उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुवाहाटी में गीतानगर कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह में लिया भाग
गुवाहाटी। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को गुवाहाटी स्थित गीतानगर कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कॉलेज के नए शैक्षणिक भवन का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा के महत्व, युवाओं की भूमिका और पूर्वोत्तर के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
गीतानगर कॉलेज, जिसे पहले कन्या महाविद्यालय के नाम से जाना जाता था, ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पांच दशकों की अपनी यात्रा पूरी की है। उपराष्ट्रपति ने संस्थान को स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कॉलेज ने असम के शैक्षिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेष रूप से युवा महिलाओं को शिक्षा, ज्ञान और आत्मविश्वास प्रदान करने में संस्थान की भूमिका उल्लेखनीय रही है।
शिक्षा से सशक्त हो रही युवा पीढ़ी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के निर्माण का भी महत्वपूर्ण आधार है। उनके अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को बेहतर करियर के लिए तैयार करने के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़ें।
उन्होंने कहा कि आज के युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। बदलती तकनीक और वैश्विक अर्थव्यवस्था के दौर में युवाओं के सामने नए अवसर तेजी से खुल रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में युवा अपनी प्रतिभा और नवाचार के माध्यम से देश को नई दिशा दे सकते हैं।
इसलिए, विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक बनने पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से समय, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर सोच-समझकर निर्णय लेने का आह्वान किया।
असम की सांस्कृतिक विरासत को बताया विशिष्ट
उपराष्ट्रपति ने असम को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की भूमि बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के व्यापक स्वरूप में राज्य का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। असम की भाषाएं, साहित्य, संगीत, नृत्य, रंगमंच और स्थानीय परंपराएं देश की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध करती हैं।
उन्होंने महान असमिया योद्धा लाचित बरफुकन की वीरता और देशभक्ति को भी याद किया। उन्होंने कहा कि लाचित बरफुकन की विरासत असम के साहस और अपनी संस्कृति एवं धरोहर की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनकी जीवनगाथा आज की युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और विशेष रूप से युवाओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
पूर्वोत्तर के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्वोत्तर भारत के विकास को दी जा रही प्राथमिकता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने असम की प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के पास समृद्ध प्राकृतिक संसाधन, विशाल वन क्षेत्र और विश्व प्रसिद्ध चाय उद्योग है। इन संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ असम आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि असम वर्तमान समय में प्रगति और परिवर्तन के उल्लेखनीय दौर से गुजर रहा है। राज्य में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में निवेश से विकास की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व की सराहना
उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम में हो रहे विकास कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है और असम तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से चाय बागान समुदायों के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बुनियादी ढांचे, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे निवेश को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
उनके अनुसार, किसी भी राज्य का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। इसके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
छात्रों को दिलाई ‘नशे का त्याग’ करने की शपथ
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने छात्रों और उपस्थित लोगों को ‘नशे का त्याग’ करने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने युवाओं से नशीले पदार्थों से दूर रहने और अपने मित्रों एवं आसपास के लोगों को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि युवावस्था जीवन का महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान लिए गए निर्णय व्यक्ति के भविष्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए युवाओं को अपने स्वास्थ्य और करियर के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और जागरूक युवा ही विकसित भारत के निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
विकसित भारत में युवाओं की अहम भूमिका
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी देश की विशेष ताकत है।
तकनीक के तेजी से बदलते दौर में युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि नए विचारों, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ें।
कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति रहे मौजूद
गीतानगर कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह में असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री नारायण कोंवर, गीतानगर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत कलिता सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
इससे पहले गुवाहाटी स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उपराष्ट्रपति का स्वागत राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने किया।

