शिक्षक दिवस पर यूपी में सपा का अनोखा प्रदर्शन, बंद स्कूलों को लेकर अखिलेश यादव ने 2027 के लिए किया बड़ा वादा

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रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी 

बांदा: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) ने शिक्षक दिवस के मौके पर प्रदेशभर में बंद और मर्ज किए गए सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर बंद स्कूलों के बाहर मंच लगाकर प्रदर्शन किया और ग्रामीणों के बीच शिक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाया।

इसी क्रम में बांदा के बड़ोखर खुर्द ब्लॉक के बजरंग पुरवा गांव में सपा नेता विदित त्रिपाठी की अगुवाई में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने बंद पड़े स्कूल के गेट के सामने बैठकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।

बंद स्कूल को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

बजरंग पुरवा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव का प्राथमिक विद्यालय बंद होने के बाद छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, मर्ज किए गए स्कूल की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए रोजाना इतनी दूरी तय करना परेशानी का कारण बन रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ही स्कूल होने से बच्चों को आसानी से शिक्षा मिल रही थी। लेकिन स्कूल बंद होने के बाद अभिभावकों के सामने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है।

एक ग्रामीण ने कहा कि गांव का स्कूल बंद होने के कारण छोटे बच्चों को शिक्षा के लिए दूर जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, डेढ़ किलोमीटर का रास्ता छोटे बच्चों के लिए आसान नहीं है। इसलिए सरकार को गांव का स्कूल बंद करने के बजाय उसे संचालित रखना चाहिए था।

शिक्षक दिवस पर सपा ने उठाया शिक्षा का मुद्दा

शिक्षक दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बंद या मर्ज किए गए सरकारी स्कूलों का मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था मजबूत करने के बजाय स्कूलों को बंद या दूसरे विद्यालयों में मर्ज करने से बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशानी हो रही है।

सपा कार्यकर्ताओं ने बंद स्कूलों के बाहर प्रदर्शन करते हुए सरकार से ऐसे विद्यालयों को फिर से शुरू करने की मांग की। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकारी स्कूल ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए इन विद्यालयों की उपलब्धता और पहुंच को बनाए रखना जरूरी है।

विदित त्रिपाठी ने सरकार पर साधा निशाना

बांदा में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सपा नेता विदित त्रिपाठी ने सरकार पर शिक्षा के मुद्दे को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस के मौके पर सरकार की ओर से शिक्षा को लेकर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बंद स्कूलों की समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

विदित त्रिपाठी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का निर्देश है कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों की बंदी का सबसे अधिक असर गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों पर पड़ रहा है।

हालांकि, ये सपा नेता और प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप और दावे हैं। इन पर सरकार या संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

2027 के चुनाव से पहले शिक्षा बना राजनीतिक मुद्दा

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जमीनी मुद्दों को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, बच्चों की स्कूल तक पहुंच और ग्रामीण शिक्षा जैसे मुद्दे आने वाले चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

समाजवादी पार्टी लगातार ऐसे मुद्दों को सामने लाने की कोशिश कर रही है, जिनका सीधा संबंध ग्रामीण और आम परिवारों से है। बंद स्कूलों के बाहर प्रदर्शन भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

दरअसल, ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होते, बल्कि वे गांव के बच्चों के लिए सबसे नजदीकी और आसानी से पहुंच में आने वाली शिक्षण व्यवस्था भी होते हैं। इसलिए किसी विद्यालय के बंद होने या दूसरे स्कूल में मर्ज होने से स्थानीय स्तर पर उसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।

डेढ़ किलोमीटर दूर स्कूल जाने की चुनौती

बजरंग पुरवा में ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों के लिए स्कूल की दूरी को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों को अब करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित विद्यालय जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए रोजाना इतनी दूरी तय करना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन रहा है।

विशेष रूप से प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के मामले में स्कूल की दूरी एक महत्वपूर्ण विषय हो सकती है। अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने और वापस लाने की अतिरिक्त जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है। इसी वजह से ग्रामीण अपने गांव में विद्यालय दोबारा शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में ही विद्यालय संचालित हो तो बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा होगी और अभिभावकों की चिंता भी कम होगी।

सपा ने बनाई चुनावी जमीन मजबूत करने की रणनीति

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा का यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार, किसानों और स्थानीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठाकर अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

शिक्षक दिवस पर बंद स्कूलों के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है। इससे पार्टी ने शिक्षा जैसे मुद्दे को सीधे ग्रामीण परिवारों से जोड़ने की कोशिश की है।

वहीं, अब इस पूरे मामले में सरकार और शिक्षा विभाग का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। यदि बंद या मर्ज किए गए विद्यालयों को लेकर कोई प्रशासनिक कारण, छात्र संख्या या शिक्षा विभाग की नीति है, तो उसका स्पष्ट विवरण सामने आने से स्थिति और साफ हो सकती है।

सरकार के जवाब पर रहेगी नजर

बांदा के बजरंग पुरवा में हुए प्रदर्शन के बाद अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया पर रहेंगी। सपा ने 2027 में सत्ता में आने पर बंद स्कूलों को दोबारा शुरू कराने का वादा किया है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।

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