कंगना रनौत का बड़ा ऐलान, हिमाचल में BJP सरकार बनी तो खोले जाएंगे RSS से जुड़े स्कूल

WhatsApp Image 2026-09-07 at 11.41.26 AM

Digital UP News Desk

हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने शिक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, तो राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की तर्ज पर स्कूल खोलने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। कंगना ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए इस तरह की पहल को महत्वपूर्ण बताया।

कंगना रनौत का यह बयान पश्चिम बंगाल में विद्या भारती के संस्थानों को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ में सामने आया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सामने आए इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी ऐसी योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। उनके मुताबिक, पहाड़ी राज्य में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है।

कंगना रनौत ने यह टिप्पणी मंडी में आयोजित जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद की। बैठक के दौरान जिले के विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। इसी दौरान शिक्षा के क्षेत्र में संस्थानों की भूमिका और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी।

हिमाचल में शिक्षा के विस्तार पर जोर

कंगना रनौत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश भौगोलिक रूप से एक पहाड़ी राज्य है। यहां कई गांव और दूरस्थ क्षेत्र ऐसे हैं जहां शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जाती है। ऐसे में यदि सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं, तो इससे विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है।

उन्होंने RSS को राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठन बताते हुए उसके द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख किया। कंगना के अनुसार, संगठन से जुड़े स्कूलों और अन्य संस्थानों ने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट की परिस्थितियों में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

हालांकि, उनके बयान का मुख्य केंद्र शिक्षा और बच्चों के लिए अवसर बढ़ाने पर रहा। कंगना ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी शहरों में उपलब्ध सुविधाओं के समान अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए स्कूलों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

विद्या भारती संस्थानों का दिया उदाहरण

कंगना रनौत ने पश्चिम बंगाल में सामने आए उस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें राज्य में बड़ी संख्या में विद्या भारती संस्थान स्थापित करने की बात कही गई थी। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी ऐसी पहल को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।

विद्या भारती से जुड़े संस्थान देश के विभिन्न हिस्सों में विद्यालय संचालित करते हैं। इन संस्थानों का उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय संस्कृति से संबंधित मूल्यों को बढ़ावा देना बताया जाता है।

कंगना के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में ऐसे संस्थानों की स्थापना से उन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी फायदा हो सकता है जहां शिक्षा के लिए बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में स्थानीय स्तर पर बेहतर स्कूल उपलब्ध होने से परिवारों को भी सुविधा मिल सकती है।

ग्रामीण बच्चों के लिए बेहतर अवसर की बात

कंगना रनौत ने अपने बयान में शिक्षा के अवसरों को व्यापक बनाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि शिक्षा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राज्य के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध होने चाहिए।

उन्होंने एकलव्य मॉडल स्कूलों का भी जिक्र किया। देश के विभिन्न आदिवासी बहुल क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही कंगना ने NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन और संसाधन मिलना जरूरी है।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सुविधाएं मिलें, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा बड़ी चुनौती

हिमाचल प्रदेश में भौगोलिक परिस्थितियां शिक्षा व्यवस्था के सामने अलग तरह की चुनौतियां पेश करती हैं। कई गांव ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित हैं और वहां तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे क्षेत्रों में स्कूलों की उपलब्धता, शिक्षकों की तैनाती और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय रहा है।

ऐसे में कंगना रनौत की ओर से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्कूलों की जरूरत पर जोर दिया जाना शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर चर्चा को आगे बढ़ाता है। यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई योजना लागू होती है, तो उसके लिए सरकार, स्थानीय प्रशासन और संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।

इसके अलावा, किसी भी नए स्कूल की स्थापना के साथ शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यक्रम, भवन, डिजिटल सुविधाएं, पुस्तकालय और विद्यार्थियों के लिए अन्य आवश्यक संसाधनों पर भी ध्यान देना होगा। तभी ग्रामीण और दूरदराज के विद्यार्थियों को वास्तव में इसका लाभ मिल सकेगा।

बीजेपी सरकार बनने पर लागू करने की बात

कंगना रनौत ने कहा कि यदि हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी की सरकार बनती है, तो इस प्रकार की योजनाओं को राज्य में लागू करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। उनके बयान को हिमाचल में शिक्षा के क्षेत्र में संभावित नीतिगत पहल के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसी योजना के तहत कितने स्कूल खोले जाएंगे, उनका संचालन किस मॉडल पर होगा और इसके लिए कितना बजट निर्धारित किया जाएगा। इन बिंदुओं पर भविष्य में सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से स्पष्ट नीति सामने आने के बाद ही स्थिति साफ होगी।

फिलहाल कंगना का बयान इस बात पर केंद्रित है कि हिमाचल प्रदेश के बच्चों, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर मिलें।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ेगी चर्चा

कंगना रनौत के इस बयान के बाद हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और निजी एवं सामाजिक संगठनों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। एक ओर जहां समर्थक इसे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार की संभावित पहल के रूप में देख सकते हैं, वहीं दूसरी ओर किसी भी ऐसी योजना के प्रभाव का आकलन उसके संचालन, पाठ्यक्रम, वित्तीय व्यवस्था और शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा।

कुल मिलाकर, मंडी सांसद कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के विस्तार को लेकर एक ऐसा विचार सामने रखा है, जिसमें ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नए स्कूल स्थापित करने तथा विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और नीतिगत स्तर पर क्या चर्चा होती है और क्या इसे किसी औपचारिक योजना का रूप दिया जाता है।

You may have missed