UGC NET 2026 री-एग्जाम पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, NTA और केंद्र से मांगा जवाब
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: UGC NET जून 2026 की पुनः परीक्षा यानी री-एग्जाम को लेकर मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। यूजीसी नेट 2026 की अंग्रेजी परीक्षा दोबारा कराने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही परीक्षा शुल्क वापस करने के मुद्दे पर भी अधिकारियों को निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब UGC NET जून 2026 के तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की परीक्षा दोबारा आयोजित करने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है। NTA ने प्रश्नपत्रों में सामने आई विभिन्न प्रकार की त्रुटियों और शिकायतों के बाद इन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा की थी। अब अंग्रेजी विषय की पुनः परीक्षा के फैसले को एक अभ्यर्थी ने अदालत में चुनौती दी है।
क्या है पूरा मामला?
UGC NET जून 2026 की परीक्षा देशभर में 22 जून से 30 जून के बीच 87 विषयों के लिए आयोजित की गई थी। यह परीक्षा जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF), असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पात्रता और पीएचडी प्रवेश से संबंधित पात्रता निर्धारित करने के लिए आयोजित की जाती है। परीक्षा समाप्त होने के बाद कुछ विषयों के प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से शिकायतें सामने आईं।
इन शिकायतों में प्रश्नपत्र में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और भाषा संबंधी समस्याओं के साथ-साथ कुछ पुराने प्रश्नों के दोहराए जाने की बात भी सामने आई। इसके बाद NTA ने मामले की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की।
समिति की समीक्षा के बाद NTA ने अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया। एजेंसी के अनुसार, समीक्षा में प्रश्नपत्रों में कई तरह की समस्याएं सामने आई थीं।
अंग्रेजी परीक्षा के री-एग्जाम को दी गई चुनौती
अंग्रेजी विषय की परीक्षा में शामिल हुईं अभ्यर्थी पारुल श्योराण की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में NTA की ओर से 16 अगस्त को जारी उस सार्वजनिक नोटिस को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए अंग्रेजी विषय की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया था।
याचिका में दावा किया गया है कि परीक्षा दोबारा कराने के फैसले के आधार और उससे संबंधित सामग्री को पर्याप्त रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने इस फैसले को मनमाना और प्रक्रिया की दृष्टि से अनुचित बताया है।
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि पहले आयोजित अंग्रेजी परीक्षा के परिणाम को निर्धारित नियमों के अनुसार स्वीकार करने पर विचार किया जाए। वहीं, यदि दोबारा परीक्षा का फैसला बरकरार रहता है तो पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस करने और री-एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने की मांग भी की गई है।
कोर्ट ने NTA और केंद्र से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल री-एग्जाम के फैसले को रद्द करने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने मामले में केंद्र सरकार और NTA को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। इसका मतलब है कि अब केंद्र और NTA को अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि अंग्रेजी परीक्षा को दोबारा आयोजित करने का निर्णय किन परिस्थितियों और आधारों पर लिया गया।
अदालत ने संबंधित परीक्षा की फीस वापस करने के मुद्दे पर भी अधिकारियों को निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध की गई है।
इस घटनाक्रम के बाद उन अभ्यर्थियों की नजर भी अदालत और NTA के अगले कदम पर रहेगी, जो जून में अंग्रेजी विषय की परीक्षा दे चुके हैं।
तीन विषयों की दोबारा परीक्षा का फैसला
NTA ने जून 2026 की UGC NET परीक्षा के तीन विषयों के लिए री-एग्जाम कराने का फैसला लिया है। इनमें अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र शामिल हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंग्रेजी और कॉमर्स की पुनः परीक्षा 9 सितंबर 2026 को आयोजित की जानी है, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर 2026 को होगी।
इस री-एग्जाम का दायरा केवल संबंधित तीन विषयों तक है। बाकी विषयों के लिए परिणाम प्रक्रिया अलग तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। NTA ने पहले कहा था कि इन तीन विषयों की पुनः परीक्षा का निर्णय बाकी 84 विषयों की परिणाम प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा।
प्रश्नपत्रों में क्या मिली थीं कमियां?
NTA की ओर से गठित समिति की समीक्षा में प्रश्नपत्रों से जुड़ी कई प्रकार की समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इनमें तथ्यात्मक गलतियां, टाइपिंग और वर्तनी संबंधी त्रुटियां, अनुवाद से जुड़ी समस्याएं और प्रश्नों की भाषा में खामियां शामिल थीं।
इसके अलावा कुछ प्रश्नों में व्याकरण संबंधी समस्याओं और शब्दों के इस्तेमाल से जुड़ी आपत्तियां भी सामने आईं। समिति ने कुछ प्रश्नों के पहले आयोजित परीक्षाओं में दोहराए जाने की बात भी दर्ज की थी।
ऐसे मामलों में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता सीधे परीक्षा की निष्पक्षता से जुड़ जाती है। यही वजह है कि NTA ने विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद संबंधित तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया।
अभ्यर्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कोर्ट का फैसला?
UGC NET देश की प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाओं में शामिल है। इस परीक्षा का परिणाम हजारों अभ्यर्थियों के शैक्षणिक और करियर संबंधी फैसलों को प्रभावित करता है। इसलिए परीक्षा के आयोजन, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और परिणाम प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
अंग्रेजी विषय की परीक्षा दोबारा कराने के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद अब उम्मीदवारों की नजर अदालत की कार्यवाही पर है। हालांकि, जब तक अदालत की ओर से कोई अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक री-एग्जाम को लेकर NTA की घोषित प्रक्रिया लागू रहेगी।
इसलिए अभ्यर्थियों को सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं के बजाय NTA और अदालत से संबंधित आधिकारिक अपडेट पर ध्यान देना चाहिए।
फीस रिफंड का मुद्दा भी अहम
इस पूरे मामले में परीक्षा शुल्क का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। जिन अभ्यर्थियों ने पहले ही UGC NET अंग्रेजी परीक्षा के लिए शुल्क जमा किया और परीक्षा दी, उनके लिए दोबारा परीक्षा आयोजित होने की स्थिति में फीस को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी अधिकारियों को संबंधित परीक्षा शुल्क वापस करने के मुद्दे पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में NTA और केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में केंद्र सरकार और NTA को दिल्ली हाईकोर्ट के सामने अपना जवाब रखना है। इसके बाद अदालत याचिका में उठाए गए मुद्दों और सरकार तथा NTA के पक्ष पर विचार करेगी।
फिलहाल अदालत ने री-एग्जाम के फैसले को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए अभ्यर्थियों के लिए यह समझना जरूरी है कि कोर्ट द्वारा नोटिस जारी करना अंतिम फैसला नहीं होता। आगे की सुनवाई में मामले की दिशा और अधिक स्पष्ट होगी।
वहीं, निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अंग्रेजी और कॉमर्स की परीक्षा 9 सितंबर तथा समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को होने वाली है।
कुल मिलाकर, UGC NET 2026 री-एग्जाम विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और NTA से जवाब मांगा है और परीक्षा शुल्क के मुद्दे पर भी निर्णय लेने को कहा है। दूसरी ओर, NTA ने प्रश्नपत्रों में सामने आई विभिन्न त्रुटियों के आधार पर तीन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है।
अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और NTA तथा केंद्र सरकार के जवाब पर रहेगी। अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण यही है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और परीक्षा से जुड़े किसी भी नए आदेश या बदलाव की जानकारी संबंधित आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें।

