मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई: 4000 वर्गमीटर में विकसित हो रही कथित अवैध कॉलोनी ‘राधापुरम एन्क्लेव’ पर चला बुलडोजर
रिपोर्ट – योगेश भरतद्वाज
मथुरा: मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) ने क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण और बिना स्वीकृत ले-आउट विकसित की जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध अभियान जारी रखते हुए एक और बड़ी कार्रवाई की है।
प्राधिकरण की टीम ने कोसीकलां क्षेत्र में लगभग 4000 वर्गमीटर भूमि पर विकसित की जा रही ‘राधापुरम एन्क्लेव’ नामक कॉलोनी में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान कथित रूप से बिना स्वीकृति निर्मित बाउंड्रीवॉल और कच्ची सड़कों को हटाया गया।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई संबंधित न्यायिक आदेशों और लागू नियमों के तहत की गई।
वहीं, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।
अवैध निर्माण के विरुद्ध अभियान जारी
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण लंबे समय से बिना स्वीकृत ले-आउट और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अभियान चला रहा है।
इसी क्रम में कोसीकलां थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के निकट स्थित एक कॉलोनी को लेकर कार्रवाई की गई।
प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित स्थल पर आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना कॉलोनी का विस्तार किया जा रहा था। जांच के बाद इसे नियमानुसार कार्रवाई योग्य माना गया।
कहां की गई कार्रवाई?
प्राधिकरण के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर स्थित बृज वसुंधरा कॉलोनी से आगे और बृज भूमि ढाबा के समीप की गई।
अधिकारियों का कहना है कि यहां लगभग 4000 वर्गमीटर भूमि पर पहले से मौजूद विकास कार्य का विस्तार किया जा रहा था।
प्राधिकरण के रिकॉर्ड के अनुसार यह कार्य आवश्यक ले-आउट स्वीकृति के बिना किया जा रहा था।
‘राधापुरम एन्क्लेव’ नाम से विकसित की जा रही थी कॉलोनी
एमवीडीए के अनुसार संबंधित भूमि पर ‘राधापुरम एन्क्लेव’ नाम से कॉलोनी विकसित की जा रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि यहां कथित रूप से बिना ले-आउट स्वीकृति के—
- बाउंड्रीवॉल का निर्माण,
- कच्ची सड़कों का निर्माण,
- प्लॉटिंग संबंधी विकास कार्य
किए जा रहे थे।
प्राधिकरण का कहना है कि इस प्रकार का विकास उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के अनुरूप स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता।
कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई कार्रवाई
एमवीडीए के अनुसार मामले में संबंधित अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई प्रारंभ की गई थी।
प्राधिकरण का कहना है कि सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष नियत तिथियों पर उपस्थित नहीं हुआ।
इसके बाद उपलब्ध अभिलेखों और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करते हुए सक्षम प्राधिकरण द्वारा 5 अगस्त 2025 को ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया।
अधिकारियों के अनुसार आदेश के बाद भी निर्धारित समय सीमा में कथित अनधिकृत निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके चलते प्रवर्तन कार्रवाई की गई।
भारी अमले के साथ पहुंची टीम
मंगलवार को प्राधिकरण की टीम भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची।
एमवीडीए के अनुसार कार्रवाई उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन. के निर्देश पर तथा सचिव आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई।
इस दौरान प्रवर्तन दल ने कथित अनधिकृत बाउंड्रीवॉल और कच्ची सड़कों को हटाने की कार्रवाई की। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।
प्राधिकरण ने क्या कहा?
प्राधिकरण सचिव आशीष कुमार सिंह ने कहा कि एमवीडीए क्षेत्र में बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी कॉलोनी में प्लॉट खरीदने से पहले यह अवश्य सुनिश्चित करें कि संबंधित परियोजना को प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हैं या नहीं।
उनका कहना था कि इससे भविष्य में कानूनी और आर्थिक परेशानियों से बचा जा सकता है।
प्लॉट खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कॉलोनी में निवेश करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच करना आवश्यक है।
- प्राधिकरण से स्वीकृत ले-आउट की पुष्टि करें।
- भूमि का स्वामित्व और कानूनी दस्तावेज जांचें।
- विकास प्राधिकरण या स्थानीय निकाय से आवश्यक अनुमतियों की जानकारी लें।
- केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर निवेश न करें।
- सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराने के बाद ही खरीदारी का निर्णय लें।
इन सावधानियों से संभावित कानूनी विवादों और वित्तीय जोखिमों से बचा जा सकता है।
अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई क्यों जरूरी?
शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्वीकृति विकसित की गई कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, जलापूर्ति, सीवर, विद्युत और सार्वजनिक अवसंरचना की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
इसके अतिरिक्त ऐसी कॉलोनियों में भविष्य में स्वामित्व, पंजीकरण और विकास संबंधी कानूनी विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं।
इसी कारण विकास प्राधिकरण समय-समय पर अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई करता है।
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा कोसीकलां में लगभग 4000 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही ‘राधापुरम एन्क्लेव’ पर की गई कार्रवाई यह संकेत देती है कि बिना स्वीकृत ले-आउट और अनधिकृत निर्माण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
प्राधिकरण का कहना है कि सभी निर्माण कार्य संबंधित कानूनों और स्वीकृतियों के अनुरूप होने चाहिए।
वहीं, नागरिकों के लिए भी यह आवश्यक है कि किसी भी आवासीय परियोजना में निवेश से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य करें।
इससे भविष्य में कानूनी जटिलताओं से बचा जा सकता है और सुरक्षित निवेश सुनिश्चित किया जा सकता है।

