फतेहपुर ARTO कार्यालय में लखनऊ की परिवर्तन टीम का निरीक्षण, छापे के बाद दलालों पर कार्रवाई से मचा हड़कंप
रिपोर्ट – राम चंद्र सैनी
फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिला मुख्यालय स्थित एआरटीओ कार्यालय में जिला प्रशासन की छापेमारी के दो दिन बाद शनिवार को लखनऊ से आई आरटीओ परिवर्तन टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने कार्यालय के विभिन्न पटलों का जायजा लिया और वाहन संबंधी कार्यों के लिए पहुंचे लोगों से भी जानकारी ली। इस दौरान कार्यालय परिसर के बाहर स्थित दुकानों और कथित रूप से दलालों के बैठने वाले स्थानों का भी निरीक्षण किया गया।
इससे पहले गुरुवार को जिला प्रशासन की टीम ने एआरटीओ कार्यालय में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया था। पूछताछ के बाद कुछ लोगों को मौके से छोड़ दिया गया, जबकि अन्य लोगों को कोतवाली ले जाया गया था। जांच के दौरान चार लोगों के खिलाफ ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर कथित तौर पर रकम लेने के मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।
जिला प्रशासन की छापेमारी के बाद बदला नजारा
गुरुवार की कार्रवाई के बाद शनिवार को एआरटीओ कार्यालय तो निर्धारित समय पर खुला, लेकिन परिसर में सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी कम भीड़ दिखाई दी। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यालय के आसपास सक्रिय रहने वाले कई कथित दलाल भी नजर नहीं आए। बताया गया कि कुछ लोग कार्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर चाय की दुकानों और ढाबों के आसपास बैठे दिखाई दिए।
इसी बीच, लखनऊ से आरटीओ परिवर्तन विभाग के अधिकारी प्रभात पांडेय अपनी टीम के साथ करीब 12 बजे एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। टीम के पहुंचते ही विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गईं और अधिकारियों ने कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण शुरू किया।
हर पटल की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान लखनऊ से आई टीम ने एआरटीओ कार्यालय में मौजूद विभिन्न पटलों की व्यवस्थाओं को देखा। अधिकारियों ने यह समझने का प्रयास किया कि आम लोगों को वाहन संबंधी कार्यों के लिए किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान कुछ वाहन स्वामियों ने टीम के सामने अपनी समस्याएं भी रखीं। बताया गया कि कुछ वाहन मालिक पिछले करीब तीन महीने से अपने काम के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने लखनऊ से आई टीम के अधिकारियों को अपनी परेशानी से अवगत कराया।
शिकायत सुनने के बाद अधिकारियों की ओर से संबंधित कर्मचारी के आने के बाद कार्यवाही पूरी होने की बात कही गई। हालांकि, ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
कार्यालय के बाहर दुकानों और कथित अड्डों की भी जांच
कार्यालय के अंदर निरीक्षण के बाद आरटीओ परिवर्तन टीम ने परिसर के बाहर बनी दुकानों और उन स्थानों का भी जायजा लिया, जहां कथित तौर पर दलालों के बैठने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
निरीक्षण के दौरान कई दुकानें और आसपास का बाजार बंद मिला। जिला प्रशासन की पूर्व कार्रवाई के बाद कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्र में सन्नाटा दिखाई देने की बात कही गई। वहीं, कुछ लोग अधिकारियों के साथ निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे।
प्रशासन की इस कार्रवाई को एआरटीओ कार्यालय में आम लोगों के कामकाज को पारदर्शी बनाने और कथित बिचौलियों की भूमिका पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दलालों के खिलाफ मुकदमे की चेतावनी
लखनऊ से आई आरटीओ परिवर्तन टीम के अधिकारी प्रभात पांडेय ने कहा कि कार्यालय में वाहन संबंधी कार्य कराने के लिए आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति या कथित दलाल कार्यालय में आकर लोगों का काम कराने के नाम पर हस्तक्षेप करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय अधिकारी या कर्मचारी यदि किसी कथित दलाल के माध्यम से लोगों के काम कराने में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, कार्यालय में आने वाले वाहन स्वामियों और अन्य आवेदकों को अपने कार्य के लिए अनधिकृत लोगों पर निर्भर न रहने तथा निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करने पर जोर दिया गया।
चार लोगों पर दर्ज हुआ था मुकदमा
गुरुवार को हुई जिला प्रशासन की कार्रवाई के दौरान एआरटीओ कार्यालय से कई संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया था। पूछताछ के बाद कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि कुछ को पुलिस के हवाले किया गया। कार्रवाई के दौरान चार लोगों के खिलाफ ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर कथित तौर पर अधिक रकम लेने के मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।
यह कार्रवाई जिला प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से कार्यालय में कथित बिचौलिया व्यवस्था पर नजर रखने के प्रयास के तौर पर देखी जा रही है। वहीं, शनिवार को लखनऊ की टीम के निरीक्षण से यह संकेत मिला कि विभाग कार्यालय की कार्यप्रणाली और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर गंभीरता से समीक्षा कर रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी नजर
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यह संदेश भी दिया कि यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका अनधिकृत माध्यम से काम कराने में पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इससे विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की बात सामने आई है।
आम तौर पर ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, फिटनेस, परमिट और अन्य परिवहन संबंधी कार्यों के लिए लोग एआरटीओ कार्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को अपना काम कराने के लिए अनधिकृत माध्यम की मदद लेनी पड़ती है, तो इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं।
इसलिए, विभाग की ओर से कार्यालय परिसर में अनधिकृत व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने और आम लोगों को सीधे विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
फिलहाल लखनऊ से आई आरटीओ परिवर्तन टीम के निरीक्षण के बाद एआरटीओ कार्यालय की व्यवस्थाओं पर विभागीय निगरानी बढ़ गई है। आने वाले दिनों में यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

