लखीमपुर खीरी के दरी-नगरा में विकास की खुली पोल! कीचड़ भरी सड़क पर लेटकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, प्रधान पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
मितौली, लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के मितौली ब्लॉक की दरी-नगरा ग्राम पंचायत में ग्रामीणों ने गांव की बदहाल सड़कों और विकास कार्यों को लेकर विरोध जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने गुरुवार को गांव की मुख्य सड़क पर जमा कीचड़ में लेटकर अनोखे तरीके से प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के बाद गांव की मुख्य संपर्क सड़क और गलियों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। जगह-जगह कीचड़ जमा होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को रास्ते से निकलने में दिक्कत हो रही है।
कीचड़ भरी सड़कों से ग्रामीण परेशान
दरी-नगरा के ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के बाद गांव की सड़कों पर घुटनों तक कीचड़ जमा हो जाता है। ऐसे में रोजमर्रा के कामों के लिए घर से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी बच्चों को स्कूल भेजने में होती है।
ग्रामीणों के अनुसार, कई जगह सड़क की स्थिति ऐसी है कि पैदल चलना भी आसान नहीं है। इसके अलावा, गांव में यदि किसी व्यक्ति को इलाज के लिए बाहर ले जाना पड़े तो खराब रास्ते के कारण परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की संपर्क सड़क और गलियों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए तथा आवश्यकतानुसार सड़क और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
विकास कार्यों को लेकर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में कराए गए कथित विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीण रामकिशोर, सुनील और राजेश का आरोप है कि पिछले दो वर्षों के दौरान पंचायत के रिकॉर्ड में तीन खड़ंजा, दो नाली निर्माण और मिट्टी भराई जैसे कार्य दर्ज बताए जाते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक इन कार्यों पर करीब 15 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आती है, लेकिन मौके पर उन्हें अपेक्षित निर्माण कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि जहां कहीं खड़ंजा लगाया गया था, वह भी पहली बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों की जांच और मौके के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मनरेगा और आवास योजना को लेकर भी आरोप
ग्रामीणों ने मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय निर्माण से जुड़े कार्यों को लेकर भी शिकायतें उठाई हैं। उनका आरोप है कि मनरेगा में ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान किया गया, जिन्होंने कथित तौर पर काम नहीं किया।
कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि उनके नाम से मनरेगा में राशि आने के बाद उनसे रकम वापस लेने का दबाव बनाया गया। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पात्र लोगों को योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि कुछ प्रभावशाली या करीबी लोगों को लाभ दिए जाने की शिकायत है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि सरकारी योजनाओं में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं।
प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों में कथित अनियमितता के आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गांव की समस्याओं को लेकर पहले भी अधिकारियों को जानकारी दी गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, गुरुवार को हुए प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार मितौली ने प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के लिए करीब पांच दिन का समय मांगा था। ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में वे दोबारा धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य गांव की सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर कराना है। साथ ही वे विकास कार्यों में किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सड़क पर लेटकर जताया विरोध
गांव की बदहाल सड़क को लेकर ग्रामीणों ने जिस तरह प्रदर्शन किया, वह इलाके में चर्चा का विषय बन गया। दर्जनों ग्रामीण सड़क पर जमा कीचड़ में लेट गए और अपनी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
ग्रामीणों का कहना था कि जब सामान्य तरीके से शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें इस तरह विरोध दर्ज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि जल्द सड़क और जल निकासी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो विरोध को आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने गांव में विकास कार्यों की जांच कराने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
डीएम और बीडीओ से जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी और खंड विकास अधिकारी मितौली से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत में पिछले वर्षों में कराए गए विकास कार्यों के अभिलेखों की जांच के साथ मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का सत्यापन कराया जाना चाहिए।
ग्रामीण चाहते हैं कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, गांव की सबसे बड़ी समस्या मानी जा रही खराब सड़क और जल निकासी की व्यवस्था को जल्द ठीक कराया जाए।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल दरी-नगरा ग्राम पंचायत में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच का इंतजार है। ग्रामीणों के आरोपों और सरकारी रिकॉर्ड के बीच वास्तविक स्थिति क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
इस बीच, ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। अब प्रशासन के सामने ग्रामीणों की शिकायतों का परीक्षण करने और सड़क, नाली समेत विकास कार्यों की स्थिति का सत्यापन करने की चुनौती है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन की ओर से वास्तविक स्थिति ग्रामीणों के सामने रखी जा सकती है। फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

