फतेहपुर जिला अस्पताल में दलाली और लापरवाही के आरोप, पूर्व भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष ने डीएम से की शिकायत
रिपोर्ट- राम चन्द्र सैनी
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला राजकीय चिकित्सालय में कथित अव्यवस्थाओं, मरीजों के इलाज में लापरवाही और अस्पताल परिसर में दलालों की सक्रियता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह राजू ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी फतेहपुर को शिकायती पत्र सौंपा है। उन्होंने अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और कथित अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
संतोष सिंह राजू ने 9 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में कुछ डॉक्टर और कर्मचारी सरकार की स्वास्थ्य संबंधी नीतियों और मरीज हितों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर और उचित उपचार उपलब्ध कराना है, लेकिन जिला अस्पताल में कथित तौर पर मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे मरीज के इलाज में देरी का आरोप
शिकायत पत्र में संतोष सिंह राजू ने एक मामले का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, थाना हुसैनगंज क्षेत्र के किशुनदासपुर निवासी पंकज पुत्र श्रीकृष्ण को गंभीर आपात स्थिति में सदर अस्पताल लाया गया था। आरोप है कि अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों ने मरीज को करीब दो घंटे तक बिना आवश्यक जांच और उपचार के बैठाए रखा।
परिजनों की ओर से इलाज शुरू करने का अनुरोध किए जाने के बावजूद कथित तौर पर तत्काल चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। मरीज की स्थिति को देखते हुए परिजन लगातार अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों से उपचार की मांग करते रहे। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली।
ऐसे में यह मामला अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्राइवेट अस्पताल भेजने के लिए प्रेरित करने का आरोप
शिकायत में जिला अस्पताल परिसर में कथित रूप से सक्रिय दलालों का भी जिक्र किया गया है। संतोष सिंह राजू का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कुछ लोग मरीज के परिजनों को निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए प्रेरित कर रहे थे।
उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे मरीज के परिजनों को यदि निजी अस्पताल जाने के लिए कहा जाता है, तो इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। इसी मामले को लेकर मरीज के परिजनों ने संतोष सिंह राजू से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, इसके बाद वह स्वयं जिला अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया।
संतोष सिंह का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद एक डॉक्टर के साथ उनकी कहासुनी हुई। उन्होंने शिकायत पत्र में दावा किया कि संबंधित डॉक्टर ने मरीज का इलाज नहीं होने की बात कही। हालांकि, इस आरोप पर संबंधित चिकित्सक या अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
डिप्टी सीएमओ के पहुंचने के बाद इलाज शुरू होने का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार, मामले की जानकारी डिप्टी सीएमओ को दी गई। इसके बाद डिप्टी सीएमओ अस्पताल पहुंचे और मरीज को देखने के बाद उपचार की प्रक्रिया शुरू हुई। संतोष सिंह राजू का आरोप है कि डिप्टी सीएमओ के अस्पताल पहुंचने के बाद ही मरीज का इलाज शुरू किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मरीज को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता थी, तो उसे वरिष्ठ अधिकारी के आने का इंतजार क्यों करना पड़ा। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि मरीज को समय पर उपचार क्यों नहीं मिला।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़े होते हैं। ऐसे में उनके लिए सरकारी अस्पताल ही सस्ती और सुलभ चिकित्सा का प्रमुख माध्यम होते हैं। यदि उपचार में देरी या अन्य किसी प्रकार की परेशानी की शिकायत सामने आती है, तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं।
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग
संतोष सिंह राजू ने जिलाधिकारी को दिए पत्र में 8 सितंबर 2026 की शाम करीब आठ बजे ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में मरीज के उपचार में लापरवाही या किसी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने जिला अस्पताल को कथित दलाली से मुक्त कराने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों की ओर भेजने वाले लोगों की गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने, आपातकालीन मामलों में तत्काल उपचार सुनिश्चित करने और अस्पताल परिसर की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल
जिला अस्पताल को लेकर भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष की ओर से जिलाधिकारी को शिकायत दिए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल बढ़ गई है। मामला सत्ताधारी दल से जुड़े रहे नेता की ओर से उठाए जाने के कारण भी चर्चा में है।
अब निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर हैं कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है। यदि मामले की जांच होती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि मरीज को उपचार मिलने में देरी किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल परिसर में दलालों की सक्रियता को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
हालांकि, फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। संबंधित डॉक्टर, जिला अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। खासकर आपातकालीन स्थिति में चिकित्सकीय सहायता में अनावश्यक देरी मरीज और उसके परिवार के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए अस्पताल प्रशासन के लिए जरूरी है कि इमरजेंसी सेवाओं में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट हों और मरीजों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार तत्काल चिकित्सा सुविधा मिले।

