एशियाई-प्रशांत डाक संघःडॉ. विनय प्रकाश सिंह लगातार दूसरी बार एपीपीयू के महासचिव चुने गए

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Digital UP News Desk

बैंकॉक। भारतीय डाक सेवा के 1988 बैच के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. विनय प्रकाश सिंह को एशियाई-प्रशांत डाक संघ (एपीपीयू) के महासचिव के रूप में लगातार दूसरी बार चार वर्ष के कार्यकाल के लिए पुनः निर्वाचित किया गया है। 4 सितंबर 2026 को बैंकॉक में आयोजित 14वें एपीपीयू सम्मेलन में उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। उनका पुनर्निर्वाचन एशिया-प्रशांत क्षेत्र के डाक प्रशासनों द्वारा उनके नेतृत्व, अनुभव और कार्यक्षमता में व्यक्त विश्वास का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

डॉ. विनय प्रकाश सिंह का दूसरा कार्यकाल जनवरी 2027 से दिसंबर 2030 तक रहेगा। इस दौरान वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डाक सहयोग को और मजबूत करने, सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा बदलते तकनीकी और डिजिटल दौर के अनुरूप डाक सेवाओं के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को मिली मान्यता

डॉ. सिंह का लगातार दूसरी बार एपीपीयू महासचिव चुना जाना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय डाक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और योगदान की भी महत्वपूर्ण मान्यता है। एपीपीयू के सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति से हुआ उनका पुनर्निर्वाचन इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय डाक प्रशासन उनके नेतृत्व और अनुभव को महत्व देते हैं।

वर्तमान समय में डाक सेवाएं केवल पत्र और पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल तकनीक, ई-कॉमर्स, सीमा पार व्यापार, वित्तीय सेवाओं और नागरिक सेवाओं के विस्तार के साथ डाक क्षेत्र का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे में एशिया-प्रशांत जैसे विशाल और विविध क्षेत्र में डाक सहयोग को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इसी संदर्भ में डॉ. सिंह का दूसरा कार्यकाल सदस्य देशों के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित करने और क्षेत्रीय डाक प्रणालियों को अधिक आधुनिक, प्रभावी तथा तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

32 सदस्य देशों का अंतर-सरकारी संगठन है एपीपीयू

एशियाई-प्रशांत डाक संघ, जिसे एपीपीयू के नाम से जाना जाता है, बैंकॉक में मुख्यालय वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 32 सदस्य देश शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय स्तर पर डाक प्रशासन के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देने का कार्य करता है।

एपीपीयू, डाक क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) के क्षेत्रीय संघ के रूप में भी कार्य करता है। इस कारण एपीपीयू की भूमिका क्षेत्रीय डाक नीतियों और सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय डाक व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है।

सदस्य देशों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और डाक सेवाओं के विकास जैसे विषय संगठन की गतिविधियों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसलिए महासचिव का पद क्षेत्रीय डाक सहयोग को दिशा देने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

2023 में संभाली थी पहली बार जिम्मेदारी

डॉ. विनय प्रकाश सिंह ने वर्ष 2022 में आयोजित 13वें एपीपीयू कांग्रेस में पहली बार महासचिव पद के लिए चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने जनवरी 2023 में एपीपीयू महासचिव के रूप में कार्यभार संभाला।

अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदस्य देशों के डाक प्रशासनों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और क्षेत्र में डाक सेवाओं के विकास एवं आधुनिकीकरण की दिशा में काम किया। उनके नेतृत्व में क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और साझा प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ने के प्रयास किए गए।

अब लगातार दूसरी बार निर्विरोध चुने जाने के बाद उन्हें अगले चार वर्षों तक इन प्रयासों को और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। यह पुनर्निर्वाचन उनके पहले कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों और क्षेत्रीय डाक प्रशासनों के साथ उनके समन्वय में विश्वास को भी दर्शाता है।

तीन दशक से अधिक का प्रशासनिक अनुभव

डॉ. विनय प्रकाश सिंह के पास भारत सरकार और विभिन्न संस्थानों में तीन दशकों से अधिक का प्रशासनिक एवं पेशेवर अनुभव है। उन्होंने भारतीय डाक विभाग में कई महत्वपूर्ण और वरिष्ठ पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

अपने करियर के दौरान वह डाक सेवा बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने डाक विभाग में वरिष्ठ उप महानिदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाली हैं।

वह उत्तर प्रदेश डाक परिमंडल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल भी रह चुके हैं। इसके साथ ही इंडिया पोस्ट मुख्यालय में मुख्य महाप्रबंधक के पद पर भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई है। इन पदों पर कार्य करने के दौरान उन्हें डाक प्रशासन, संगठनात्मक प्रबंधन और सेवा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।

उनका अनुभव केवल डाक विभाग तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और सेना डाक सेवा कोर में भी कार्य किया है। विभिन्न संस्थानों में मिली इन जिम्मेदारियों ने उनके प्रशासनिक और अंतरराष्ट्रीय अनुभव को और व्यापक बनाया।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट उपलब्धियां

डॉ. सिंह का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) से प्रबंधन में पीएचडी की उपाधि हासिल की।

प्रशासनिक अनुभव और उच्च शिक्षा का यह संयोजन उन्हें डाक क्षेत्र की नीतिगत एवं प्रबंधकीय चुनौतियों को समझने में विशेष रूप से सक्षम बनाता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाक सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर उनका अनुभव उपयोगी साबित हो रहा है।

डिजिटल दौर में डाक सेवाओं के आधुनिकीकरण पर जोर

आज डाक विभाग और डाक प्रशासन के सामने पारंपरिक सेवाओं को बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप ढालने की चुनौती भी है। ई-कॉमर्स के विस्तार के कारण पार्सल और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की भूमिका बढ़ी है। वहीं, डिजिटल संचार के कारण पारंपरिक पत्र सेवाओं के स्वरूप में बदलाव आया है।

ऐसे समय में एपीपीयू के महासचिव के रूप में डॉ. सिंह का दूसरा कार्यकाल क्षेत्रीय डाक प्रणालियों में तकनीकी सहयोग, नवाचार और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है। साथ ही, सदस्य देशों के बीच साझा अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान भी डाक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।

भारत के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि

डॉ. विनय प्रकाश सिंह का पुनर्निर्वाचन भारत के लिए भी गौरव का विषय है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत का डाक नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े डाक नेटवर्कों में शामिल है। ऐसे में भारतीय डाक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी का लगातार दूसरी बार क्षेत्रीय संगठन का महासचिव चुना जाना अंतरराष्ट्रीय डाक सहयोग में भारत की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करता है।

इसके अलावा, यह उपलब्धि भारतीय अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में उनके योगदान की स्वीकार्यता को भी दर्शाती है। उनके नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय डाक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी विशेषज्ञता और अनुभव साझा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जनवरी 2027 से शुरू होगा दूसरा कार्यकाल

14वें एपीपीयू सम्मेलन में निर्विरोध पुनर्निर्वाचन के बाद डॉ. विनय प्रकाश सिंह का दूसरा कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होकर दिसंबर 2030 तक चलेगा। इस अवधि में उनके सामने क्षेत्रीय डाक सहयोग को और मजबूत करने तथा सदस्य देशों की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

डाक विभाग ने डॉ. विनय प्रकाश सिंह को उनके पुनर्निर्वाचन पर बधाई दी है और एशियाई-प्रशांत डाक संघ के महासचिव के रूप में उनके दूसरे कार्यकाल के सफल एवं प्रभावशाली रहने की कामना की है।

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