श्रावस्ती के सोनवा CHC में गर्भवती से अभद्रता का आरोप, स्टाफ नर्स पर 10 हजार रुपये मांगने की शिकायत
रिपोर्ट – सूर्य प्रकाश शुक्ला
श्रावस्ती: उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सोनवा में इलाज कराने पहुंची एक गर्भवती महिला के साथ कथित अभद्रता का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला ने अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स अलका पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि इलाज के दौरान उसके साथ गाली-गलौज और कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा डिलीवरी कराने के नाम पर 10 हजार रुपये मांगने का भी आरोप लगाया गया है।
मामले की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। श्रावस्ती के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए समिति गठित कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पेट दर्द की शिकायत लेकर CHC पहुंची थी महिला
शिकायत के मुताबिक, सोनवा क्षेत्र की रहने वाली गर्भवती महिला पेट दर्द और अन्य परेशानी के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनवा पहुंची थी। महिला और उसके परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल में तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिलेगी।
पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद वह स्टाफ नर्स के पास इलाज के लिए गई। इस दौरान उससे पहले पर्चा बनवाकर लाने के लिए कहा गया। महिला का कहना है कि उस समय उसे काफी दर्द हो रहा था। इसलिए उसने नर्स से अनुरोध किया कि इलाज की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए और इसी बीच वह पर्चा बनवा लेगी।
आरोप है कि इसी बात को लेकर स्टाफ नर्स नाराज हो गई और महिला के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। पीड़ित परिवार के मुताबिक, इस दौरान महिला को अपमानजनक और कथित जातिसूचक शब्द भी कहे गए।
डिलीवरी के नाम पर 10 हजार रुपये मांगने का आरोप
पीड़ित महिला ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उसके मुताबिक, डिलीवरी कराने के एवज में उससे 10 हजार रुपये की मांग की गई। परिवार का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के दौरान इस तरह की मांग किए जाने से वे परेशान हो गए।
हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में महिला से किसी तरह की धनराशि मांगी गई थी या नहीं।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायत एक गर्भवती महिला के इलाज से जुड़ी है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मरीजों के साथ व्यवहार और कथित धन मांगने जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से मामला गंभीर
पीड़िता ने स्टाफ नर्स पर कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करने का आरोप भी लगाया है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला और गंभीर हो सकता है।
पीड़ित परिवार ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सकीय सहायता और जरूरी सुविधाएं मिलना महत्वपूर्ण है।
वहीं, मामले की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए फिलहाल सभी पक्षों को जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
स्वास्थ्य महानिदेशक और अधिकारियों से की शिकायत
पीड़ित दंपती ने मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक, श्रावस्ती के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिलाधिकारी समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
परिवार का कहना है कि महिला के साथ कथित अभद्रता और समय पर इलाज नहीं मिलने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही, यदि डिलीवरी के नाम पर पैसे मांगने का आरोप सही पाया जाता है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
शिकायत के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की नजर है।
CMO ने गठित की जांच समिति
मामले का संज्ञान लेते हुए श्रावस्ती के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच समिति गठित करने की जानकारी दी है। समिति शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि महिला अस्पताल कब पहुंची थी, उस समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और इलाज की प्रक्रिया में क्या हुआ। इसके अलावा कथित रूप से पैसे मांगने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल सोनवा CHC से जुड़ा यह मामला आरोपों और शिकायत के स्तर पर है। स्टाफ नर्स पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी। ऐसे में जांच समिति की रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना भी जरूरी है। खासकर गर्भवती महिलाओं के उपचार के दौरान संवेदनशीलता और समय पर चिकित्सकीय सहायता महत्वपूर्ण होती है।
अब देखना होगा कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष देती है और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। पीड़ित परिवार ने दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, विभाग की ओर से फिलहाल जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की बात कही गई है।

