गोरखपुर में प्रिंसिपल ने छात्रा को बनाया मुर्गा, तो पिता ने स्कूल में की तोडफोड़-पिटाई, जाने फिर क्या हुआ ?

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Digital UP News Desk

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्कूल में छात्रा को अनुशासन के नाम पर दी गई सजा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। गोला क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय खिरकिटा दुबे में कक्षा-6 की एक छात्रा को स्कूल देर से पहुंचने पर कुछ समय के लिए ‘मुर्गा’ बनाए जाने का मामला सामने आया है। छात्रा ने घर पहुंचकर जब इसकी जानकारी अपने पिता को दी तो वह नाराज होकर स्कूल पहुंच गया।

आरोप है कि पिता ने स्कूल पहुंचकर प्रिंसिपल से छात्रा को सजा दिए जाने का कारण पूछा। बातचीत के दौरान मामला बढ़ गया और दोनों के बीच विवाद हो गया। प्रिंसिपल की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि पिता ने उनके साथ मारपीट की, उनकी शर्ट फाड़ दी और स्कूल परिसर में तोड़फोड़ कर सरकारी सामान को नुकसान पहुंचाया।

घटना 1 सितंबर की बताई जा रही है। हालांकि, मामला 3 सितंबर को उस समय सामने आया जब विद्यालय के प्रिंसिपल जितेंद्र कुमार ने आरोपी पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, आरोपी के फरार होने की बात सामने आई है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

देर से स्कूल पहुंची थी कक्षा-6 की छात्रा

प्रिंसिपल जितेंद्र कुमार की ओर से दी गई तहरीर के मुताबिक, 1 सितंबर की सुबह कक्षा-6 की छात्रा स्कूल में निर्धारित समय के बाद पहुंची थी। विद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से छात्रा को कुछ देर के लिए ‘मुर्गा’ बनाया गया।

स्कूल की छुट्टी होने के बाद छात्रा अपने घर पहुंची और उसने पिता दिलीप कुमार को स्कूल में दी गई सजा के बारे में बताया। इसके बाद पिता नाराज हो गया। आरोप है कि वह प्रिंसिपल के स्कूल से निकलने से पहले ही विद्यालय पहुंच गया और अपनी बेटी को सजा दिए जाने के बारे में सवाल करने लगा।

प्रिंसिपल ने बताया कि उन्होंने पिता को छात्रा को सजा देने का कारण समझाने की कोशिश की। उनका कहना है कि छात्रा को स्कूल में अनुशासन बनाए रखने के लिए यह सजा दी गई थी। हालांकि, बातचीत के दौरान स्थिति बिगड़ गई और विवाद बढ़ गया।

बातचीत के दौरान बढ़ा विवाद

प्रिंसिपल के अनुसार, पिता ने उनसे बेटी को सजा दिए जाने का कारण पूछा। जवाब मिलने के बाद भी वह संतुष्ट नहीं हुआ और दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। आरोप है कि इसके बाद पिता ने प्रिंसिपल के साथ मारपीट शुरू कर दी।

घटना के दौरान विद्यालय के अन्य शिक्षक भी मौके पर मौजूद थे। शिक्षकों ने हस्तक्षेप करते हुए प्रिंसिपल को बचाने की कोशिश की। कुछ देर बाद उन्होंने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

प्रिंसिपल का आरोप है कि इस दौरान स्कूल परिसर में तोड़फोड़ भी की गई। सरकारी सामान को नुकसान पहुंचने की बात शिकायत में कही गई है। उन्होंने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा होने की आशंका भी जताई है।

शिक्षकों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया

घटना के बाद स्कूल के शिक्षकों में भी नाराजगी देखने को मिली। शिक्षकों ने किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

पुलिस के पहुंचने तक आरोपी मौके से चला गया था। प्रिंसिपल ने पुलिस को घटना की जानकारी देते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।

वहीं, इस पूरे मामले में छात्रा को दी गई सजा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के लिए शिक्षकों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। ऐसे में इस घटना ने शिक्षक और अभिभावक के बीच संवाद तथा बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर भी चर्चा को सामने ला दिया है।

पहले भी विवाद होने की बात सामने आई

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिता दिलीप कुमार पेंट-पॉलिश का काम करता है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी वह स्कूल में ठेका लेने के सिलसिले में गया था। उस समय भी विवाद होने की बात सामने आई है।

हालांकि, पुराने विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और उसका मौजूदा घटना से कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

गोला थाना प्रभारी निरीक्षक चंद्रप्रकाश पांडेय ने बताया कि प्रिंसिपल की शिकायत के आधार पर आरोपी दिलीप कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल आरोपी फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना के दौरान स्कूल में मौजूद शिक्षकों और अन्य लोगों से भी जानकारी ली जा सकती है, ताकि पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।

छात्रा को सजा देने के तरीके पर भी उठे सवाल

इस घटना का एक अहम पहलू छात्रा को दी गई सजा भी है। स्कूल में देर से पहुंचने पर छात्रा को कुछ समय के लिए ‘मुर्गा’ बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, बच्चों को अनुशासित करने के लिए शारीरिक या अपमानजनक सजा का इस्तेमाल उचित है या नहीं, इस पर शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से चर्चा होती रही है।

ऐसे मामलों में अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि किसी अभिभावक को बच्चे के साथ स्कूल में किए गए व्यवहार पर आपत्ति है तो वह विद्यालय प्रशासन से बातचीत कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। दूसरी ओर, स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी भी है कि बच्चों के अनुशासन और व्यवहार संबंधी मामलों को संवेदनशील तरीके से संभाला जाए।

गोरखपुर की यह घटना फिलहाल पुलिस जांच के दायरे में है। प्रिंसिपल की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस आरोपी की तलाश के साथ-साथ घटना के दौरान हुए नुकसान और पूरे विवाद की परिस्थितियों की जानकारी जुटा रही है।

फिलहाल, इस मामले में पुलिस की जांच पूरी होने और सभी पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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