BHU में पद्मश्री डॉ. टीके लाहिड़ी से कथित मारपीट का मामला, FIR में देरी पर उठे सवाल
रिपोर्ट- धर्मेंद्र पाण्डेय
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा संस्थान से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल परिसर में ही उनके विभाग से जुड़े चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने उनके साथ कथित तौर पर हाथापाई की।
घटना के बाद शिकायत किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, आरोप है कि घटना के करीब एक सप्ताह बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। ऐसे में पीड़ित पक्ष की ओर से मामले में जल्द कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
BHU अस्पताल परिसर में घटना का आरोप
जानकारी के अनुसार, कथित घटना काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अस्पताल परिसर में हुई। यहां चिकित्सा सेवाओं से जुड़े दोनों चिकित्सकों के बीच किसी विवाद के बाद हाथापाई होने का आरोप लगाया गया है। इस दौरान वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने की बात कही जा रही है।
घटना के बाद से यह मामला अस्पताल और विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बना हुआ है। खास तौर पर इसलिए भी कि डॉ. टीके लाहिड़ी चिकित्सा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और उन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान प्राप्त हो चुका है।
हालांकि, घटना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वरिष्ठ चिकित्सक की शिकायत के बाद FIR में देरी का आरोप
मामले में सबसे प्रमुख सवाल प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि घटना के बाद संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई।
शिकायत के बाद सामान्य तौर पर पुलिस घटनास्थल से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इनमें अस्पताल परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग, घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान और अन्य संबंधित साक्ष्य शामिल हो सकते हैं।
ऐसे में शिकायत के बावजूद कार्रवाई में कथित देरी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, FIR दर्ज करने में देरी के पीछे क्या कारण रहे, इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
BHU प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। आरोप लगाया जा रहा है कि घटना के बाद आरोपी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, कुछ लोगों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले सही या अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए मामले में सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
BHU प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक क्या आंतरिक कार्रवाई की गई है, क्या कोई जांच समिति गठित की गई है और पुलिस को किस स्तर पर सूचना दी गई है, इन सवालों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
चिकित्सा संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता
घटना ने चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों के बीच अनुशासन और कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर भी बहस शुरू कर दी है। अस्पताल ऐसा स्थान है जहां चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की सेवा के लिए काम करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार के विवाद को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाने की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी चिकित्सा संस्थान में चिकित्सकों के बीच विवाद उत्पन्न होता है तो उसे संस्थागत नियमों और निर्धारित शिकायत प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए। इससे न केवल संबंधित पक्षों को न्याय मिल सकता है, बल्कि अस्पताल के कामकाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से रोका जा सकता है।
इसके अलावा, अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना भी जरूरी है। CCTV निगरानी, शिकायतों के लिए स्पष्ट व्यवस्था और विवाद की स्थिति में तत्काल हस्तक्षेप जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामले को लेकर अब निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। मांग की जा रही है कि घटना से संबंधित सभी तथ्यों को सामने लाया जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाए।
यदि अस्पताल परिसर में CCTV कैमरे लगे हैं तो घटना के समय की रिकॉर्डिंग की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके साथ ही घटना के समय मौजूद चिकित्सकों, कर्मचारियों और अन्य लोगों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
इसी तरह, यदि किसी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दी गई है तो उसकी जांच कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की जा रही है। जांच के आधार पर यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस की कार्रवाई पर टिकी नजर
अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। सबसे अहम सवाल यही है कि शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की जाती है या नहीं और मामले की जांच किस स्तर पर आगे बढ़ती है।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन के स्तर से भी किसी आंतरिक जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी सामने आती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों और जांच की स्थिति का इंतजार किया जा रहा है।

