यूपी में 23 जिलों में बाढ़, 16 हजार से ज्यादा रेस्क्यू; बिहार-एमपी में नदियां उफान पर
Digital UP News Desk
लखनऊ: देश के कई राज्यों में मानसून की बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है और अब तक 16 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। वहीं, वाराणसी, चित्रकूट और प्रयागराज समेत कई इलाकों में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
दूसरी ओर, बिहार के कई जिलों में गंगा समेत प्रमुख नदियां उफान पर हैं। पटना और आसपास के इलाकों में प्रशासन ने सुरक्षा उपाय तेज कर दिए हैं। मध्य प्रदेश में भी मंदाकिनी और नर्मदा के बढ़ते जलस्तर से कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश, भूस्खलन और सड़क हादसों से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 30 जून से 3 सितंबर के बीच हिमाचल में कुल 266 मौतें दर्ज की गई हैं।
उत्तर प्रदेश के 23 जिले बाढ़ की चपेट में
उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रशासन के अनुसार प्रदेश के 23 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। वाराणसी और चित्रकूट को बाढ़ से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में बताया जा रहा है। इसके अलावा प्रयागराज, बलिया, गाजीपुर, चंदौली और लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों में भी जलस्तर बढ़ने से प्रशासन अलर्ट पर है।
वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ाई गई है। जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
वाराणसी और चित्रकूट में बढ़ी चुनौती
वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते निचले इलाकों में पानी पहुंचने की समस्या सामने आई है। कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है और प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
चित्रकूट में भी मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन की ओर से निगरानी की जा रही है। कुछ स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके अलावा प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है। लगातार बारिश और ऊपर के क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण नदियों के जलस्तर में बदलाव हो रहा है।
गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान के ऊपर
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। इसके लिए जमीनी टीमों के साथ तकनीकी साधनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखी गई है।
इस बीच, लगातार बारिश को देखते हुए लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और नदी या जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की जा रही है।
बिहार में 16 जिलों में बाढ़ का असर
बिहार में भी बाढ़ की स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है। राज्य के 16 जिलों में लाखों लोगों के प्रभावित होने की खबर है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
पटना में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक पटना सुरक्षा दीवार से जुड़े सभी 108 रास्तों को बंद किया गया है, ताकि नालों के रास्ते पानी शहर के भीतर प्रवेश न कर सके।
वहीं, राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
मध्य प्रदेश में मंदाकिनी और नर्मदा उफान पर
मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। मंदाकिनी और नर्मदा नदी के बढ़ते जलस्तर से कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हुआ है।
छतरपुर, सतना, मंडला और मैहर समेत कई जिलों में बारिश का असर देखने को मिल रहा है। जलाशयों में बढ़ते पानी के बीच कुछ बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति भी सामने आई है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
मौसम विभाग की ओर से प्रदेश के कई हिस्सों में आगे भी बारिश की संभावना जताई गई है। इसलिए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है।
हिमाचल में मानसून से 266 मौतें
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं ने भी गंभीर असर डाला है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 30 जून से 3 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश में कुल 266 लोगों की मौत हुई है। इनमें 158 मौतें सड़क हादसों में और 108 मौतें प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी घटनाओं में हुईं।
प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी मौतों में भूस्खलन और डूबने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में प्रदेश को 1,235 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान भी दर्ज किया गया है।
बारिश और भूस्खलन के कारण हिमाचल में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने राहत और सामान्य व्यवस्था बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
कई राज्यों में मौसम विभाग का अलर्ट
मानसून के सक्रिय रहने के कारण उत्तर भारत के कई राज्यों में आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सतर्क रहना जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बारिश के साथ-साथ बांधों से छोड़ा गया पानी भी नदियों के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों पर जोर दे रहा है। वहीं हिमाचल प्रदेश में बारिश से हुए नुकसान के बाद प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को बहाल करने की कोशिश जारी है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में बाढ़ की स्थिति और बिहार तथा मध्य प्रदेश में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि राहत की बात यह है कि प्रभावित इलाकों में बचाव दल और प्रशासनिक टीमें लगातार काम कर रही हैं। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

