आंखों की रोशनी गई, लेकिन शिक्षा का प्रकाश नहीं थमा; पढ़िए इटावा के शिक्षक प्रकाश सोनी की प्रेरक कहानी

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रिपोर्ट – रोहित सिंह चौहान 

इटावा/लखना: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ऐतिहासिक लखना कस्बे में एक ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी आंखों की रोशनी भले ही वर्षों पहले चली गई, लेकिन शिक्षा के प्रति उनका समर्पण आज भी हजारों विद्यार्थियों के जीवन में उजाला भर रहा है। प्रकाश सोनी नाम के इस शिक्षक की कहानी संघर्ष, संकल्प और आत्मविश्वास की मिसाल है। नेत्रहीन होने के बावजूद वह जिस आत्मविश्वास के साथ बच्चों को पढ़ाते हैं, वह विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

प्रकाश सोनी लखना देहात में रॉयल हैप्पी किड्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल संचालित करते हैं। वह स्वयं इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं और कानपुर से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की है। हालांकि, जीवन ने उनके सामने एक ऐसी चुनौती रखी, जिसने उनकी पूरी दिशा बदल दी। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना माध्यम बनाकर आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

1992 में छिन गई आंखों की रोशनी

प्रकाश सोनी की पत्नी और स्कूल की प्रधानाचार्य विजयलक्ष्मी के अनुसार, जब प्रकाश सोनी करीब 20 वर्ष के थे, तभी उनकी आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी थी। चिकित्सकीय उपचार के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में रेटिना के अपनी जगह से खिसकने के कारण उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई।

परिवार ने बेहतर इलाज के लिए चेन्नई स्थित शंकर नेत्रालय अस्पताल में भी उपचार कराया, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकी। 2 मई 1992 का दिन उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। उस समय उनके सामने भविष्य को लेकर कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने खुद को परिस्थितियों तक सीमित नहीं होने दिया।

इसके बाद उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और शिक्षा के क्षेत्र को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। धीरे-धीरे उन्होंने शिक्षण कार्य शुरू किया और आज वह विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।

ब्लैक बोर्ड पर लिखावट देखकर चौंक जाते हैं विद्यार्थी

प्रकाश सोनी की सबसे खास बात यह है कि आंखों की रोशनी न होने के बावजूद वह ब्लैक बोर्ड पर बेहद सुंदर और स्पष्ट लिखते हैं। उनकी लिखावट देखकर पहली बार मिलने वाला व्यक्ति सहज ही आश्चर्यचकित हो जाता है। विद्यार्थियों के लिए यह किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

वहीं, उनका पढ़ाने का तरीका भी छात्रों को काफी पसंद आता है। वह विषय को सरल तरीके से समझाने पर जोर देते हैं, ताकि विद्यार्थी उसे आसानी से समझ सकें और लंबे समय तक याद रख सकें। यही कारण है कि स्कूल के छात्र-छात्राओं के बीच प्रकाश सोनी की अपनी अलग पहचान बनी हुई है।

उनकी कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि प्रकाश सर जिस तरीके से विषय समझाते हैं, वह सीधे मन और दिमाग में बैठ जाता है। यही वजह है कि कई अभिभावक अपने बच्चों को उनके स्कूल में पढ़ाना गर्व की बात मानते हैं।

कई शिष्य संभाल रहे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

प्रकाश सोनी का शिक्षण कार्य केवल स्कूल की कक्षा तक सीमित नहीं है। उनके पढ़ाए हुए कई विद्यार्थी आज अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनके शिष्यों में एसडीएम, डिप्टी एसपी, इंजीनियर समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग शामिल बताए जाते हैं।

इस उपलब्धि को प्रकाश सोनी अपने लिए सबसे बड़ी सफलता मानते हैं। उनके लिए किसी विद्यार्थी का आगे बढ़ना ही शिक्षक के जीवन की वास्तविक उपलब्धि है। उन्होंने जिस प्रकार अपने संघर्ष को शिक्षा के माध्यम में बदला, उसी प्रकार उनके विद्यार्थी भी उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़कर समाज में अपनी पहचान बना रहे हैं।

पत्नी भी स्कूल संचालन में निभाती हैं महत्वपूर्ण भूमिका

प्रकाश सोनी की पत्नी विजयलक्ष्मी स्कूल की प्रधानाचार्य हैं। वह बताती हैं कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रकाश के सामने एक उज्ज्वल करियर था, लेकिन आंखों की रोशनी जाने के बाद जीवन पूरी तरह बदल गया। इसके बावजूद उन्होंने निराश होने के बजाय खुद को शिक्षा के क्षेत्र से जोड़ लिया।

विजयलक्ष्मी के मुताबिक, प्रकाश सोनी में शुरू से ही कुछ कर गुजरने की इच्छा रही है। इसी सोच ने उन्हें शिक्षण कार्य की ओर प्रेरित किया। आज वह लगातार बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं और विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

सहकर्मी और विद्यार्थी मानते हैं प्रेरणास्रोत

स्कूल के शिक्षक स्वदेश कुमार का कहना है कि प्रकाश सोनी नेत्रहीन होने के बावजूद जिस लगन और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाते हैं, वह सभी के लिए प्रेरणादायक है। उनकी मेहनत और शिक्षण शैली ने उन्हें विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच विशेष सम्मान दिलाया है।

वहीं, छात्रा पल्लवी का कहना है कि प्रकाश सर जैसा पढ़ाने वाला शिक्षक मिलना आसान नहीं है। वह जिस तरीके से किसी विषय को समझाते हैं, वह एक बार में ही समझ में आ जाता है और लंबे समय तक याद रहता है।

प्रकाश सोनी लेखक जॉन मिल्टन की रचना ‘इन हिज ब्लाइंडनेस’ को अपनी पसंदीदा रचना बताते हैं। संयोग से उनकी अपनी जिंदगी भी संघर्ष और आत्मविश्वास की ऐसी कहानी है, जो बताती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की प्रतिभा और इच्छाशक्ति को रोक नहीं सकतीं।

आज प्रकाश सोनी अपने नाम के अनुरूप शिक्षा का ऐसा ‘प्रकाश’ फैला रहे हैं, जिसकी रोशनी उनके विद्यार्थियों के माध्यम से आगे बढ़ रही है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इच्छाशक्ति, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ व्यक्ति अपने लिए नई राह बना सकता है। आंखों की रोशनी खोने के बाद भी प्रकाश सोनी ने शिक्षा की मशाल को थामे रखा और अपने विद्यार्थियों के भविष्य को रोशन करने का काम जारी रखा है।

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