RLD-BJP गठबंधन में बयानबाजी को लेकर बढ़ी तल्खी, जाट-किसान मुद्दे पर जिला अध्यक्ष ने जताई नाराजगी

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रिपोर्ट- योगेश भारद्वाज

मथुरा: राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन के बीच नेताओं की बयानबाजी को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं। हाल ही में कैबिनेट मंत्री एवं गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी की ओर से किसानों और जाट समाज को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर राष्ट्रीय लोक दल के जिला अध्यक्ष प्रीतम प्रमुख ने आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं को एक-दूसरे के समर्थकों और सामाजिक समूहों को लेकर संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रीतम प्रमुख ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से गठबंधन में शामिल दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच असहज स्थिति पैदा हो सकती है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय लोक दल लंबे समय से किसानों, कामगारों, गरीबों और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े लोगों की आवाज उठाने वाली पार्टी के रूप में अपनी राजनीति करती रही है। इसलिए किसानों और जाट समाज से जुड़े किसी भी बयान को पार्टी कार्यकर्ता गंभीरता से लेते हैं।

बयानबाजी से कार्यकर्ताओं में असंतोष का दावा

RLD जिला अध्यक्ष प्रीतम प्रमुख के मुताबिक, गठबंधन की सफलता के लिए दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी सम्मान और समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन के किसी घटक दल के नेता दूसरे दल के परंपरागत समर्थक वर्ग को लेकर ऐसी टिप्पणी करते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं की भावनाएं प्रभावित हों, तो इससे संगठनात्मक स्तर पर असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता गठबंधन के राजनीतिक उद्देश्य को समझते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी भी मुद्दे पर एक-दूसरे के समर्थक वर्ग के खिलाफ बयानबाजी की जाए। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में शीर्ष नेतृत्व को भी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर दोनों दलों के बीच समन्वय बना रहे।

लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का भी किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रीतम प्रमुख ने पिछले लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों को सामने रखते हुए गठबंधन की राजनीति और चुनावी प्रदर्शन पर अपनी बात रखी।

हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों की आधिकारिक चुनावी आंकड़ों से अलग-अलग तरीके से व्याख्या की जा सकती है। इसलिए चुनावी प्रदर्शन को समझने के लिए निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों को आधार माना जाना अधिक उचित होगा।

प्रीतम प्रमुख ने कहा कि RLD ने गठबंधन के तहत जिन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, वहां पार्टी ने अपनी दोनों सीटों पर जीत दर्ज की। उनके मुताबिक, इससे यह संदेश गया कि पार्टी का जमीनी संगठन और किसान एवं ग्रामीण मतदाताओं के बीच उसकी पकड़ अभी भी महत्वपूर्ण है।

छाता चीनी मिल का मुद्दा भी उठाया

RLD जिला अध्यक्ष ने छाता चीनी मिल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि गन्ना विकास मंत्री होने के बावजूद छाता शुगर मिल को लेकर अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हो पाई है। उनके मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गन्ना किसान और चीनी मिलों से जुड़े मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उसका असर दिखाई देना चाहिए। विशेष रूप से गन्ना किसानों के लिए चीनी मिलों का संचालन, गन्ना भुगतान और कृषि से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं।

हालांकि, छाता चीनी मिल को लेकर सरकार और संबंधित विभाग की वर्तमान स्थिति, योजनाओं तथा आधिकारिक पक्ष को भी इस विषय पर पूरी तस्वीर के लिए शामिल किया जाना आवश्यक है।

अखिलेश यादव को लेकर भी उठाए सवाल

प्रीतम प्रमुख ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी नारायण चौधरी को हाल में अखिलेश यादव के पक्ष में मजबूती से बात करते हुए देखा गया। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मंत्री की राजनीतिक प्राथमिकताओं में कोई बदलाव दिखाई दे रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्मी नारायण चौधरी की राजनीतिक पृष्ठभूमि राष्ट्रीय लोक दल से जुड़ी रही है। ऐसे में उनके मौजूदा राजनीतिक रुख को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, मंत्री के भविष्य के राजनीतिक रुख या किसी संभावित दल-बदल को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए इस तरह की अटकलों को राजनीतिक बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

RLD ने गठबंधन धर्म पर दिया जोर

प्रीतम प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय लोक दल और भाजपा के बीच गठबंधन के बावजूद दोनों दलों की अपनी राजनीतिक पहचान और सामाजिक आधार है। ऐसे में गठबंधन के नेताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयान न दें, जिनसे किसी वर्ग या समुदाय के बीच गलत संदेश जाए।

उन्होंने कहा कि RLD किसानों, कामगारों, गरीबों और ग्रामीणों से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखती है। इसलिए किसानों से जुड़े किसी भी विषय पर पार्टी कार्यकर्ता अपनी बात मजबूती से रखते रहेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के भीतर मतभेद होने की स्थिति में भी बातचीत और राजनीतिक संवाद का रास्ता खुला रहना चाहिए। साथ ही, यदि किसी बयान से कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा होता है, तो पार्टी के लोग लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध दर्ज कराएंगे।

गठबंधन के लिए आगे की चुनौती

RLD और BJP का गठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों दलों के अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक आधार हैं। ऐसे में गठबंधन की मजबूती केवल चुनावी समझौते पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

यही वजह है कि किसानों, जाट समाज और ग्रामीण मतदाताओं से जुड़े बयानों को लेकर दोनों दलों के नेताओं की भाषा पर राजनीतिक नजरें बनी रहती हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवाद पर भाजपा और लक्ष्मी नारायण चौधरी की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

फिलहाल RLD जिला अध्यक्ष प्रीतम प्रमुख की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद गठबंधन के भीतर बयानबाजी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इसे गठबंधन में औपचारिक टूट के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही स्पष्ट होगी

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