 2027: युवाओं-महिलाओं पर बीजेपी का फोकस, योगी सरकार की योजनाओं से साधने की तैयारी
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ-साथ युवा और महिला मतदाताओं पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। पार्टी के सामने जहां महिलाओं के बीच अपने समर्थन को बनाए रखने और मजबूत करने की चुनौती है, वहीं युवा मतदाताओं को अपने साथ जोड़ना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की योजनाओं और नई घोषणाओं के जरिए अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर सरकार का जोर दिखाई दे रहा है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राज्य की करीब 2.91 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की। अयोध्या में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छह जिलों की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में यह घोषणा की गई। इसके अगले दिन राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि बढ़ा हुआ मानदेय सितंबर 2026 से लागू होगा।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं तथा बच्चों से सीधा संपर्क रहता है। ऐसे में सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए मानदेय बढ़ाने की घोषणा को महिला वर्ग तक पहुंच मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने वाराणसी में ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ अभियान की शुरुआत भी की। इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी सहित बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
महिला सुरक्षा बलों में बढ़ी भागीदारी
महिला सशक्तीकरण के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश सरकार सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) में महिलाओं के लिए तीन अलग बटालियनें गठित की गई हैं। इन बटालियनों का नाम उदा देवी, झलकारी बाई और अवंतीबाई के नाम पर रखा गया है।
इनमें एक बटालियन लखनऊ, दूसरी गोरखपुर और तीसरी बदायूं में है। सरकार का तर्क है कि सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से उन्हें रोजगार के अवसर मिलने के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में भी अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा।
दरअसल, बीजेपी लंबे समय से महिला सुरक्षा और महिला कल्याण को अपने राजनीतिक एजेंडे का अहम हिस्सा बनाती रही है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महिला केंद्रित योजनाओं और घोषणाओं पर विशेष जोर पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
50 हजार छात्राओं को स्कूटर देने की घोषणा
महिलाओं के साथ-साथ युवा वर्ग को आकर्षित करने के लिए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई घोषणाएं की हैं। हाल ही में उन्होंने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में पढ़ने वाली 50 हजार छात्राओं को स्कूटर उपलब्ध कराएगी।
इस योजना का उद्देश्य छात्राओं को उच्च शिक्षा जारी रखने में सुविधा देना और उनकी आवाजाही को आसान बनाना बताया जा रहा है। खासतौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों की छात्राओं के लिए परिवहन की सुविधा उच्च शिक्षा तक पहुंच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं, युवाओं के बीच रोजगार को लेकर सरकार ने बड़ा लक्ष्य भी सामने रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देगी। रोजगार और सरकारी नियुक्तियों का मुद्दा युवाओं के बीच काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए सरकार की ओर से रोजगार संबंधी घोषणाओं को युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से कौशल विकास पर जोर
युवा वर्ग को केवल सरकारी नौकरी तक सीमित न रखकर रोजगार योग्य कौशल उपलब्ध कराने पर भी उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस है। इसके लिए ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के तहत 3,000 से अधिक छात्रों को रोजगारोन्मुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 31 प्रशिक्षण संस्थानों को जिम्मेदारी दी गई है। सभी संबंधित प्रशिक्षण केंद्रों पर 30 सितंबर तक प्रशिक्षण शुरू करना अनिवार्य किया गया है।
इस प्रशिक्षण में परिधान निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी-आईटीईएस और प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रदान किए जाने की योजना है। इससे छात्रों को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा।
सामूहिक विवाह योजना से परिवारों तक पहुंच
सरकार की रणनीति केवल कॉलेज जाने वाले युवाओं तक सीमित नहीं है। पारिवारिक जीवन में प्रवेश करने वाले युवाओं और उनके परिवारों को भी सामाजिक कल्याण योजनाओं के जरिए जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत मौजूदा वित्तीय वर्ष में 17,758 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 72,448 जोड़ों के सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य रखा है।
सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विवाह के खर्च में सहायता उपलब्ध कराना है। इसके जरिए सरकार का संपर्क बड़ी संख्या में परिवारों तक पहुंचता है। इसलिए चुनावी दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सरकार ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए स्वयं सहायता समूहों को भी बढ़ावा दे रही है। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण आजीविका मिशन से करीब 10.5 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG) जुड़े होने की बात कही गई है।
सरकार के अनुसार, इन समूहों के माध्यम से करीब 1.25 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया गया है। इनमें 28 लाख से अधिक ‘लखपति दीदियां’ भी शामिल हैं।
इसके अलावा मिशन के तहत 65,544 ग्राम संगठन और 3,298 क्लस्टर लेवल फेडरेशन काम कर रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की तैयारी
इन सरकारी योजनाओं के समानांतर बीजेपी संगठनात्मक स्तर पर भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
चुनाव में बूथ प्रबंधन को बीजेपी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में सरकार की योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाने के साथ-साथ पार्टी संगठन के माध्यम से इन योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है।
युवाओं और महिलाओं पर क्यों है फोकस?
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में युवा और महिला मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि बीजेपी सरकार की मौजूदा रणनीति में रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा, महिला सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि, चुनाव में योजनाओं की घोषणा के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी अहम भूमिका होगी। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, छात्राओं के लिए शिक्षा और परिवहन की सुविधाएं तथा ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के स्थायी साधन आने वाले समय में सरकार की नीतियों के मूल्यांकन का आधार बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बीजेपी की रणनीति दो स्तरों पर आगे बढ़ती नजर आ रही है। एक ओर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर योगी सरकार की योजनाओं और घोषणाओं के जरिए महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण परिवारों तक सीधा संपर्क बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले महीनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि बीजेपी की यह रणनीति चुनावी मैदान में कितना प्रभाव डालती है।

