श्रावस्ती में बंद प्राथमिक विद्यालय पर सपा का प्रदर्शन, शिक्षक दिवस पर भाजपा सरकार के खिलाफ लगाए नारे
रिपोर्ट- सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती। शिक्षक दिवस के अवसर पर श्रावस्ती जिले में बंद प्राथमिक विद्यालय को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। विधानसभा श्रावस्ती क्षेत्र के चेतिया मुरार कहारी प्राथमिक विद्यालय परिसर में पहुंचकर सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार की शिक्षा नीति और कम छात्र संख्या के कारण स्कूल बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ आवाज उठाई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बंद विद्यालयों को दोबारा संचालित किए जाने की मांग की।
सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश में छात्र संख्या कम होने के आधार पर कई विद्यालयों को बंद किया जा रहा है। पार्टी की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसे बंद विद्यालयों के परिसर में पहुंचकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। इसी क्रम में श्रावस्ती में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने बंद विद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया।
बंद स्कूल परिसर में पहुंचे सपा कार्यकर्ता
शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित इस प्रदर्शन में सपा से विधानसभा चुनाव की दावेदारी पेश कर रहे इंजीनियर विनोद त्रिपाठी के समर्थक भी शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने विद्यालय परिसर में एकत्र होकर सरकार के निर्णय का विरोध किया। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार से बंद किए गए विद्यालयों पर पुनर्विचार करने की मांग की।
सपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों का बंद होना बच्चों की शिक्षा के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि गांवों में सरकारी विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं हैं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। ऐसे में स्कूलों को बंद करने के बजाय वहां छात्र संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
शिक्षक दिवस पर प्रदेशभर में विरोध का दावा
समाजवादी पार्टी की ओर से शिक्षक दिवस पर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बंद विद्यालयों के मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाने की बात कही गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत कम छात्र संख्या वाले कुछ विद्यालयों को बंद किया जा रहा है या दूसरे विद्यालयों के साथ समायोजित किया जा रहा है। सपा इसी फैसले के खिलाफ प्रदेशव्यापी विरोध दर्ज करा रही है।
इसी कड़ी में श्रावस्ती के चेतिया मुरार कहारी प्राथमिक विद्यालय में भी प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को बंद करने के बजाय वहां बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, अभिभावकों और ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ाकर बच्चों का नामांकन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
शिक्षा नीति को लेकर सरकार पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की भाजपा सरकार को शिक्षा के मुद्दे पर घेरने का प्रयास किया। कार्यकर्ताओं ने ‘शिक्षा विरोधी भाजपा सरकार मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। हालांकि, यह नारे प्रदर्शनकारियों की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा रहे।
सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की बड़ी संख्या ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती है। इसलिए इन विद्यालयों को मजबूत करने की जरूरत है। पार्टी का तर्क है कि यदि किसी क्षेत्र में छात्र संख्या कम है तो इसके कारणों की समीक्षा की जानी चाहिए। इसके बाद विद्यालय में नामांकन बढ़ाने, शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बुनियादी सुविधाओं में सुधार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की भूमिका अहम
श्रावस्ती जैसे जिलों में सरकारी विद्यालयों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में किसी विद्यालय के बंद होने या दूसरे विद्यालय में विलय किए जाने से विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने दूरी से जुड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
विरोध प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं ने इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होने के पीछे कई स्थानीय कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल छात्र संख्या के आधार पर विद्यालय बंद करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि स्कूलों में बेहतर माहौल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा। परिणामस्वरूप सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
विनोद त्रिपाठी समर्थकों ने दर्ज कराया विरोध
प्रदर्शन में सपा से दावेदारी पेश कर रहे इंजीनियर विनोद त्रिपाठी के समर्थकों की मौजूदगी भी रही। समर्थकों ने पार्टी के प्रदेशव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत बंद विद्यालय परिसर में पहुंचकर सरकार के फैसले के खिलाफ अपनी बात रखी।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि शिक्षा से जुड़े फैसलों पर सरकार को अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों की चिंताओं को भी सुनना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी विद्यालयों को बंद करने के बजाय उन्हें संसाधन उपलब्ध कराकर बेहतर बनाया जाना चाहिए।
राजनीतिक मुद्दा बन रहा स्कूलों का बंद होना
प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को लेकर अब राजनीतिक बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है। विपक्षी दल इस मुद्दे को सरकार की शिक्षा नीति से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से विद्यालयों की व्यवस्था को बेहतर बनाने और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जाने की बात कही जाती रही है।
ऐसे में आने वाले समय में बंद विद्यालयों का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और प्रमुखता से उठ सकता है। खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा, सरकारी स्कूल और विद्यार्थियों से जुड़े विषय राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बन सकते हैं।
प्रदर्शन के जरिए सरकार को संदेश देने की कोशिश
श्रावस्ती में सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन इसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। शिक्षक दिवस जैसे अवसर पर बंद विद्यालय परिसर में प्रदर्शन करके पार्टी ने शिक्षा के मुद्दे को जनता के बीच उठाने का प्रयास किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामलों को केवल प्रशासनिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक प्रभावों का भी आकलन जरूरी है।
फिलहाल, श्रावस्ती के चेतिया मुरार कहारी प्राथमिक विद्यालय में हुए इस प्रदर्शन के बाद बंद विद्यालयों को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सपा ने प्रदेशभर में ऐसे विद्यालयों के मुद्दे को उठाने का दावा किया है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और बंद विद्यालयों को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

