लखीमपुर खीरी में बज्म फरोगे अदब का 25वां तरही मुशायरा संपन्न, मिलाद की महफिल भी सजी

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रिपोर्ट- शरद अवस्थी 

लखीमपुर खीरी। बज्म फरोगे अदब की ओर से आयोजित होने वाले मासिक तरही मुशायरे की कड़ी में 12 रबीउल अव्वल के मुबारक अवसर पर 25वें तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मिलाद की नूरानी महफिल भी सजाई गई। कार्यक्रम में स्थानीय शायरों और नात ख्वानों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से महफिल में समां बांधा। वहीं, उपस्थित लोगों ने धार्मिक और साहित्यिक कार्यक्रम का आनंद लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत कच्ची मस्जिद के इमाम मुस्तफा रजा खान ने तिलावत-ए-कुरान से की। इसके बाद मौलाना असलम रजा ने नूरानी खिताब पेश किया। उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं और उनके जीवन से जुड़े धार्मिक एवं नैतिक संदेशों पर प्रकाश डाला। इसके बाद नातिया कलाम का सिलसिला शुरू हुआ।

महफिल में हस्सान रजा, अल्तमश रजा, फैज रजा, इब्बन खान और वहीद अहमद वाहिदी ने नातिया कलाम पेश किए। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान महफिल में मौजूद लोगों ने ध्यानपूर्वक कार्यक्रम सुना। धार्मिक माहौल के बीच इसके बाद 25वें तरही मुशायरे का दौर शुरू हुआ।

तरही मुशायरे में शायरों ने पेश किया कलाम

तरही मुशायरे में शहर और आसपास के शायरों ने निर्धारित मिसरे पर अपने-अपने अशआर पेश किए। इस दौरान हाफिज अख्तर रजा ने अपने कलाम में कहा—

“फलक पे तारे चमक लुटा कर,
चमन में गुंचे महक लुटा कर,
खुशी को अपनी जता रहे हैं,
हुजूर तशरीफ ला रहे हैं।”

उनके कलाम ने महफिल में मौजूद श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद बज्म फरोगे अदब के सदर आमिर रजा ने अपना कलाम पेश किया। उन्होंने कहा—

“लकब है यासीन ताहा जिनके,
वो सबकी बिगड़ी बना रहे हैं।”

वहीं, नफीस वारसी ने भी अपने अंदाज में शायरी पेश की। उन्होंने कहा—

“नफीस हम ही नहीं वाहिद,
वो सबकी बिगड़ी बना रहे हैं।”

इसके बाद मुशायरे की निजामत कर रहे इलियास चिश्ती ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा—

“जो पढ़ रहे हैं नबी की नातें,
वो अपने कद को बढ़ा रहे हैं।”

मुशायरे में एक के बाद एक शायरों ने अपने कलाम पेश किए और श्रोताओं की सराहना हासिल की। कार्यक्रम में अदब, शायरी और धार्मिक भावनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

डॉ. एहराज अरमान समेत कई शायरों ने पढ़े अशआर

बज्म के सेक्रेटरी डॉ. एहराज अरमान ने अपने कलाम में कहा—

“हलीमा दाई के लाडले को,
फरिश्ते झूला झुला रहे हैं।”

इसके बाद सैफुल इस्लाम ने अपना कलाम पेश किया। उन्होंने कहा—

“कहे मुझे भी सबा ये आकर,
हुजूर तुझको बुला रहे हैं।”

इसी क्रम में अय्यूब अंसारी ने कहा—

“वो हमसे बेहतर सदा रहे हैं,
जो उनके दर के गदा रहे हैं।”

वहीं, आसिफ अंसारी ने अपने कलाम में कहा—

“बुलाते हैं जिसको मेरे आका,
वही मदीने को जा रहे हैं।”

मुशायरे में शायरों की प्रस्तुतियों का सिलसिला आगे भी जारी रहा। वसीक रजा ने अपने अशआर में कहा—

“ब-वक्त-ए-मौलूद सारे कुदसी,
खुशी के नगमात गा रहे हैं।”

इसके बाद उमर हनीफ ने कहा—

“उन्हीं के दर पर बनेगी किस्मत,
वो सबकी बिगड़ी बना रहे हैं।”

वहीं, हसन अंसारी ने अपने कलाम के माध्यम से कहा—

“सभी गदा हैं उन्हीं के दर के,
वो सबकी बिगड़ी बना रहे हैं।”

इस दौरान मुशायरे में मौजूद श्रोताओं ने शायरों की प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भावनाओं और साहित्यिक अभिव्यक्ति का वातावरण बना रहा।

अदब और धार्मिक परंपरा का संगम बना कार्यक्रम

बज्म फरोगे अदब की ओर से आयोजित यह 25वां तरही मुशायरा साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ धार्मिक आयोजन के रूप में भी खास रहा। 12 रबीउल अव्वल के अवसर पर मिलाद की महफिल सजाए जाने से कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया।

तरही मुशायरे की खासियत यह रही कि इसमें शायरों ने एक निर्धारित मिसरे के आधार पर अपने-अपने कलाम प्रस्तुत किए। इस तरह के मुशायरों के माध्यम से शायरी की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर साहित्यिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।

बज्म फरोगे अदब की ओर से लगातार आयोजित किए जा रहे मासिक तरही मुशायरे की यह 25वीं कड़ी थी। इस अवसर पर संस्था से जुड़े सदस्यों और शायरों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में नातिया कलाम से लेकर तरही शायरी तक विभिन्न प्रस्तुतियों ने महफिल को साहित्यिक रंग प्रदान किया।

सलातो सलाम के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में सलातो सलाम पेश किया गया। इसके साथ ही 25वां तरही मुशायरा और मिलाद की महफिल कामयाबी के साथ संपन्न हुई। आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में शामिल हुए सभी शायरों, नात ख्वानों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया गया।

इस आयोजन ने एक बार फिर लखीमपुर खीरी में अदब और शायरी की गतिविधियों को मंच देने में बज्म फरोगे अदब की भूमिका को सामने रखा। संस्था से जुड़े लोगों के मुताबिक, ऐसे आयोजनों के जरिए शायरी और साहित्य से जुड़े लोगों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

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