शिक्षक दिवस 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से किया सम्मानित
Digital UP News Desk
नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर में शिक्षकों के योगदान और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मानित किया गया। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि देश के विकास में शैक्षणिक उत्कृष्टता, कौशल विकास और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में समान अवसर उपलब्ध कराने और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे संविधान में निहित ‘अवसर की समानता’ के आदर्श को वास्तविक रूप देने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
शिक्षा से समान अवसर का सपना होगा साकार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि देश में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में शिक्षकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर के नगण्य स्तर तक पहुंचने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और इसके लिए देशभर के शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि स्कूल में शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की जिम्मेदारी नहीं निभाते, बल्कि वे बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक शिक्षक विद्यार्थी को विषय का ज्ञान देने के साथ-साथ उसे अनुशासन, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों की सीख भी देता है।
राष्ट्रपति के मुताबिक, स्कूली शिक्षा पूरी शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद है। यही वह चरण है जहां बच्चों के भीतर सीखने की आदत और जीवन के प्रति दृष्टिकोण विकसित होता है। इसलिए शुरुआती कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
बचपन में नैतिक शिक्षा का महत्व
राष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान और कौशल जीवन के किसी भी चरण में हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बचपन में दिए गए संस्कार और सदाचार की शिक्षा का प्रभाव अधिक गहरा होता है। इसलिए प्राथमिक और प्रारंभिक कक्षाओं में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को बचपन से ही सही मूल्यों, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की शिक्षा दी जाए तो वे भविष्य में बेहतर विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठ नागरिक भी बन सकते हैं। इस दिशा में शिक्षक अपनी निष्ठा और समर्पण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को तैयार कर सकते हैं।
इसके साथ ही राष्ट्रपति ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चा अलग परिस्थितियों और क्षमताओं के साथ स्कूल आता है। ऐसे में शिक्षक का दायित्व केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे की व्यक्तिगत जरूरत को समझना भी है।
कमजोर और संकोची विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाना जरूरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों की अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के अनेक विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो अपने परिवार में पहली पीढ़ी के विद्यार्थी होते हैं।
इसी तरह कुछ विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य स्कूलों से निकलकर शहरों के बड़े स्कूलों में पहुंचते हैं। ऐसे बदलाव के कारण कई बार उनमें आत्मविश्वास की कमी दिखाई दे सकती है। वहीं, कुछ बच्चे स्वभाव से संकोची होते हैं, जबकि कुछ अत्यंत प्रतिभाशाली होने के बावजूद अपनी क्षमता पर भरोसा नहीं कर पाते।
इसके अलावा कुछ विद्यार्थियों को विशेष जरूरतों के कारण अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता होती है। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे सभी बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना शिक्षकों की विशेष जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक यदि विद्यार्थियों की क्षमता को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करें तो उनमें मौजूद प्रतिभा को बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों का व्यक्तिगत विकास होगा, बल्कि देश को भी प्रतिभाशाली और सक्षम नागरिक मिलेंगे।
भारत को ज्ञान और कौशल की महाशक्ति बनाने पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत के सामने विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत को ज्ञान की महाशक्ति के साथ-साथ विश्व के कौशल केंद्र के रूप में स्थापित करना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए शिक्षा व्यवस्था को बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना होगा।
आज के समय में विद्यार्थियों के लिए केवल पारंपरिक शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी कौशल, रचनात्मक सोच और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका पहले की तुलना में और व्यापक हो गई है।
राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा और कौशल के बेहतर समन्वय से युवा रोजगार के अवसर तलाशने के साथ-साथ नए उद्यम शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।
विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सभी नागरिक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था का होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था पर आधारित होती है। बेहतर शिक्षा से नागरिकों में ज्ञान, कौशल और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। यही गुण किसी देश को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
राष्ट्रपति ने शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की ‘प्राण-वायु’ बताते हुए कहा कि शिक्षकों के समर्पण और प्रयासों के बिना शिक्षा व्यवस्था अपने उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि देश का प्रयास होना चाहिए कि कोई भी विद्यार्थी अच्छी शिक्षा के अवसर से वंचित न रहे। आर्थिक, सामाजिक, भौगोलिक या व्यक्तिगत परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।
शिक्षकों से ज्ञान के साथ संवेदनशीलता विकसित करने की अपील
राष्ट्रपति ने कहा कि एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहता। शिक्षक अपने व्यवहार, विचार और कार्यशैली के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेरित करते हैं। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का संचार करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों के स्नेह और समर्पण को शिक्षा की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया। जब विद्यार्थी को यह महसूस होता है कि शिक्षक उसकी क्षमता और भविष्य को लेकर गंभीर है, तो उसके भीतर सीखने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मजबूत होता है।
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने उनके योगदान को देश के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षक न केवल अपने विद्यालय बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार से शिक्षकों का बढ़ा सम्मान
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित यह समारोह देश में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करने का महत्वपूर्ण अवसर रहा। राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के साथ-साथ यह संदेश भी दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

